मथुरा के महासंग्राम का खौफनाक सच


नई दिल्ली। दो साल पहले अपनी मांगों को लेकर रामवृक्ष यादव दिल्ली में ‘सत्याग्रह’ करने वाला था। लेकिन दिल्‍ली में जगह नहीं मिलने की वजह से इसने मथुरा के जवाहरबाग में ही अपना अड्डा बना लिया। 15 मार्च 2014 को वो करीब 200 लोगों को लेकर मथुरा पहुंचा। उस वक्त मथुरा प्रशासन ने इस गुट को जवाहरबाग में एक दिन के लिए सत्याग्रह करने की इजाजत दी थी। लेकिन उसके बाद रामवृक्ष यादव ने कभी इस जगह को खाली नहीं किया।  प्रशासन ने कई मौकों पर इस गुट को समझाने की कोशिश की, लेकिन वो नहीं माने, इतना ही नहीं कई मौकों पर तो रामवृक्ष यादव के समर्थकों ने, समझाने के लिए गए अधिकारियों के साथ मारपीट भी की।रामवृक्ष यादव पहले खुद जवाहरबाग में एक झोपड़ी बनाकर रहने लगा, फिर धीरे-धीरे वहां कई झोपड़ियां बन गईं।   खुद को नेताजी सुभाषचंद्र बोस का अनुयायी कहने वाले ये लोग, पेट्रोल की कीमत एक रुपये में 40 लीटर और डीजल की कीमत एक रुपये में 60 लीटर करने की मांग कर रहे हैं।  ये चाहते हैं कि देश में सोने के सिक्कों का प्रचलन शुरू हो जाए।  आजाद हिंद फौज के कानून माने जाएं और इसी की सरकार भारत में शासन करे।  ये चाहते हैं कि भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का चुनाव रद्द किया जाए।  ये चाहते हैं कि आज़ाद हिंद बैंक की करेंसी से लेन-देन किया जाए।  खुद को सत्याग्रही कहने वाले इन लोगों की मांग है कि जवाहरबाग की 270 एकड़ जमीन इन लोगो को सौंप दी जाए। इसके अलावा ‘सत्याग्रहियों’ पर पुलिस कोई कार्रवाई ना करे।  देश में अंग्रेजों के समय से चल रहे कानून खत्म किए जाएं।  पूरे देश में मांसाहार पर बैन लगाया जाए और मांसाहार करने वालों को सजा दी जाए।

1464960789-1665इसी अवैध कब्जे को हटाने के लिए जब उत्तर प्रदेश पुलिस ने दबिश दी तो इन सत्याग्रहियों ने तमंचों, राइफइलों और देशी बमों से पुलिस पर हमला बोल दिया। तकरीबन 280 एकड़ में फैले जवाहर बाग के कई हिस्सों में उपद्रवियों ने आग लगा दी। देखते ही देखते उपद्रवियों ने पुलिस पर गोलीबारी शुरू कर दी। पुलिस को संभलने का मौका ही नहीं मिला और ऑपरेशन का नेतृत्व कर रहे एसपी मुकुल ‍‍द्विवेदी शहीद हो गए। इस हमले में एसओ संतोष यादव की भी मौत हो गई।इस उपद्रव में 12 पुलिसवाले भी जख्मी हो गए और 40 से अधिक लोग घायल हैं।

गौरतलब है कि यहां कई तरह के अवैध काम चल रहे थे और प्रशासन का दावा है कि इन दंगाइयों के साथ कुछ नक्सली भी मिले हुए थे।  कब्जा हटाने के अदालत के आदेश के बावजूद विरोध की वजह से जमीन खाली नहीं कराई जा सकी थी। हाल ही में हाईकोर्ट ने प्रशासन को जगह खाली कराने के निर्देश दिए थे। इसके बाद हुई कार्यवाही में एसपी और एसओ समेत 22 लोगों की मौत हुई।

बताया जाता है कि एसपी और कलेक्टर में इस कार्रवाई को लेकर मतभेद था, कलेक्टर शनिवार को कार्रवाई चाहते थे पर एसपी ने इसे गुरुवार को ही ऑपरेशन शुरू कर दिया।  गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से फोन पर बात की और शहीद हुए पुलिस अधिकारियों के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। राजनाथ सिंह ने अखिलेश को केंद्र की तरफ से हर संभव मदद का आश्वासन दिया। सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने दोषियों की तत्काल  गिरफ्तारी और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मामले की जांच के भी आदेश दे दिए गए हैं।

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