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बिना पेड़ काटे, बेकार की चीजों से बनाया शानदार ऊरू

केरल निवासी बीजू अब्राहम ने सीनियर सिटिजन लोगों के लिए एक घर बनवाया है | बीजू ने यह घर गांव के वृद्ध लोगों के लिए हरे-भरे खेतों के बीच में बनवाया है, जो बहुत ही सुंदर है | यह घर 12,000 स्क्वॉयर फीट एरिया में फैला हुआ है। जब बीजू इस घर का निर्माण करवा रहे थे तो उन्होंने इस बात का पूरा ध्यान रखा कि एक भी पेड़ काटने की नौबत न आये और किसी भी प्रकार से पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे ।

दिल्ली में इमैन्युअल हॉस्पिटल एसोसिएशन में एडमिनिस्ट्रेटर के तौर पर काम करते हुए बीजू के मन में इस घर को बनाने का विचार आया, और उन्होंने इसे बनाया । इस घर की एक खास बात और है और वो यह है कि इस इमारत को पुराने घरों के तोड़ने से निकली हुई सामग्री से बनाया गया है।

करीब चार साल पहले से ही बीजू ने इस घर को बनाने का काम शुरू कर दिया था, जिसके चलते उन्होंने 60 से लेकर 300 साल तक पुरानी इमारतों को खरीदना शुरू कर दिया, जिनमे लगभग 14 पुराने घर, चर्च, स्कूल, घर, रेलवे के शेड और कम्यूनिटी हॉल शामिल थे। इसके बाद उन्होंने वृद्ध लोगों के लिए घर बनाने का काम शुरू किया  और इन घरो को नाम दिया ऊरू | ऊरू का मतलब पुराना घर होता है । लकड़ी की बीम डालकर इसे लैटेराइट पत्थर, चूना और बालू से बनाया गया है तथा  खिड़कियां और उनके फ्रेम भी लकड़ी के ही बने हुए हैं।

बीजू अब्राहम ने  बिना पेड़ काटे, बेकार की चीजों से बनाया शानदार ऊरू this kerala man built a huge old age home entirely from waste without cutting a single tree

इसे बनाने की शुरुआत 2014 से हुयी और इसका डिजाईन आर्किटेक्चर लॉरी बेकर ने डिजाइन किया, जो बीजू के अच्छे मित्र भी है । इस घर में 14 कमरे,किचन, डाइनिंग हॉल और रीडिंग रूम मौजूद है। इतना ही नहीं, इसमें एंटरटेनमेंट हॉल, विजिटर पार्लर, वॉक वे तक का निर्माण किया गया है। वृद्ध लोगों को ध्यान रखते हुए इसका निर्माण किया गया है ताकि उन्हें कोई भी समस्या न हो । ऊरू के आस-पास के 42 घरों के लोगों ने यहां रहने के लिए कई बार बीजू से संपर्क भी किया । कभी भी फुरसत के पल बिताने के लिए आसपास के लोग आ सकते हैं, यहां आने वालो के लिए अच्छे खाने की सुविधा का भी प्रबन्ध किया गया है ।

बीजू अब्राहम ने  बिना पेड़ काटे, बेकार की चीजों से बनाया शानदार ऊरू this kerala man built a huge old age home entirely from waste without cutting a single tree

बीजू कहते है, “मुझे कई परिवारों ने फोन करके बताया कि वे शहर की भागदौड़ वाली जिंदगी से ऊब चुके हैं और कुछ वक्त बिताने के लिए वे ऊरू में आकर रहना चाहते हैं |”  कई परिवार अपने घर के बुजुर्ग सदस्यों को लेकर यहाँ आते हैं और यहाँ समय बिताकर चले जाते हैं। ये कहना गलत नहीं होगा कि इस तरह से बीजू केरल पर्यटन को बढ़ाने में सहयोग प्रदान कर रहा  है | तो दूसरी तरफ कई परिवार यहाँ आकर सुकून के पल बिताते है, जिससे उनके बीच प्यार और बढ़ता हैं। घर को बनाने के बारे बीजू बताते हैं, “भारत में घर बनाने के लिए सीमेंट का इस्तेमाल पहली बार 1886 में हुआ था। उसके पहले भारत में पारंपरिक तौर तरीके से इमारतें बनाई जाती थीं और उनमें प्राकृतिक संसाधनों का ही इस्तेमाल होता था। मैंने इस घर को बनाने में भी उसी तरीके को अपनाया |”

घर की दीवारों से लेकर छत तक बीजू ने अपने हिसाब से डिजाइनिंग की और पुराने घरों को तोड़कर जो भी सामग्री प्राप्त हुयी, उन्हें जरूरत के हिसाब से ढालकर घर के निर्माण में इस्तमाल किया है । बीजू बताते है कि ऐसा करने से काफी पैसे बचा, जिसे उन्होंने मजदूरों में बाँट दिया । इस काम के लिए कुछ मजदूर असम से भी बुलाए गए थे और इन्होने ही लकड़ी का इस्तेमाल करके घर को नया लुक दिया । बीजू को उम्मीद है कि आने वाले समय में लोग उनके घर से प्रेरणा लेते हुए ऐसे ही घर बनवाएंगे, ताकि पर्यावरण की रक्षा हो सके ।

 

 

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Title: this kerala man built a huge old age home entirely from waste without cutting a single tree

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