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सब पर भारी गौतम अडानी की कलाकारी

पावर कंपनियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट के राहत देने के इंकार के बाद जहां एक ओर अधिकतर पावर कंपनियां चिंता में दिखाई दे रही हैं वहीं अडानी ग्रुप लगातार नए नए सौदे कर रहा है।

इसी साल मार्च महीने के पहले सप्ताह में भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने जाने माने उद्योगपति गौतम अडानी पर निशाना साधा। स्वामी ने अपने एक ट्वीट के में लिखा था कि 'सरकारी क्षेत्र में एनपीए के सबसे बड़े कलाकार गौतम अडानी हैं। यह वक्त उन्हें जवाबदेह बनाने का है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो वह अडानी के खिलाफ जनहित याचिका दायर करेंगे।' स्वामी ने कहा, 'कई ऐसी चीजें हैं, जिनसे अडानी दूर भाग रहे हैं। कोई उनसे सवाल भी नहीं पूछ रहा है। अडानी अपनी सरकार के करीबी होने की छवि बना रहे हैं। वह सरकार के लिए शर्मिदगी का कारण बन सकते हैं।'

अब जैसे कहा जाता है कि 'स्वामी की नजर और खुदा का कहर' बराबर है। सुब्रहमण्यम स्वामी के बयान के एक दिन के बाद ही अडानी ग्रुप के शेयरों को ऐसा झटका लगा कि गौतम अडानी के 9 हजार करोड़ रुपए डूब गए। स्वामी के इस बयान के बाद जहां मार्केट में अडानी ग्रुप को लेकर तरह तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म होने लगा वहीं अडानी ग्रुप के कई शुभचिंतक उनके बचाव में आ गए।

नतीजा यह हुआ कि अडानी पावर का दीर्घकालिक और अल्पकालिक उधार जो 31 मार्च 2017 को 25,274 करोड़ रुपए था, 31 मार्च 2018 को घटकर 9532 रुपए हो गया। वहीं कुल चालू और गैर मौजूदा देनदारियां जो 31 मार्च 2017 को 37,084 करोड़ थी 31 मार्च 2018  घटकर 10,163 करोड़ रुपए रह गईं। लेकिन वह कोई बहुत पुरानी बात नहीं है जब स्थिति बहुत खराब थी। अदानी पावर का इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो (आई सी आर) काफी खराब था।  यह वित्त वर्ष 2016 की तीसरी तिमाही में 1.1 था, जो Q2FY2017 में 0.9 हो गया, और क्यू 3 एफवाई2017 में 0.7 से नीचे आ गया।

दरअसल इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो(आईसीआर) किसी भी कंपनी के कर्ज से जुड़े खर्चे को जाहिर करता है। जब किसी कंपनी का इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो 1.5 या इससे नीचे हो तो कर्ज चुकाने की उसकी क्षमता पर प्रश्नचिह्न लगने लगता है। इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो एक से नीचे होने का मतलब यह है कि कंपनी इतना रेवेन्यू नहीं कमा रही है कि ब्याज चुका सके। दरअसल, एबिटडा में अदा किए जाने वाले ब्याज को भाग देने पर इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो निकल आता है।

जब कंपनी के सामने ऐसा संकट आता है तो इसे कैश इन हैंड से देनदारियां पूरी करनी होती हैं। अमूमन जब इंटरेस्ट कवरेज रेश्यो 2.5 से नीचे जाने लगे तो कंपनी को सावधान हो जाना चाहिए। ऐसी स्थिति में कंपनी को अपने कर्ज चुकाने का इंतजाम करने के लिए चाक-चौबंद रणनीति अपनानी पड़ती है। कंपनी का परिचालन इस तरह होना चाहिए कि कर्ज पर अदा किए जाने वाले ब्याज की अदायगी का इंतजाम होता रहे। ऐसा न होने पर डिफॉल्ट का खतरा बना रहता है।

यही कारण था कि क्रेडिट सुइस कि फरवरी 2017 की रिपोर्ट में अडानी पावर को कर्ज के दलदल में बताया गया था। क्रेडिट सुईस ने अपनी रिपोर्ट में अडानी ग्रुप की तीन और कंपनी अंडानी पोर्टज एंड सेज, अडानी एंटरप्राइजेज और अडानी ट्रांसमिशन को भी चिन्हित किया था।

