अनजाने में हम सब करते है साइबर क्राइम


लगभग इंटरनेट का इस्तेमाल सभी लोग करते है और जाने अनजाने तौर पर सभी साइबर क्राइम के तहत आते हैं।

लेखन, फोटो, गीत-संगीत, सॉफ्टवेयर, विडियो, कार्टून, किताब, ई-बुक, वेबसाइट आदि क्रिएटिविटी करने वाले हर शख्स के पास हक होता है, कि वो अपनी क्रिएटिविटी को ऐसी सुरक्षा दे सकता है, जिसके बाद कोई भी गैरकानूनी ढंग से इसकी नकल नही कर सकता है, इस सुरक्षा को कॉपीराइट कहते हैं। कानूनी प्रक्रिया के बाद आप आसानी से कॉपीराइट ले सकते है यदि आप ऐसा नही करते है तो भी मूल रचना पर आपका ही हक़ होगा ।

यदि किसी और का फोटो उसकी मंजूरी के बिना किसी भी साईट पर पोस्ट करना तथा गूगल से कोई फोटो अपनी साईट पर डालना आदि कार्य भी साइबर क्राइम की सूचि में आता है। हालाकि कुछ ब्लॉगर गूगल इमेजेज से फोटो निकाल कर उसका इस्तेमाल करते हुए तस्वीर के नीचे साभार गूगल लिख देते है जबकि  गूगल पर दिखने वाले सर्च नतीजों, फोटो आदि पर गूगल का कोई मालिकाना हक नहीं होता है। अत: हमेशा आभार उस वेबसाइट का जताये,  जहां से गूगल ने उसे ढूंढा है।

इंटरनेट की मदद से चाइल्ड पॉर्नोग्रफी देखना तथा किसी को ऐसी सामग्री भेजना भी साइबर क्राइम की सूची में आता है। 18 साल से कम उम्र वालों से संबंधित अश्लील सामग्री देखना, इंटरनेट से भेजना और सहेजना साइबर क्राइम है। इन्हें न खुद देखें, न किसी को फॉरवर्ड करें।

इंटरनेट पर लोगो, आइकंस, प्रतीक चिह्नों, ट्रेडमार्क वगैरह की नक़ल व चोरी करना भी साइबर क्राइम की सूची में आता है | ये न सिर्फ कॉपीराइट का उल्लंघन हैं बल्कि ऑनलाइन ट्रेडमार्क के उल्लंघन मामला मानकर  व्यक्ति को दोषी करार दिया जा सकता है। अत: कभी भी इन्टरनेट से निकाले किसी लोगो का प्रयोग अपने बिजनेस आदि के लिए न करें।

जुलाई 2008 में आतंकवादियों ने ई-मेल भेजकर अहमदाबाद बम विस्फोटों की जिम्मेदारी ली थी जो  किसी आम इंटरनेट यूजर के वाई-फाई कनेक्शन का प्रयोग करके भेजा था। जांच एजेंसियों ने पता लगाया कि ये वाई-फाई कनेक्शन किसी मल्टिनैशनल कंपनी में काम करने वाले अमेरिकी नागरिक केनेथ हैवुड का था जिसने वाई-फाई कनेक्शन में कोई सिक्युरिटी सेटिंग नहीं की गई थी और आस-पास से गुजरता कोई भी शख्स उसका इस्तेमाल कर सकता था, जिसका फायदा आतंकवादियों ने उठाया | अत: अगर वाई-फाई इंटरनेट कनेक्शन को हमेशा पासवर्ड प्रोटेक्तिड रखना चाहिए |

कुछ लोग अपने दोस्तों और साथियों के ईमेल अकाउंट, फेसबुक वगैरह का पासवर्ड ढूंढने की कोशिश करते हैं जिसमे वो सफल भी हो जाते हैं। पासवर्ड हासिल करने के बाद खाते को लॉग-इन करने की सोचते है या करते है तो आप साइबर क्राइम कर रहे हैं।

भारत के ज्यादातर कंप्यूटर यूजर किसी न किसी सॉफ्टवेयर का पाइरेटेड वर्जन इस्तेमाल करते हैं या विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम, ऑफिस सॉफ्टवेयर सूइट का इस्तेमाल भी साइबर क्राइम के तहत ही आता है। अत: हमेशा ऑरिजनल सॉफ्टवेयर ही यूज करें।


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