खुबानी नई फसल के ज्यादा फायदे


खुबानी का रंग जितना चमकीला होगा, उस में विटामिन सी, ई और पोटेशियम उतना ही ज्यादा होगा। सूखी खुबानी में ताजा खुबानी की तुलना में 12 गुना आयरन, 7 गुना रेशा और 5 गुना विटामिन ए होता है। खुबानी का शरबत भी बहुत जायकेदार होता है।

खुबानी का पेड़ 8 से 12 मीटर तक ऊंचा होता है। ऊपर से पेड़ की टहनियां और पत्ते घने फैले हुए होते हैं। फूल 5 पंखुड़ियों वाले, सफेद या हल्के गुलाबी रंग के छोटे होते हैं। खुबानी का फल एक छोटे आड़ु के बराबर होता है। इस का रंग पीले से ले कर नारंगी होता है, लेकिन जिस तरह सूरज पड़ता हो उस तरफ फल थोड़ा लाल भी हो जाता है।

दुनिया में सब ज्यादा खुबानी तुर्की में उगाई जाती है। मध्यपूर्व तुर्की में स्थित मलत्या क्षेत्र खुबानियों के लिए मशहूर हैं और तुर्की की तकरीबन आधी पैदावार यहीं से होती है। तुर्की के बाद ईरान का नंबर आता है।

खुबानी एक ठंडे प्रदेश का पौधा है और ज्यादा गरमी में या तो मर जाता है या फल पफदा नहीं करता। भारत में खुबानी उत्तर के पहाड़ी इलाकों में कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में पैदा की जाती है।

सूखी खुबानी को भारत में बादाम, अखरोट की तरह एक सूखा मेवा माना जाता है। कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में सूखी खुबानी को किश्त कहते हैं। यह माना जाता है कि कश्मीर के किश्तवार इलाके का नाम सूखी खुबानियों की वजह से ही पड़ा है।
भारत में खुबानी की पैदावार बहुत कम है। इस की वजह यहां का अलग-अलग मौसम और इलाके के मुताबिक ज्यादा उपज देने वाली वैरायटियां की कमी है। किसानों को भी इस के बारे में कोई ज्यादा जानकारी नहीं है।

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श्री राम शर्मा

श्री राम शर्मा

पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक हिन्दुस्तान अख़बार से की। करीब 5 साल हिन्दुस्तान में सेवाएं देने के बाद दिल्ली प्रेस से जुड़े। यहां प्रतिष्ठित कृषि पत्रिका फार्म एन फूड में डिप्टी एडिटर के तौर पर करीब 8 साल काम किया। खेती-किसानी के मुद्दों पर देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राएं करते हुए तमाम लेख लिखे। वे ऑल इंडिया रेडियो से भी जुड़े हुए हैं और यहां भी खेती-किसानी की बात को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से प्रमुखता से उठाते रहते हैं। वर्तामान में डीडी न्यूज दिल्ली से जुड़े हुए हैं।

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