खेत खलिहान

सरसों बीमारी भगाएं खूब पैदावार पाएं

खाने के तेल का एक बड़ा भाग सरसों से हासिल होता है। उत्तर प्रदेश राजस्थान और हरियाणा में सरसों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। पिछले कुछ सालों से यहां सरसों का उत्पादन काफी बढ़ा है। लेकिन इस में अभी बहुत गुंजाइश है। यानी पैदावार को अभी और बढ़ाया जा सकता है।
सरसों की पैदावार बढ़ाने के लिए हमें बीमारियों और कीटों की रोकथाम करना बहुत जरूरी है। वैज्ञानिकों के मुताबिक सरसों पर 30 से भी ज्यादा बीमारियों का हमला होता है।

समय रहते इन बीमारियों की पहचान कर सही तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए राई सरसों की पैदावार को बढ़ा कर खाद्य तेलों का उत्पादन बढ़ा सकते हैं।

यहां हम सरसों की बीमारियों, उन से होने वाले नुकसान और उन की रोकथाम के बारे में बता रहे हैं।

आर्द्रगलनः यह बीमारी कई तरह की फफूंद से पैदा होती है। इलाके, मौसम और फसल की अवस्था के मुताबिक फफूंद भी अलग-अलग होती हैं, लेकिन आर्द्रगलन बीमारी ज्यादातर सोलेनाई नामक फफूंद से होती है।

यह बीमारी बीज और बीज के उगने के बाद अलग-अलग असर दिखाती है। पहली अवस्था में बीज अंकुरित होने से पहले ही बीमार हो कर मर जाता है। बीमारी की दूसरी अवस्था छोटे पौधों में देखी जाती है। तने के सख्त हो जाने के बाद बीमारी नहीं लगती। बीमारी का हमला पौधे में जमीन के अंदर वाले हिस्से पर और जमीन में लगे हिस्से पर होता है। बीमार हिस्सा मुलायम और पानी से भरा हो जाता है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, तना सिकुड़ जाता है और पौधा गिर जाता है।

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Title: mustard keeps the disease may well yield in Hindi  | In Category: खेत खलिहान khet khalihan
श्री राम शर्मा

राम शर्मा

पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक हिन्दुस्तान अख़बार से की। करीब 5 साल हिन्दुस्तान में सेवाएं देने के बाद दिल्ली प्रेस से जुड़े। यहां प्रतिष्ठित कृषि पत्रिका फार्म एन फूड में डिप्टी एडिटर के तौर पर करीब 8 साल काम किया। खेती-किसानी के मुद्दों पर देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राएं करते हुए तमाम लेख लिखे। वे ऑल इंडिया रेडियो से भी जुड़े हुए हैं और यहां भी खेती-किसानी की बात को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से प्रमुखता से उठाते रहते हैं। वर्तमान में डीडी न्यूज दिल्ली से जुड़े हुए हैं।

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