फसलों में जान डालता थायोयूरिया


भारत में उगाई जाने वाली तिलहनी फसलों में सरसों की खास जगह है। केरल को छोड़ कर सरसों की खेती पूरे देश में की जाती है।
तमाम खोजबीनों से यह पता चला है कि सरसों खराब हालात में भी उगाई जा सकती है। सरसों की खेती के मामले में राजस्थान सब से आगे हैं देश में सरसों का कुल रकबा 60 लाख हेक्टेयर है, जिस का 40 फीसदी भाग राजस्थान में है। पैदावार के नजरिए से राजस्थान देश के कुल सरसों उत्पादन का 44 फीसदी भाग पैदा करता है। राजस्थान में भी भरतपुर जिले में सब से ज्यादा सरसों पैदा की जाती है। भरतपुर जिले में तकरीबन 2 लाख हेक्टेयर रकबे में सरसों की फसल उगाई जाती है।
राजस्थान में पहले सरसों का सिंचित क्षेत्रफल 4.2 लाख हेक्टेयर था जो 90 के दशक में 16.7 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया। उन्नत किस्मों व सिंचाई के साधनों के विस्तार के साथ किसानों ने उन्नत तकनीकों को अपना कर सरसों की पैदावार में रिकार्ड कायम किया है।

देश में खाद्य तेल की कमी एक गंभीर समस्या बनी हुई है। हर साल तकरीबन 7 हजार करोड़ रुपए खाद्य तेलों के आयात पर खर्च होते हैं, इसी वजह से सरकारी योजनाओं में तिलहन उत्पादन को बढ़ाने पर खासतौर से जोर दिए जाने का लक्ष्य रखा जाता है। बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए खाद्यान्न पूर्ति की समस्या और बढ़ते हुए शहरीकरण के कारण तिलहनी फसलों के रकबे में इजाफा कर पाना मुमकिन नहीं है। इसलिए तिलहन उत्पादन में इजाफा, इस की पैदावार में इजाफे से ही संभव हो पाएगा।

अगर हम सरसों की पैदावार को देखें तो देश में सरसों की औसत उपज 9.60 क्ंिवटल प्रति हेक्टेयर है। आंकड़ें बताते हैं कि पिछले कुछ सालों में सरसों की उत्पादकता में कोई खास इजाफा नहीं हो पाया है। साल 1991-92 में सरसों की औसत उपज 9.59 क्ंिवटल थी और साल 1999-2000 में औसत उपज 9.86 क्ंिवटल रही।

सरसों की पैदावार में इजाफे के लिए यह जरूरी है कि उर्वरक व खाद का संतुलित इस्तेमाल हो व फसल को बीमारी और कीट से बचाने के कारगर उपाय सही समय पर अपनाए जाएं। साथ ही मौजूदा सिंचाई के लिए पानी के इस्तेमाल की दक्षता बढ़ाई जाए। पाले वाले इलाकों में अच्छे उपाय अपना कर फसल को पाले से बचाया जाना चाहिए।

सरसों की फसल में पोषक तत्व गंधक का अहम रोल है। अनाज वाली फसल 1 टन अनाज के उत्पादन में मिट्टी से 3-4 किलो गंधक का इस्तेमाल करती है, जबकि सरसों की फसल 1 टन बीज के उत्पादन में 12 किलोग्राम गंधक का इस्तेमाल करती है। गंधक के इस्तेमाल में सरसों की पैदावार को बढ़ाने के लिए गंधक के इस्तेमाल से सरसों की पैदावार को बढ़ाने के लिए गंधक उर्वरक, जैसे जिप्सम के इस्तेमाल पर खास जोर दिया जाना चाहिए।

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श्री राम शर्मा

श्री राम शर्मा

पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक हिन्दुस्तान अख़बार से की। करीब 5 साल हिन्दुस्तान में सेवाएं देने के बाद दिल्ली प्रेस से जुड़े। यहां प्रतिष्ठित कृषि पत्रिका फार्म एन फूड में डिप्टी एडिटर के तौर पर करीब 8 साल काम किया। खेती-किसानी के मुद्दों पर देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राएं करते हुए तमाम लेख लिखे। वे ऑल इंडिया रेडियो से भी जुड़े हुए हैं और यहां भी खेती-किसानी की बात को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से प्रमुखता से उठाते रहते हैं। वर्तामान में डीडी न्यूज दिल्ली से जुड़े हुए हैं।

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