बीज में छिपा कामयाबी का अंकुर


बीज ही किसान की रोटी है, क्योंकि अगर बीज शुद्ध, अच्छी क्वालिटी का होगा तो उसे खेतों से भरपूर पैदावार मिलेगी।

हमारी खेती किसानी पर विदेशी कंपनियों और अंतराष्ट्रीय संगठनों का शिकंजा कसता जा रहा है। छोटे, सीमांत व भूमिहीन किसानों के लिए तरक्की के रास्ते बंद से हो रहे हैं। खेती जो कभी उन का जीवन था, अब दिनों दिन नुकसानदायक होती जा रही है। खेती की लागत बढ़ रही है। जिस से किसान अब परेशान होने लगा है। इन समस्याओं से निजात पाने के लिए खेती के तौर तरीकों में कुछ बदलाव लाना जरूरी हो गया है।

किसी भी फसल की अच्छी पैदावार के लिए जुलाई, सिंचाई, अच्छी खाद, कीट पतंगों से सुरक्षा, बढ़िया मौसम वगैरह का होना बहुत जरूरी होता है। इन सुविधाओं और साधन के होते हुए भी कभी-कभी अच्छी पैदावार नहीं मिल पाती है। जिस से किसान के खून-पसीने की गाड़ी कमाई बेकार चली जाती है।

इस की एक वजह है अच्छे बीज का न होना। यानी अच्छे बीज के बिना तमाम सहूलियतें होते हुए भी अच्छी पैदावार हासिल नहीं की जा सकती है।

बीज की उपलब्धता व इस के उत्पादन पर किसानों का अधिकार होना चाहिए। तभी शायद उन की किसानी में टिकाऊपन आ सकेगा। दरअसल बीज एक छोटी जीवत रचना है, गहरी नींद में रहता है, जो सही वातावरण में नमी, ताप, हवा, रोशनी, मिट्टी के संपर्क से नए पौधे को जन्म देता है।

अच्छा बीज इस्तेमाल करने से ज्यादा पैदावार और खराब बीज से कम पैदावार मिलने के साथ अगली फसल के लिए बीज भी घटिया मिलता है। बाजार में उन का कम मिलता है और उर्वरक, सिंचाई व दूसरे कामों में लगी लागत व मेहनत बेकार हो जाती है।

बीज कई तरह के होते हैं, हर बीज की क्वालिटी और उस का रिजल्ट भी अलग-अलग होता है जैसेः

प्रजनक बीजः यह मूल बीज ोता है। इस बीज की आनुवांशिक व भौतिक शुद्धता 100 फीसदी होती है। इस की पहचान के लिए इस पर भूरे रंग का टैग लगा दिया जाता है। यह ऐसा बीज होता है, जिसे तैयार करने का काम प्रजनक बीज नियंत्रक दल द्वारा किया जाता है, जो एक प्रमाणपत्र भी देता है। इसलिए यह बीज एकदम खरा होता है।

कई बार यह बीज बहुत ही कम मात्रा में होता है, तो इस से और बीज तैयार किया जाता है। इस बीज को नाभिकीय बीज कहते हैं। यह प्रजनक बीज का ही एक रूप है।

आधारीय बीजः आधारीय बीज प्रजनक बीज से तैयार किया जाता है। इस को तैयार करने में खास मानकों को ध्यान में रखा जाता है, जिस से आनुवांशिक गुण व शुद्धता बनी रहती है। इस से ही प्रमाणित बीज तैयार किए जाते हैं। इसलिए इसे मदर सीड भी कहते हैं।

इस पर सफेद रंग का टैग लगा होता है। यह बीज प्रजनक बीज की बोआई करने के बाद हासिल होता है। आधारीय बीज किसी बीज प्रमाणीकरण संस्था की देखरेख में सरकारी कृषि फार्मों और कृषि विश्वविद्यालय में तैयार किया जाता है। इस की बोआई कर के सामान्य से 21 फीसदी ज्यादा पैदावार हासिल कर सकते हैं और 3 बार इस बीज का इस्तेमाल बोआई में कर सकते हैं।

प्रमाणित बीजः प्रमाणित बीज में आनुवांशिक गुण व शुद्धता संतोषजनक होती है। जो बीज आधारीय बीज से पैदा किया जाता है। उसे प्रमाणित बीज कहते हैं। इस पर नीले रंग का टैग लगा होता है। यह बीज आधार बीज की बोआई या खुद प्रमाणित बीज की बोआई से मिलता है। इस का उत्पादन बीज प्रमाणीकरण संस्था की देख रेख में कारोबारियों व किसानों द्वारा तय मानकों के मुताबिक किया जाता है। यही बीज 90 फीसदी किसानों को आसानी से मिलता है।