यहां यह बताना जरूरी है कि अडानी समूह ने स्वामी के लगाए सभी आरोपों को खारिज किया और दावा किया कि उनका कम समय में विश्वस्तर की आधारभूत परियाजनाओं को लागू करने का इतिहास रहा है। जिनकी लागत चौथाई से भी कम आती है और किसी भी गहन परियोजनाओं को प्रारूप देने के लिए ऋण पूंजी की आवश्यकता होती ही है।

 अडानी ग्रुप के प्रवक्ता ने मुझसे बात करने के दौरान सफाई देते हुए कहा है कि हमारे ग्रुप के ऊपर ऋण जरूर है लेकिन हमारा कोई एनपीए नहीं है। अंतराष्ट्रीय क्रेडिट एजेंसियों की नजर में हमारी सभी कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग काफी हाई है जिसका कारण हमारी कंपनियों का अच्छा प्रदर्शन और समय पर कर्ज की अदायगी है। जिसे देखते हुए, ऋण के विभिन्न स्रोत, अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड, ईसीबी ऋण, घरेलू बांड, निजी क्षेत्र से लेकर भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से लेकर समूह तक उपलब्ध हैं। प्रवक्ता ने कहा है कि कर्ज का एक ही मानक है, समय से उसे चुकाते रहना। कंपनी से शुरुआत से चतुराई के साथ इसे लागू किया है। किसी भी समूह की वित्तीय मेट्रिक्स को भी देखना चाहिए।

बहरहाल ये बात तो निर्विवाद है कि अडानी ग्रुप कर्जे के बोझ तले दबा हुआ है। इसी साल मार्च में स्टैंडिंग कमेटी ऑफी एनर्जी फोक्सड की 37 वीं रिपोर्ट में इलेक्ट्रिसिटी क्षेत्र की नॉन फॉरर्मिंग एसेस्टस में इस समूह को शामिल किया है। लेकिन अडानी ग्रुप को इससे कोई खास परेशानी होती नहीं दिखाई दे रही है। जबकि आरबीआई ने 12 फरवरी को सर्कुलर जारी किया। इसमें कहा गया था कि कंपनी कर्ज में एक दिन का भी डिफॉल्ट करती है तो बैंक समाधान के लिए तत्काल कदम उठाएंगे। अगर 180 दिनों में समाधान नहीं निकला तो कंपनी के खिलाफ एनसीएलटी में याचिका दायर करेंगे। इलाहबाद हाइ्कोर्ट ने भी कंपनियों को इस मामले में किसी प्रकार की राहत देने से इंकार कर दिया। आरबीआई द्वारा दी 180 दिन की अवधि 27 अगस्त को समाप्त हो गई। जहां अन्य पावर कंपनियां इसे लेकर काफी चिंता में दिखाई दे रही हैं वहीं अडानी पावर ने जीएमआर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड  का 1,370 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट हासिल करने वाला है। इसके लिए कंपनी को 5,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि देनी होगी।

अडानी ग्रुप की एक अन्य कंपनी अडानी ट्रांसमिशन ने अनिल अंबानी की रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ 18,800 करोड़ रुपए का सौदा पूरा कर लिया है जिससे उसे मुंबई का ऊर्जा कारोबार हासिल होगा। वैसे बता दें कि अनिल अंबानी भी एक ऐसे ग्रुप को संभाल रहे हैं जो कहीं न कहीं कर्ज के दलदल में फंसा है हो सकता है इस बिक्री से वह अपने कर्जे के बोझ को कम करना चाहते होंगे।

ये अलग बात है कि शायद कुछ समय बाद अडानी भी अपनी कुछ कंपनियां बेचकर कर्जे के बोझ को कम करने का जुगाड़ करें लेकिन फिलहाल ऐसा नहीं दिखाई पड़ता। अभी तो वो लगातार मजबूत होते दिख रहे हैं और हों भी क्यों न आखिर इतने सारे पब्लिक सेक्टर के बैंक भी तो हैं ! और रसूखदार दोस्त भी तो हैं और दोस्त वही जो दोस्त के काम आए।

 

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Title: gautam adanis artistry in Hindi  | In Category: खासखबर khaskhabar

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