खेत खलिहान

Stevia ki kheti लाती है किसान के जीवन में मिठास

Stevia ki kheti | Stevia plant cultivation in hindi : हमारी जीवनशैली में आए बदलाव ने हमें आरामपरस्त बना दिया है। उस का खमियाजा हम नई-नई बीमारियों के रूप में भुगत रहे हैं। शुगर (Sugar) यानी मधुमेह यानी डायबिटीज (diabetes) की बीमारी इतनी आम हो गई कि आप के आसपास कोई न कोई इस का शिकार मिल जाएगा। इसीलिए डॉक्टर मरीजों को चीनी का प्रयोग कम से कम करने की सलाह देते हैं, आपको जानकर हैरानी होगी कि स्टीविया (Stevia) में चीनी से भी ज्यादा मिठास होती है, और इसका प्रयोग स्वास्थ्य पर कोई नुकसान भी नहीं पहुंचाता। किसान स्टीविया की खेती (Stevia cultivation) करके न सिर्फ काफी मुनाफा कमा सकते हैं, बल्कि मधुमेह के मरीजों को उनके स्वास्थ्य के लिए लाभदायक चीजें भी मुहैया करा सकते हैं।

शुगर के बढ़ते मरीजों के कारण इस बीमारी को ले कर लोगों में जागरूकता लाने के लिए 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस मनाया जाता है। भारत में हर 5वां आदमी डायबिटीज (diabetes) से पीड़ित है। डायबिटीज (diabetes) से बचने के लिए खानपान में खास सावधानी बरतने की बात कही जाती है। खासकर चीनी या उससे बनी चीजों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।


जहां आदमी का वैलकम चाय या कॉफी से होता हो, वहां भला चीनी (Sugar) से कैसे बचा जा सकता है और अगर आप के सामने गरमागरम गुलाबजामुन रखे हों, तो कोई खुद को कैसे कंट्रोल रख सकता है।लेकिन, परेशान होने वाली बात नहीं है, क्योंकि शुगर के मरीज अपने जीवन में मिठास का आनंद चीनी के बजाय स्टीविया (Stevia) में से ले सकते हैं।
जी हां, स्टीविया (Stevia) एक ऐसी औषधि है, जो मीठे की कमी को पूरा करने के साथ कई बीमारियों से हमें बचाती हैं। इसे मीठी तुलसी (meethi tulsi) भी कहते हैं, देखने में यह तुलसी के पौधे जैसा लगता है। यह कई साल तक फलने-फूलने वाला झाड़ीनुमा पौधा होता है। इस पर सफेद फूल लगते हैं।

डायबिटीज के मरीजों के लिए यह संजीवनी का काम करता है, क्योंकि इससे मिलने वाली मिठास शरीर की किस भी प्रक्रिया पर असर नहीं डालती। इसलिए डायबिटीज के मरीज बिना किसी डर के इस का इस्तेमाल कर मिठास का लुत्फ ले सकते हैं। यह मोटे लोगों के लिए भी फायदेमंद है और खून में ग्लूकोज की मात्रा को कंट्रोल रखता है।

स्टीविया का पौधा (stevia plant) चीनी से 50 गुना ज्यादा मीठा होता है और प्रोसेसिंग से इस की मिठास को 2 सौ गुना तक बढ़ाया जा सकता है। इस के पोषक तत्व ज्यादा नमी में भी खत्म नहीं होते हैं।

किसान स्टीविया की खेती (stiviya ki kheti) कर के अपनी तरक्की में मिठास ला सकते हैं। स्टीविया की खेती (stevia farming) पूरे भारत में आसानी से की जा सकती है। सूरज की तेज रोशनी व लंबे दिन इस की फसल के लिए अच्छे होते हैं। सर्दी के दिनों में 20 से 30 डिगरी सेंटीग्रेड का तापमान इसकी बढ़वार के लिए बेहतर होता है।

पाला व कोहरा स्टीविया की फसल के लिए नुकसानदायक होता है। बहुत ज्यादा ठंड या गरमी और लू भी इस को नुकसान पहुंचाती है। फसल की बढ़वार 15 से 30 डिगरी सेल्सियस तापमान व 70 से 80 फीसदी नमी होने पर अच्छी होती है।
दोमट व बलुई मिट्टी, जिस का पीएच मात्र 5.5 से 7.0 के बीच हो और उस में पानी भराव की समस्या न हो, स्टीविया की खेती (stevia farming) के लिए बढ़िया मानी जाती है, वैसे, जिन खेतों में सब्जियां उग सकती हैं, वहां स्टीविया (stevia plant ) भी आसानी से उग सकता है।

स्टीविया की खेती (stevia ki kheti) के लिए खेत की तैयारी अच्छी तरह से करनी चाहिए। मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के लिए उस में कार्बनिक पदार्थ की सही मात्रा होनी चाहिए। 1 हेक्टेयर खेत में 50 टन सड़ी गोबर खाद डालनी चाहिए। साथ ही , सही पानी निकास का इंतजाम करना चाहिए।

