खासखबर

एक दस्तावेज़ी फ़िल्म के मायने

दक्षिण भारत में रहकर फ़िल्म बनाने वाले और सिनेमा दिखाने वाले अमुधन आर पी बहुत जरुरी काम अपने कैमरे और सिनेमा के परदे के जरिये कर रहे हैं. उनके सिनेमा के विषय आम आदमी और उनका जीवन संघर्ष है. मदुराई के नगर निगम में काम करने वाली एक अधेड़ दलित सफाईकर्मी के जीवन पर बनी उनकी दस्तावेज़ी फ़िल्म ‘शिट’ बहुत चर्चा में रही और पूरे देश में छोटे फ़िल्म फेस्टिवलों के जरिये दिखायी गयी.

25VZMP_AMUDHAN_2127671e

‘शिट’ की फ़िल्मी सरंचना बहुत सीधी है. अमुधन एक दलित महिला के एक पूरे दिन को अपने कैमरे में दर्ज करते हैं और फ़िल्म का सम्पादन करते हुए किसी भी तरह का नैरेशन या वौइस् ओवर नहीं जोड़ते. सिर्फ उस महिला की कहानी उसी की जुबानी. इसका निर्वाह करते हुए वह एक भी बार फ्रेम में भी नहीं आते. उनका यह निर्णय उस महिला की कहानी और प्रामाणिक बनाता है.

फ़िल्मके 27 मिनट मदुराई की एक पिछड़ी बस्ती की बदबूदार गली से शुरू होते हैं जहाँ हर सुबह वह महिला कामगार लोगों का मल उठाने आती है. लगभग 1 किलोमीटर लम्बी गंदी गली के मैले को साफ करना एक बड़े पहाड़ को काटने जैसा है क्योंकि ऐसा करते हुए उसके पास जरुरी सामान भी नहीं है. न दस्ताने, न पैरों में जूते और न ही नाक ढकने के लिएमास्क. अमुधन फ़िल्म शुरू होने से पहले और अंत में भारत में सफाई कामगारों के बारे में कुछ तथ्यों से जरुर दर्शकों को परिचित करवाना चाहते हैं. इन्ही तथ्यों से पता चलता है कि अधिकाँश कामगार दलित हैं और उसमे से भी ज्यादातर अपने काम कीनारकीय स्थितियों के कारण बीमार भी. इन तथ्यों से परिचित करवाते हुए वे साउंड ट्रेक पर ढोल की तेज आवाज का इस्तेमाल करते हैं शायद इसलिए कि दर्शक इन तथ्यों को नजरअंदाज़ न कर दें.

अधेड़ महिला बहुत सुबह ही नंगे पैर मल उठाने का काम करती है, इसकाम की गन्दगी को कम करने के लिए उसके पास सिर्फखूब सारा चूना है जिसे वो मल के ढेर पर डालती है. अमुधन का कैमरा उसके काम के दौरान ही उससे बातचीत करता रहता है. उस बातचीत से ही हमें उस महिला और इस पूरे कामगार जगत की दुश्वारियों का पता चलता है. गनीमत यह है कि तकनीक ने अभी भी इतना आविष्कार नहीं किया कि सिनेमा में हमें द्रश्यों के साथ –साथ गंध की भी अनुभूति हो. ऐसा अगर संभव होता तो अमुधन की यह फ़िल्म लोग आसानी से न देख पाते. फिरभी फ़िल्म ख़त्म होते –होते दर्शक भी मानव द्वारा जनित मल के उन असंख्य ढूहों से आतंकित हो जाते हैं और शायद यही इस दस्तावेज की कामयाबी है जो आखिरकार अपनेदर्शकों को बतायेजा रहे विषय के प्रति संवेदित कर देती है.

Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए khulasaa.in को फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें

 

Read all Latest Post on खासखबर khaskhabar in Hindi at Khulasaa.in. Stay updated with us for Daily bollywood news, Interesting stories, Health Tips and Photo gallery in Hindi
Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए khulasaa.in को फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें
Title: a documentry film by amudhan rp shit in Hindi  | In Category: खासखबर khaskhabar
संजय जोशी

संजय जोशी

स्वतंत्र फ़िल्मकार और राष्ट्रीय संयोजक, प्रतिरोध का सिनेमा

Related Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *