एक ईमानदार दृश्य की ताकत


15 जुलाई 2004 को मणिपुर में आसाम रायफल्स के मुख्यालय, जो कि उस समय पवित्र कांगला फोर्ट में चल रहा था, के सामने 12 मणिपुरी महिलाओं ने अपना प्रतिरोध दर्ज करते हुए ‘नग्न प्रदर्शन’ किया. उनका यह गुस्सा मणिपुर और भारत सरकार की सेना के खिलाफ था जिसने काले क़ानून आर्म फ़ोर्सेज़ स्पेशल पावर एक्ट 1958 का इस्तेमाल करते हुए मणिपुर के लोगों पर कहर बरपाया हुआ था. मणिपुर में यह सारा मसला तब उछाल पर आया जब वहाँ की 34वर्षीय नवयुवती थंजम मनोरमा की 17 आसाम राइफल्स के जवानों ने 10 जुलाई 2004 को पहले बलात्कार और फिर हत्या कर दी. इस घटना के विरोध में समूचे मणिपुर में तीखे विरोध होने शुरू हुए, एक दूसरी नवयुवती इरोम शर्मिला ने काले क़ानून ए एफ एस पी ए 1958 को रद्द किये जाने के खिलाफ़ भूख हड़ताल शुरू कर दी जो आज तक जारी है और 15 जुलाई को हुआ वह सर्वोच्च प्रतिरोध जिसमे 12 औरतें नग्न प्रदर्शन करने के बाद गुस्से में भारतीय सेना को उनका बलात्कार करने को ललकार रही हैं .

यह पूरा मामला वर्षो से चल रहे मणिपुरी लोगों के गुस्से के अलावा जिस बात से पूरे देश में काले क़ानूनए एफ एस पी ए 1958 के खिलाफ जनमत बना सका वह था मणिपुरी औरतों का सामूहिक नग्न प्रदर्शन. यह ऐतिहासिक और परेशान करने वाला नग्न प्रदर्शन अधिकतम 30 सेकण्ड का है. अनाम छायाकारों द्वरा रिकार्ड किये गए इस 30 सेकण्ड की अवधि के वीडियो फुटेज का बहुतेरे पत्रकारों और फिल्मकारों ने अपने –अपने काम में इस्तेमाल किया. कोलकाता के सत्यजित रे फ़िल्म और टी वी संस्थान से पढ़े फ़िल्मकार हओबम पबन  कुमार ने तो इस काले क़ानून पर 87 मिनट की दस्तावेजी फिल्म बनाकर राष्ट्रीय पुरूस्कार भी हासिल कर लिया. ये अलग बात है कि उसी वर्ष भारत सरकार ने इस काले क़ानून को छतीसगढ़ में भी लागू कर दिया. लेकिन प्रतिरोध की कहानी परवान तभी चढ़ती है जब हम एक नए दर्शक समूह को पूरे संदर्भों के साथ 30 सेकण्ड का वह दृश्य दिखा देते हैं. उस 30 सेकण्ड से बनने वाला ईमानदार तर्क बड़े से बड़े महीन से महीन सरकारी झूठ पर भारी पड़ता है. वह इस बात की परवाह भी नहीं करता कि कैसे चालाकी से भारत सरकार ने हओबम पबन कुमार की धार को राष्ट्रीय पुरुस्कार से कुंद कर दिया क्योंकि वह जब भी किसी बंद कमरे में दिखाया जाता है तब उसके देख लिए जाने के बाद बचता है ढेर सारा अवसाद और बहुत सारा संकल्प इस काले क़ानून को जल्द से जल्द ख़त्म कर देने के लिए .

 

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संजय जोशी

संजय जोशी

स्वतंत्र फ़िल्मकार और राष्ट्रीय संयोजक, प्रतिरोध का सिनेमा

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