भारत में हर साल मामूली बीमारियों से मर जाते हैं पचास हजार बच्चे


नई दिल्ली। भारत में हर साल दसियों हजार बच्चे अपने पैदा होने के महज कुछ समय बाद ही मर जाते हैं जबकि उनका इलाज करके उन्हें इन मामूली बीमारियों से बचाया जा सकता है। असल में शोधों में पाया गया है कि एक ऐसे बैक्टीरिया है जो नवजात बच्चों को बीमार करता है और उस पर एन्टीबॉयटिक दवाइयां भी असर नहीं करती।

हाल ही में एक अंतराष्ट्रीय समाचार चैनल अल जजीरा ने एक डॉक्यूमेंट्री बनाई जिसका नाम है द राइजन ऑफ इंडियाज सुपरबग। इस डॉक्यूमेंट्री में चैनल ने खुलासा किया कि असल में बच्चों में बीमारियों का कारण एक सुपरबग है जो एक ऐसा बैक्टीरिया है जिसने ऐंटिबायॉटिक्स के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता विकसित कर ली है। डॉक्यूमेंट्री में इस सुपरबग के कारण मौत के शिकार नवजात बच्चों के मां बाप की दिल दहला देने वाली तस्वीर पेश की गई है।

चौंकाने वाली बात यह भी है कि ये सुपरबग भारत में ही नहीं वरन‍् विश्व के कई देशों में पैर पसार चुका है। माइक्रोबायोलॉजिस्ट प्रोफेसर रामनन लक्ष्मीनारायणन के अनुसार  इस बैक्टीरिया के कारण दुनिया एक बार फिर खतरे में पड़ गई है। भारत ने पिछले कुछ सालों में जो नवजात बच्चों की मृत्यु दर को कम करने में सफलता पाई थी वह खतरे में पड़ गई है। उन्होंने बताया कि ये सुपरबग्स भारत में हर साल करीब 58 हजार बच्चों की मौत का कारण बन रहा है और जल्दी ही अगर कुछ नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में मरने वाले बच्चों की संख्या और बढ़ने की संभावना है। प्रोफेसर रामनन ने बताया कि यह बैक्टीरिया इतना घातक है कि बाजार में उपलब्ध सबसे स्ट्रॉन्ग एंटिबायॉटिक्स भी इस पर असर नहीं कर रही हैं. इसका नतीजा यह हो रहा है कि  छोटी छोटी बीमारी जैसे पेशाब के इंफेक्शन और न्यूमोनिया भी जानलेवा साबित हो रहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो वो दिन दूर नहीं जब ये दुनिया पचास साल पीछे चली जाएगी।

उन्होंने बताया कि इस बैक्टीरिया के फैलने के कई कारण हैं, जिनमें से एक सबसे बड़ा कारण एंटीबॉयाटिक्स का अंधाधुंध इस्तेमाल। पश्चिमी देशों में डॉक्टर्स गंभीर स्थितियों में एंटीबॉयोटिक्स दवाइयों का इस्तेमाल करते हैं, जबकि भारत में बिना डॉक्टर की पर्ची के किसी भी मेडिकल स्टोर से ऐसी दवाओं को प्राप्त किया जा सकता है, और लोग सामान्य बीमारियों में भी धड‍़ल्ले से एंटीबॉयोटिक्स दवाओं का उपयोग करते हैं जिस कारण इस बैक्टीरिया में एंटीबायोटिक्स दवाओं के प्रति भी प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो गई है।

 

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