सत्य अंकित बीजः कभी-कभी बीज तैयार करने का काम किसी प्रमाणीकरण संस्था की देखरेख के बिना खुद किसान द्वारा तय मापदंडों को अपनाते हुए किया जाता है। इसे प्रमाणीकरण संस्था का प्रमाणपत्र नहीं मिलता है। इस बीज पर किसान सत्य अंकित बीज का अपना टैग लगाते हैं। खुद अपनी बोआई के लिए किसान इस बीज को उगाते हैं।

अच्छे बीज की खासियतें

अच्छा बीज कैसे तैयार होता है, उस की खासियतें क्या होती हैं, यहां बताया जा रहा हैः
भौतिक शुद्धता: बीज में अन्य फसलों, खरपतवारों के बीज व कंकड़ मिट्टी वगैरह नहीं होती है। नमूने में केवल बीज होते हैं।

सही नमीः अच्छा बीज वह है जिस में नमी न तो इतनी कम हो कि वह बीज को खत्म कर दे और न ही इतनी ज्यादा कि वह कीटों, फफूंदी व सड़न का शिकार हो जाए। यानी अच्छे बीज में नमी सही मात्रा में होती है।

समरूपताः सभी बीजों का रंग, रूप व आकार एकसमान होता है।

अंकुरण कूवतः अच्छे बीज की अंकुरण कूवत कम से कम 85 से 90 फीसदी तक होती है। कुल बोए गए बीजों में से अंकुरित हुए बीजों की मात्रा के आधार पर बीज की अंकुरण कूवत पता की जाती है। अगर हम 100 बीज बोएं और उस में से 80 पौधे निकलते हैं तो यह अच्छी अंकुरण कूवत है।

बीमारी व कीट मुक्तः बीज बीमारियों व कीट से रहित यानी वह ठीक ढंग से उपचारित होता है।

अच्छी क्वालिटीः बीज, किस्म पोषण व स्वाद में अच्छा होने के साथ ही उपभोक्ता, बाजार व उद्योग की जरूरतों के मुताबिक होता है।

प्रतिरोधिताः उन्नत बीज वह है, जिस में खराब हालत जैसे बीमारियों, कीटों, सूखा, बाढ़, पाला, गरमी व ऊसरता वगैरह से लड़ने की कूवत होती है।

बीज जांच
बीज परीक्षण यानी जांच का मतलब बीज के उन सामूहिक स्वरूप से है, जिस में बीज की भौतिक शुद्धता, अंकुरण, रंग, रूप, जीवन कूवत, आनुवंशिकता वगैरह की जांच की जाती है। बीज परीक्षण एक बहुत ही अहम काम है। इस मंे बीजों की विभिन्न चरणों में जांच इस तरह की होती है।

चबा करः इस विधि में बीज के एक दाने को दांतों में दबा कर देखा जाता है। अगर बीज कड़ की आवाज के साथ टूट जाता है तो नमी सामान्य है। यह एक सामान्य अनुमान होता है।

तेल आसवन विधिः इस विधि में 2 सौ ग्राम सरसों का तेल व 100 ग्राम बीज एक बरतन में ले कर 190 डिगरी सेंटीग्रेड तापमान पर 15 से 30 मिनट तक गरम करते हैं। जिस से पानी उड़ जाता है, लेकिन तेल नहीं उड़ता, बीज वाले तेल के बरतन को शुरू में और बाद में नमी की मात्रा होती है। यह कम खर्चीला और सही नमी का पता लगाने का अच्छा तरीका है। यह विधि मक्का, गेहूं, धान, ज्वार के बीजों में नमी जानने के लिए बेहतर विकल्प है।

फुटाव की जंाच
नमी जांचने के बाद बीज की जमाव दर यानी उस के फुटाव की कूवत का पता किया जाता है।

बालू विधिः अंकूरण कूवत जानने का यह एक आसान तरीका है। इस जांच में कांच की 4 पैट्री डिश (शीशे की तश्तरी) ले कर उन में बराबर मात्रा में बालू भर कर उस पर में पानी का छिड़काव कर के नमी कर देते हैं। उस के बाद बीज के ढेर मेंसे 100-100 बीजों के नमूने ले कर चारों पैट्री डिशों में सही दूरी पर बोआई कर देते हैं।

समय-समय पर पानी का छिड़काव करते हैं, जिस से नमी बनी रहे। उस के बाद बीज की किस्म के आधार पर 7 से 20 दिन बाद जमाव की मात्रा जानने के लिए सभी पैट्री डिशों में जमे हुए बीजों को गिन कर उन की फीसदी मात्रा जान लेते हैं। अगर बीज का जमाव 85 फीसदी हुआ है तो बीज बोआई करने के लायक है।

