लिलियम रंगीन फूलों से सजाएं दुनिया


आज रोजमर्रा की जिंदगी में फूलों का रोल बढ़ता जा रहा है। खूबसूरत फूलों से भरा गुलदस्ता भेंट कर आप किसी को भी खुश कर सकते हैं, गुलाब, गेंदा, चमेली, रजनीगंधा जैसे हमारे परंपरागत फूलों से तो हर कोई वाकिफ हैं, इसलिए लोगों का रुझान नए फूलों की तरफ बढ़ रहा है।

लिलियम कुछ ऐसे ही फूलों में से एक है, ठंडी आबोहवा का यह फूल हर किसी को अपनी ओर लुभाता है, लिलियम यानी लिली के फूलों का इस्तेमाल कटफ्लावर यानी डंडी में लगे फूलों के लिए ज्यादा किया जाता है, क्यारियों के चारों तरफ या गमलों में लगा कर भी लोग इस से अपने किचन गार्डन और घरों की शोभा बढ़ाते हैं।
कई तरह की लिलियों में से सब से ज्यादा मांग ओरिएंटल हाईब्रिड और एशियाटिक लियिों की है। ईस्टर व टाईगल लिली भी काफी पंसद की जाती है। ये सभी लिलियां कट फ्लवार के रूप में इस्तेमाल की जाती हैं। भारत में लिलियम की मांग और बाजार तेजी से बढ़ रहा है।

ऐसे करें खेती:
लिलयम की खेती के लिए ऐसी जगह का चुनाव किया जाता है जहां पर पाला न गिरता हो और तेज हवाएं न चलती हों, लिलियम को हलकी छाया में उगाया जाना चाहिए, सूरज की तेज धू को कम करने के लिए छायादार जाल का इस्तेमाल भी किया जाता है।
लिलियम के लिए पानी न ठहरने वाली उपजाऊ मिट्टी अच्छी रहती है। मिट्टी हलकी भुरभुरी और जैविक पदार्थों वाली होनी चाहिए। मिट्टी की पीएच मानच 5.5 से 7 के बीच सही होता है। फसल की बीमारियों को कम करने के लिए मिट्टी को 2 फीसदी फार्मोलीन से उपचारित करना चाहिए।

अच्छे फूलों और पौधों की बढ़वार के लिए रात का तापमान 10-15 डिगरी सेंटीग्रेड और दिन का 20-25 डिगरी सेंटीग्रेड के बीच होना चाहिए। ज्यादा तापमान के कारण पौधे छोटे रह जाते हैं और कलियों की संख्या भी कम हो जाती है।

पौधों को सीधे सूरज की रोशनी में नहीं उगाना चाहिए। गरमियों के दिनों में तेज रोशनी के कारण पौधे छोटे रह जाते हैं, पौधों के ऊपर 50-75 फीसदी छायादार जली का इस्तेमाल करना सही रहता है।

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