साफ आबोहवा के लिए टर्फ घास का योगदान


टर्फ घास को लान, कुदरती दृश्य वगैरह की सुंदरता को बढ़ाने और उसे बनाए रखने में इस्तेमाल किया जाता है।
4 लोगों के परिवार के लिए 25 सौ वर्ग फुट का एक लान आबोहवा से सही मात्रा में कार्बन डाइआक्साइड गैस को ले कर के उसे आक्सीजन में बदलने का काम करता है। इतना ही नहीं यह घास तापमान कम करने और बरसाती पानी को इकट्ठा कर जमीनी पानी का स्तर बढ़ाने में भी मदद करती है।
टर्फ घास 2 तरह की होती है, गर्म मौसम वाली घास और ठंडे मौसम वाली घास।
गरम मौसम वाली घास मंे साइनोडान डैक्टाइलान, स्टैनोटैफरम सेक्नडैटम, जोयसिया जेपोनिका, बकलोई डैक्टाईलायडिस, पैसेपेलम नोटेटम वगैरह किस्में आती हैं।

ठंडे मौसम वाली घास में फैस्टुका आरडीनेसिया, पोआ प्रेटेनसिस, लोलियम पेरिनी, एग्रोसिटम पैलुस्ट्रिस, फैसटुका रूब्रा वगैरह वैरायटी आती है।

टर्फ के फायदे

भूमि कटाव रोकनाः टर्फ घास का मिट्टी बचाव में खास योगदान है, इसे एक सस्ती, टिकाऊ ग्राउंड कवर के रूप में मिट्टी बचाव के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है, हवा और पानी से होने वाले मिट्टी के कटाव को रोकने में बारहमासी टर्फ घास का सब से ज्यादा योगदान है। टर्फ घास घरों, कारखानों, स्कूलों या अन्य सार्वजनिक स्थानों पर धूल और कीचड़ जैसी समस्याओं को दूर करने में सहायक होती है।

टर्फ घास का मैदान पानी और धूल को लपेटने या फंसाने और गैसीय प्रदूषण को अपने अंदर रोकने में बहुत असरदार है। शहरी इलाकों में कठोर धरती होने से वहां बहने वाला पानी अपने साथ कई गंदगियों को लाता है। अगर टर्फ पा को सही रूप में इस्तेमाल किया जाए तो यह प्रदूषण रोकने और पानी को इकट्ठा करने के लिए सब से अच्छा माध्यम होती है।

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श्री राम शर्मा

श्री राम शर्मा

पत्रकारिता की शुरुआत दैनिक हिन्दुस्तान अख़बार से की। करीब 5 साल हिन्दुस्तान में सेवाएं देने के बाद दिल्ली प्रेस से जुड़े। यहां प्रतिष्ठित कृषि पत्रिका फार्म एन फूड में डिप्टी एडिटर के तौर पर करीब 8 साल काम किया। खेती-किसानी के मुद्दों पर देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राएं करते हुए तमाम लेख लिखे। वे ऑल इंडिया रेडियो से भी जुड़े हुए हैं और यहां भी खेती-किसानी की बात को विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से प्रमुखता से उठाते रहते हैं। वर्तामान में डीडी न्यूज दिल्ली से जुड़े हुए हैं।

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