कोंडली में नया सिनेमा


 पूर्वी दिल्ली और नॉएडा के बीच हिंडन नहर के नाले के साथ –साथ बसी बस्ती कोंडली में बीती 26 जनवरी की तेजधूप वाली दुपहर को राजनीतिक रूप से सक्रिय एक समूह ने‘सोच बदलो –समाज बदलो’ की थीम पर एक बैठक का आयोजन किया. एक सोची समझी रणनीति के बतौर इस बैठक में सिनेमा के जरिये मुद्दों पर बहस की शुरुआत का मन बनाया गया.

घुमंतू स्क्रीन और स्पीकर के साथ जब नियत समय से पहले सिने एक्टिविस्टों की टीम कोंडली की गलियों से होती हुई उस मकान पर पहुँची जहां मीटिंग करनी तो पता चला कि जिस कमरे में बात होगी वह बहुत छोटा है. सिनेमा के बहाने अधिक लोगों की आशंका की वजह से अब मन मारकर समूह को छत की शरण लेनी पड़ी. सिनेमा दिखाने की मूल शर्त पर्याप्त अँधेरे की जरुरत के लिहाज से काफी समय जुगाड़ तकनीक से छत के एक हिस्से को तिरपाल से ढककर अन्धेरा जुगाड़ने में लग गया. आधे –अधूरे अंधरे के साथ मुख्यधारा की हिन्दी फ़िल्म ‘चमेली की शादी’ की स्क्रीनिंग से शो की शुरुआत हुई. जैसे –जैसे फ़िल्म के संवाद और गाने आस –पड़ोस में महिलाओं के कान में पड़े छत पर चला रहा शो हाउसफुल होने लगा और एक समय 8 फीट गुना 15 फ़ीट के इस अत्यंत छोटी जगह में 100 दर्शक समा चुके थे. इस फिल्म के बहाने जाति की जकड़न व्यर्थता और लड़कियों द्वरा स्वतंत्र निर्णय लिए जाने के महत्व पर जमकर बहस हुई.

चाय और समोसे का दौर ख़त्म हो जाने के बाद दर्शकों की मांग पर कुछ और फिल्मों के क्रम में  कनाडा के मशहूर एनिमेटर नार्मन मेक्लेरन की दो लघु फिल्में ‘नेबर्स’ और ‘द चेयरी टेल’ व के पी ससी का आदिवासियों के संघर्ष से सम्बंधित म्यूजिक वीडियो ‘गावं छोड़ब नाही’ भी दिखाया गया. मजे की बात है कि इन एकदम नयी तरह की फिल्मों के बहाने भी जमकर चर्चा हुई.

इस स्क्रीनिंग में युवा छात्र-छात्राओं की अच्छी भागीदारी थी जिस वजह से कई बार उन्होंने रुकती हुई बहस में रोचक सवाक कर उसे आगे बढ़ाया. एक बार बहस शुरू हो जाने पर हर तरह के भेद ख़तम हो जा रहे थे. यह भी समझाना रोचक और उत्साहवर्धक था कि लोग हर तरह के सिनेमा देखने की इच्छा रखते हैं बशर्ते वोह उनके सरोकारों से जुड़ता हो. आधे –अधूरे से कोंडली की छत पर तिरपाल से हासिल कम अँधेरे वाले इस सिनेमा हाल और सिनेमा शो की यह खासियत थी कि इस तरह की स्क्रीनिंग को जल्द दुहराने का अनुरोध कई लोगों ने किया.

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संजय जोशी

संजय जोशी

स्वतंत्र फ़िल्मकार और राष्ट्रीय संयोजक, प्रतिरोध का सिनेमा

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