Stevia plant की नर्सरी बनानाः

  • स्टीविया की पौध (Stevia Plant) कलम और बीज द्वारा तैयार की जाती है, लेकिन अच्छी फसल के लिए कलम द्वारा पौध तैयार करनी चाहिए, नर्सरी ऐसी जगह पर बनाएं जहां सीधे धूप न आती हो।
  • पौध तैयार करने के लिए 10-15 सेंटीमीटर लंबाई की 4-5 गांठ वाली कलम को चुनें।
  • रोपाई से पहले कलमों को उपचारित कर लेना चाहिए।
  • बारिश या वसंत के मौसम के शुरू में कलम का आधा हिस्सा जमीन के अंदर रखते हुए 15-15 सेंटीमीटर की दूरी पर लगाते हैं।
  • रोपाई के बाद मिट्टी में वर्मी कंपोस्ट या गोबर की खाद मिला देने से पौध अच्छी बनती है।
    रोपाई के बाद 5 दिन तक नर्सरी से सुबह-शाम हल्की सिंचाई करनी चाहिए।
  • इस के बाद 15 दिन के अंतर पर सिंचाई करें, नर्सरी में छाया व नमी बनाए रखने से पौध की जड़ें 10-15 दिनां में तैयार हो जाती हैं। 5-7 पत्तों वाली पौध खेत में लगाने के लिए सही होती है।
    जब पौध 6 से 8 हफ्ते की हो जाए, तो उसे खेत में लगा दें, मार्च अप्रैल और जुलाई अगस्त का महीना इस काम के लिए अच्छा होता है, क्योंकि इस समय पौधों को ज्यादा गर्मी और ज्यादा सर्दी नहीं लगती है।
    रोपाई 15 सेंटीमीटर ऊंची व 60 सेंटीमीटर चौड़ी क्यारियों में की जाती है, रोपाई 30-40 या 45-45 सेंटीमीटर के फासले पर कर के सिंचाई की जाती है।
  • इस तरह 1 हेक्टेयर खेत के लिए 75 हजार पौधों की जरूरत पड़ती है। रोपाई के बाद सिंचाई की जरूरत पड़ती है। बाकी सिंचाई मिट्टी व बारिश पर निर्भर करती है।

Stiviya plant ki kheti के लिए खाद व उर्वरकः

  • स्टीविया (Stiviya) की अच्छी पैदावार के लिए 1 हेक्टेयर खेत में ढाई सौ किलोग्राम नाइट्रोजन, सौ किलोग्राम फास्फोरस व सौ किलोग्राम पोटाश देना चाहिए।
  • फसल को खरपतवार से निजात दिलाने के लिए 2 बार निराई गुराई करनी चाहिए, खरपतरवारों की रोकथाम के लिए मलि्ंचग भी कर सकते हैं, जो खेत में नमी बनाए रखने में भी पंसद करती हैं।

Stiviya plant की फसल सुरक्षाः

  • स्टीविया (stevia) में उकठा बीमारी का हमला देखा गया है। यह बीमारी होने पर पत्तियां मुरझा कर नीचे की ओर झुक जाती हैं, जिस से पूरा पौधा सूख जाता है। इस की रोकथाम के लिए ट्राइकोड्रमा सूडोमोनास नामक जीवाणु कल्चर को उसे 3 हफ्ते तक पानी से भिगो कर हल्की नमी बनाए रखें। ताकि सूडोमोनास जीवाणु अपनी कालोनी तैयार कर सके।
  • खेत में उकठा बीमारी दिखाई दे, तो सूडोनास कल्चर के कालोनी वाले जीवाणु पाउडर की 2 से ढाई किलो मात्रा को 350 लीटर पानी में घोल कर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए।
  • पत्ती खाने वाली सूंड़ी पत्तियों को कुतर कर खाती हैं। इस से बचाव के लिए ट्रेसर -45 एससी नामक दवा का इस्तेमाल करना चाहिए। इस की ढाई सौ मिलीलीटर मात्रा को 5 सौ लीटर पानी में घोल कर 1 हेक्टेयर खेत में छिड़काव करना चाहिए।

Stiviya ki kheti  की कटाई व पैदावारः

  • फसल की कटाई जमीन से 15-20 सेंटीमीटर की ऊंचाई पर की जाती है।
  • पहली कटाई पौधों की रोपाई के 3-4 महीने बाद करते हैं। इस तरह 1 साल में 3-4 कटिंग मिल जाती है। ये कटिंग 3-4 साल लगातार मिलती हैं।
  • इस फसल से ज्यादा पत्तियां तीसरे और चौथे साल में मिलती हैं।
  • इसकी पैदावार पौधों में पत्तियों की तादाद व आकार पर निर्भर करती है।
  • आमतौर पर 1 हेक्टेयर फसल से 60-65 क्विंटल सूखी पत्तियां मिल जाती हैं।
  • पत्तियों को काटने के बाद छाया में सुखाया जाता है। बाजार में इन सूखी पत्तियों का भाव तकरीबन 2 सौ रुपए किलोग्राम है।

 

 

 

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Title: stevia cultivation technique in hindi in Hindi  | In Category: खेत खलिहान khet khalihan

श्री राम शर्मा

राम शर्मा

पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक हिन्दुस्तान अख़बार से की। करीब 5 साल हिन्दुस्तान में सेवाएं देने के बाद दिल्ली प्रेस से जुड़े। यहां प्रतिष्ठित कृषि पत्रिका फार्म एन फूड में डिप्टी एडिटर के तौर पर करीब 8 साल काम किया। खेती-किसानी के मुद्दों पर देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राएं करते हुए तमाम लेख लिखे। वे ऑल इंडिया रेडियो से भी जुड़े हुए हैं और यहां भी खेती-किसानी की बात को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से प्रमुखता से उठाते रहते हैं। वर्तमान में डीडी न्यूज दिल्ली से जुड़े हुए हैं।

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