कागज विधिः इस जांच में सोख्ता कागज, तौलिया कागज वगैरह का इस्तेमाल होता है। कागज विधि को कई तरह से इस्तेमाल किया जाता है।

कागज के ऊपर जमावः इस विधि में बीजों को कागज की 1 या कई परतों (कम से कम 2 एमएम मोटी) के ऊपर अंकुरित कराया जाता है। कागज को ट्रे या पैट्री प्लेटों में फैला कर पानी से गीला कर लिया जाता है। उस के बाद कागज पर बीज सही दूरी पर फैला कर पात्रों को छेद कर ढक्कन से ढक दिया जाता है। जिस से नमी कम उड़े। कभी-कभी कागज के नीचे रूई या हल्की बालू की परत बिछा देते हैं, जिस से नमी बनी रहे और बीज अंकुरण में आसानी हो।

कागज के बीच में बीजः इस विधि में गीले कागज को 2 परतों के बीच में बीजों को रखा जाता है। कागज आपस में चिपके नहीं, इस के लिए कागजों के बीच प्लास्टिक या लकड़ी की प्लेट लगा दी जाती है।

थैला विधिः इस विधि में बीजों को गीले जूट के थैलों में लपेटा जाता है। उन्हें उचित तापमान पर रैक या किसी जगह पर रख दिया जाता है।

बीज से शुद्धता
किसी बीज ढेर में किसी जाति विशेष के बीज की फीसदी मात्रा जानना शुद्धता परीक्षण कहलाता है।

बीज की शुद्धता जानने के लिए ये काम करेंः
नमूनाः अच्छे व स्वस्थ बीज अलग-अलग जगह से लेने चाहिए। बीज नमूना लेते समय कम से कम 500 ग्राम या अधिकतम एक किलोग्राम बीज लेने चाहिए।

ओसाईः अगर बीज में भूसी के कण, धूल वगैरह हो तो ओसाई कर के अलग कर देना चाहिए।

चलनी से खरपतवार के बीज, कंकड़ वगैरह अलग कर लेने चाहिए।

अगर नमूने के कुल भार के योग में 1 से ज्यादा का अंतर हो तो जांच दोबारा करनी चाहिए।

नमूने के कुल भार में मौजूद शुद्ध बीज के भार के आधार पर शुद्धता फीसदी की गणना की जाती है।

शुद्धता फीसदी त्र (शुद्ध बीज का भार/कार्यकारी नमूने का भार) 100

तौल और गणना करनाः शुद्ध बीज, अन्य फसलों के बीज, खरपतवार के बीज बेकार पदार्थ को तौल कर 4 अंकों में उन का वजन जाता है।
बीज जांच के दौरान इन बातों का ध्यान रखें
अंकुरण जांच के लिए नमूना लेते समय कई जगहों से बीज निकाल कर उन को एक जगह इकट्ठा कर के उस में से कम से कम 100-100 बीजों को गिन कर नमूने के रूप में लेना चाहिए।

बीजों को सही दूरी पर होना चाहिए। दूरी बीज की जाति और परीक्षण विधि के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। बीजों के बीच की दूरी उन के आकार के तकरीबन 2 गुने के बराबर रहनी चाहिए।

अंकुरण जांच के दौरान जरूरत के मुताबिक पानी दिया जाना चाहिए। 18 से 22 सेंटीग्रेड तापमान तकरीबन सभी किस्मों के लिए सही रहता है। विभिन्न बीजों की तापमान की जरूरत अलग-अलग भी होती है।

अंकुरण परिणाम की गणना करते समय अलग-अलग चरणों में रखे गए बीजों के जमाव फीसदी के आधार बीज अंकुरण को जाना जाता है।
100 बीजों में से कितने बीज अच्छी तरह अंकुरित हुए हैं। उसी से उस वैरायटी की बीज दर को घटाबढ़ा कर बोआई कर सकते हैं। अच्छे बीज का जमाव कम से कम 85 फीसदी होना चाहिए।

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श्री राम शर्मा

श्री राम शर्मा

पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक हिन्दुस्तान अख़बार से की। करीब 5 साल हिन्दुस्तान में सेवाएं देने के बाद दिल्ली प्रेस से जुड़े। यहां प्रतिष्ठित कृषि पत्रिका फार्म एन फूड में डिप्टी एडिटर के तौर पर करीब 8 साल काम किया। खेती-किसानी के मुद्दों पर देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राएं करते हुए तमाम लेख लिखे। वे ऑल इंडिया रेडियो से भी जुड़े हुए हैं और यहां भी खेती-किसानी की बात को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से प्रमुखता से उठाते रहते हैं। वर्तामान में डीडी न्यूज दिल्ली से जुड़े हुए हैं।

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