ऐसे बनाएं मिट्टी को सेहतमंद


फसलों की पैदावार देश को आत्मनिर्भरता की स्थिति में पहुंचाने में उन्नत किस्म के बीजों, उर्वरकों, सिंचाई व फसल सुरक्षा का अहम रोल रहा है।
सभी जानते हैं कि सभी फसलें पोषक तत्व मिट्टी से लेती हैं। नतीजनत, ज्यादा पैदावार के चक्कर में मिट्टी में पोषक तत्वांे की कमी होती रहती है। अनुमान लगाया गया है कि 1 टन अनाज के लिए ( भूसे सहित) मिट्टी से औसतन 32 किलोग्राम नाइट्रोजन, 9 किलोग्राम फास्फोरस और 45 किलोग्राम पोटेशियम लिया जाता है।

टिकाऊ खेती के लिए जरूरी है कि मिट्टी में जितने पोषक तत्वों की कमी हो, किसी रूप में वापस कर दिए जाएं, ताकि जमीन की उपजाऊ ताकत बनी रहे। आज के समय में रासयनिक उर्वरकों के इस्तेमाल में एनपीके का अनुपात बिगड़ गया है, जबकि मिट्टी की उर्वरता, सभी पोषक तत्वों (18 पोषक तत्वों) के सही अनुपात की मौजूदगी पर निर्भर करती है।
केमिकल उर्वरकों के अंधाधुंध इस्तेमाल से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना बहुत मुश्किल होता जा रहा है।
फसलों को सब से अधिक नाइट्रोजन की जरूरत होती है और जमीन में डाले गए रासायनिक उर्वरकों में मौजूद नाइट्रोजन का 40-45 फीसदी ही इस्तेमाल कर पाती है, बाकी पानी के साथ बह जाता है या हवा में मिल जाता है।

आज महंगाई के समय में फसलों को पोषण के लिए नाइट्रोजन की आपूर्ति सिर्फ रासायनिक उर्वरकों से कर पाना छोटे किसानों की कूवत के बाहर है। इसलिए जैविक तत्वों का इस्तेमाल न केवल माली नजरिए से अच्छा है, बल्कि मिट्टी की उर्वरा ताकत को बनाए रखने के लिए भी जरूरी है। केमिकल उर्वरकों के इस्तेमाल से जल्दी व निश्चित तौर पर कृषि उत्पादन कुछ सालों के लिए बढ़ तो सकता है, परंतु इन का लगातार और ज्यादा इस्तेमाल मिट्टी की उर्वरजता व पौधों की सेहत के लिए नुकसानदायक है।

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श्री राम शर्मा

श्री राम शर्मा

पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक हिन्दुस्तान अख़बार से की। करीब 5 साल हिन्दुस्तान में सेवाएं देने के बाद दिल्ली प्रेस से जुड़े। यहां प्रतिष्ठित कृषि पत्रिका फार्म एन फूड में डिप्टी एडिटर के तौर पर करीब 8 साल काम किया। खेती-किसानी के मुद्दों पर देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राएं करते हुए तमाम लेख लिखे। वे ऑल इंडिया रेडियो से भी जुड़े हुए हैं और यहां भी खेती-किसानी की बात को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से प्रमुखता से उठाते रहते हैं। वर्तामान में डीडी न्यूज दिल्ली से जुड़े हुए हैं।

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