एक रहस्यमय किला जो श्राप के कारण बन गया भूतों का किला


राजस्थान के अलवर जिले में स्थित भानगढ़ के किले को “भूतो का भानगढ़” (most haunted bhangarh fort ) भी कहा जाता है, जो तीन तरफ़ से पहाड़ियों से सुरक्षित है। 1573 में इस क़िले का निर्माण आमेर के राजा भगवंत दास ने बनवाया था। लगभग 300 वर्षों तक आबाद रहने वाला विक्रम संवत 1722 में हरिसिंह के गद्दी संभालने के बाद अपनी चमक खोने लगा । उस समय औरंगजेब के शासन का था और उसके दबाव में आकर हरिसिंह के दो बेटों ने मुस्लिम धर्म अपना लिया और अपना नाम बदलकर मोहम्मद कुलीज एवं मोहम्मद दहलीज के नाम से रहने लगे । औरंगजेब की शासन पर पकड़ ढीली होने लगी है तथा दोनों भाई भी शासन चलाने में कमजोर थे, इस परिस्थिति का पूरा फायदा जयपुर के महाराजा सवाई जय सिंह ने उठाया और भानगढ़ किले( bhangarh fort)पर कब्ज़ा कर लिया |

bhangarh fort haunted stories in hindi

भानगढ़ की राजकुमारी रत्नावती इतनी खुबसूरत थी कि उनके रूप की चर्चा पूरे देश में हुआ करती थी और देश के हर कोने के राजकुमार उनसे विवाह करने की इच्छा रखते थे। एक बार राजकुमारी रत्नावती अपनी सखियों के साथ बाजार में एक इत्र की दुकान पर इत्रों को हाथों में लेकर उसकी खुशबू ले रही थी। दुकान से थोड़ी दूरी पर काले जादू का महारथी सिंधु सेवड़ा नाम का व्यक्ति खड़ा होकर राजकुमारी को गौर से देख रहा था। सिंधु सेवड़ा राजकुमारी के रूप पर ऐसा मोहित हुआ कि उसने राजकुमारी को अपने वश में करने की ठान ली। उसने राजकुमारी पर तंत्र प्रयोग किया।

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बताया जाता है कि राजकुमारी ने जिस इत्र की बोतल को पसंद किया उसने राजकुमारी के वशीकरण के लिए उस बोतल पर काला जादू कर दिया लेकिन किसी तरह से राजकुमारी को इस राज के बारे में पता चल गया और राजकुमारी ने इत्र की बोतल तोड़ दी | जिसके बाद तांत्रिक सिंधु सेवड़ा की मौके पर ही मौत हो गयी तथा मरते मरते तांत्रिक ने श्राप दिया कि इस किले में रहने वालें सभी लोग जल्दी ही मर जायेंगे और वो दोबारा जन्म ने लेंगे तथा उनकी रूह ताउम्र इसी किले में भटकती रहेंगी।

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यहाँ भूत होने की बात प्रमाणित है | किले के अंदर केवल खंडहर हो चुके महल में ही भूत रहते है | महल की सीढ़ियों के बिलकुल पास भोमिया जी का स्थान है , जिसके कारण भूत महल से नीचे नहीं आते है । इसलिए रात के समय किले के परिसर में रहा जा सकता है परन्तु महल के अंदर रात में नहीं जाना चाहिए।

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ASI द्वारा खुदाई में इस शहर के  प्राचीन ऐतिहासिक स्थल होने के पर्याप्त सबूत मिले हैं, फिलहाल इस किले की देख रेख भारत सरकार द्वारा की जा रही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण  (ASI), इंडिया की टीम किले के चारों तरफ मौजूद रहती हैं तथा उन्होंने हिदायत दी है कि सूर्यास्त के बाद इस इलाके में प्रवेश वर्जित है।

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भानगढ़ का किला( bhangarh fort)पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो चुका है, जबकि भानगढ़ के सारे के सारे मंदिर सही है मगर अधिकतर मंदिरो से मूर्तिया गायब है। सोमेश्वर महादेव मंदिर में जरूर शिवलिंग अभी भी मौजूद  है, जिसमे सिंधु सेवड़ा तांत्रिक के वंशज ही पूजा पाठ कर रहे है |

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अगर भानगढ़ जाना हो तो सावन के महीने ( जुलाई -अगस्त ) में जाना चाहिए क्योकि तीन तरफ से अरावली की पहाड़ियो से घिरे इस किले में मानो बहार आ जाती है और यदि सोमेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी से भानगढ़( bhangarh fort)का इतिहास सुनना हो तो आप सोमवार के दिन जाए क्योंकि पुजारी जी सोमवार को पूरा दिन मंदिर में रहते है बाकी दिन तो सुबह पूजा करके वापस चले जाते है।

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