खेत खलिहान

आम में शूट गाल सिला की रोकथाम

भारत में आम की बागवानी 2.34 मिलियन हेक्टेयर रकबे में की जाती है, जिस से 15.80 मिलियन टन आम हासिल होते हैं। देश में आम की औसत पैदावार 7.20 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है। दक्षिण भारत की तुलना में उत्तर भारत में आम की पैदावार कम है, जिस के कई कारण हैं। आम के बाग में कीटों व बीमारियों में शूट गाल सिला कीट यानी घुंडी कीट पिछले 5-6 सालों से उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार व झारखंड में आम की बड़ी समस्या बन गया है।
एक अनुमान के अनुसार केवल उत्तराखंड में तकरीबन 7-8 सौ हेक्टेयर में शूट गाल सिला कीट के हमले के कारण 60-70 करोड़ रुपए का सालाना नुकसान होता है। उत्तराखंड में इस कीट का हमला देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह पौड़ी जनपदों में खासतौर से होता है। इस कीट की वजह से तकरीबन 70-80 फीसदी तक नुकसान होता है।
शूट गाल सिला कीट अप्रैल महीने में आम की टहनियों में बनी घुंडियों से प्रौढ़ बन कर बाहर निकलते हैं, जिस से घुंड़ियों में छेद हो जाते हैं। प्रौढ़ कीट बाहर निकलने के बाद पत्तियों के बीच अंडे देते हैं। ये अंडे सुसुप्ता अवस्था में अगस्त तक रहते हैं।
अगस्त महीने में इन अंडों से निम्फ निकलते हैं, जो कोमल शाखाओं से रस चूसते हैं। रस चूसने के कारण निम्फ एक तरह का रस निकालता है, जिस से घुंडी बनती है।

इस तरह निम्फ अगस्त महीने में कोमल शाखाओं से रस चूसते हैं, जिस के लगभग 40-50 दिनों बाद घुंडी दिखाई देने लगती है। निम्फ के हफले से घुंडी दिखाई देने लगती है। निम्फ के हमले से घुंडी बनते समय ये निम्फ उसी घुंडी के अंदर घुस जाते हैं और उस में पलते व बढ़ते रहते हैं। ये निम्फ कीट अप्रैल महीने तक घुंडी के अंदर रहते हैं और अप्रैल में जवान हो कर घुंडी से बाहर निकल कर अंडा देना शुरू करते हैं। इस तरह इस कीट का जीवनचक्र चलता रहता है।

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Title: how to keep mango farms safe in Hindi  | In Category: खेत खलिहान khet khalihan
श्री राम शर्मा

राम शर्मा

पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक हिन्दुस्तान अख़बार से की। करीब 5 साल हिन्दुस्तान में सेवाएं देने के बाद दिल्ली प्रेस से जुड़े। यहां प्रतिष्ठित कृषि पत्रिका फार्म एन फूड में डिप्टी एडिटर के तौर पर करीब 8 साल काम किया। खेती-किसानी के मुद्दों पर देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राएं करते हुए तमाम लेख लिखे। वे ऑल इंडिया रेडियो से भी जुड़े हुए हैं और यहां भी खेती-किसानी की बात को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से प्रमुखता से उठाते रहते हैं। वर्तमान में डीडी न्यूज दिल्ली से जुड़े हुए हैं।

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