अदरक को रखें महफूज ऐसे करें प्रोसेसिंग


अदरक केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की एक खास मसाला फसल है। निर्यात के नजरिए से सभी मसाला फसलों में अदरक का तीसरा स्थान है, भारत में अदरक केरल, मेघालय, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान, कर्नाटक वगैरह राज्यों में उगाया जाता है।

भारतीय अदरक की विश्व बाजार में भारी मांग है, लेकिन अच्छी क्वालिटी और अच्छे बीज की कमी के कारण यहां इस की इतनी पैदावार नहीं हो रही है, जितनी की होनी चाहिए।
वैसे तो अदरक की फसल 8-9 महीने में तैयार हो जाती है, लेकिन किसान को तकरीबन 3 से 5 महीने तक बीज को स्टोर करना पड़ता है।
भंडारण के दौरान अदरक में सड़न बीमारी होना एक बड़ी समस्या है, जो केवल बीज की क्वालिटी को खराब करती है, बल्कि ऐसे बीज की फसल भी बीमार और खराब होती है। इसलिए बीज को स्टोर करते समय कुछ बातों पर गौर फरमा लिया जाए तो बीमारियों की समस्या से निजात पाई जा सकती है।

बीज का भंडारण:
अदरक को कई तरह से स्टोर कर के रखा जा सकता है।
जैसे बोरी में, कमरे में ढेरी लगा कर, खेत में दबा कर, गड्ढों में या खत्तियों में अदरक को स्टोर कर के रखा जाता है।
खत्तियों में स्टोर करना सब से अच्छा तरीका है, क्योंकि इस में भंडारण के लिए सही तापमान व नमी बनी रहती है, जिस से बीज ताजा रहता है और सूखता नहीं है, कुछ स्थानों पर किसान अदरक का भंडारण खुले स्थान पर कच्ची खत्तियों में करते हैं, लेकिन ऐसी खत्तियों में ज्यादा नमी रह जाने से सड़न बीमारी लग जाती है, अदरक के सही भंडारण के लिए खत्तियों को अच्छी तरह से ढकना जरूरी है,
खेती के लिए अदरक का बीज किसी अच्छी और भरोसेमंद जगह से ही लें और बोने से पहले उसे फफंूदीनाशक दवा से उपचारित कर लेना चाहिए।

अदरक की बोआई ऊंची उठी क्यारियों में ही करें और बरसात के दिनों में खेत से पानी बाहर निकालने का इंतजाम जरूर करें, खेतों में पानी भरे रहने से फसल में सड़न, बीमारी होने का डर बना रहता है।
खुदाई के समय ध्यान रखें कि अदरक की गांठें कटे या टूटे नहीं।
भंडराण से पहले अदरक की सफाई कर के उसे डाईथेन एम-45 (ढाई सौ ग्राम) या क्लोरोपाइरीफास सौ ग्राम या बाविस्टीन 2 सौ मिलीलीटर प्रति 100 लीटर पानी में घोल कर 1 घंटे तक उपचारित करें। उपचारित अदरक को किसी छायादार जगह पर सुखा लें। ऊपर बताई दवा के घोल में 2 से ज्यादा बार बीज उपचारित न करें। इस तरह 100 लीटर घोल से तकरीबन 150 किलोग्राम तक बीज उपचारित किया जा सकता है।

अदरक को रखें महफूज ऐसे करें प्रोसेसिंग

घर के आसपास छायादार, सूखे और ऊंचे स्थान, जहां बरसात का पानी इकट्ठा न होता हो, पर 1-1-1 या 2-2-2 मीटर माप का गड्ढा बनाएं, गड्ढे को अंदर से ईंट, पत्थर या मिट्टी से पक्का करें, गड्ढे के बीचोंबीच तकरीबन 4-5 इंच गोलाई वाली रबड़ की एक नली, जिस के चारों ओर 8-10 इंच दूरी पर छेद बनाएं गए हों, को डाल दें। इस नली से भंडराण के दौरान पैदा होने वाली गरम हवा निकलती रहेगी। गड्ढे की तली पर सूखी घास या सूखी रेत की परत बिछा कर इस के ऊपर अदरक रख दें और ऊपर भी घास बिछा कर लकड़ी के फट्टे से उसे ढक दें।

गड्ढे का तकरीबन एक चैथाई भाग खाली रखें, गड्ढे में डाली गई रबड़ की नली के ऊपरी सिरों को बाहरी निकालने के लिए फट्टों के बीचों-बीच सुराख रखें, रबड़ की नली का मुंह ऊपर से बंद कर दें ताकि इस में बरसात का पानी न घुस सके। फट्टे के चारों ओर मिट्टी और गोबर से लिपाई कर के गड्ढे को अच्छी तरह से सील कर दें।
गड्ढे के चारों ओर से बरसाती पानी की निकासी का इंतजाम जरूर करें। भंडारण के दौरान 1-2 बार खत्ती या गड्ढे को खोल कर अदरक की जांच करते रहें। सड़ी-गली गांठों को अलग निकाल दें। अदरक को छाया में सुखा कर दोबारा पहले जैसे भंडारित कर दें।

सही तरीके से स्टोर किए अदरक को बीमारी रहित और दोबारा रोपाई तक अच्छी स्थिति में रखा जा सकता है। यह तरीका था बीज वाली अदरक को स्टोर करने का, अब जानें पकी अदरक को महफूज रखने का तरीका।

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श्री राम शर्मा

श्री राम शर्मा

पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक हिन्दुस्तान अख़बार से की। करीब 5 साल हिन्दुस्तान में सेवाएं देने के बाद दिल्ली प्रेस से जुड़े। यहां प्रतिष्ठित कृषि पत्रिका फार्म एन फूड में डिप्टी एडिटर के तौर पर करीब 8 साल काम किया। खेती-किसानी के मुद्दों पर देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राएं करते हुए तमाम लेख लिखे। वे ऑल इंडिया रेडियो से भी जुड़े हुए हैं और यहां भी खेती-किसानी की बात को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से प्रमुखता से उठाते रहते हैं। वर्तामान में डीडी न्यूज दिल्ली से जुड़े हुए हैं।

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