जीवनसाथी को खुश रखना चाहते हैं तो रखें इन बातों का ख्याल


ऐसा अकसर होता है कि जीवनसाथी मन में गढी हुई तसवीर जैसा नहीं निकलता। शादी से पहले उसे जैसा सुना, समझा या जाना था, शादी के बाद उससे कहीं अलग वह लगने लगता है। मैनेजमेंट गुरु प्रमोद बत्रा का कहना है- वस्तुत: शादी कर बंधन में बंधने के बाद ही पति-पत्नी एक-दूसरे के वास्तविक रूप को जान पाते हैं। आगे वह कहते हैं- ऐसा कुछ हो जाने पर, जो आम तौर पर प्राय: हर एक के साथ होता, सकारात्मक सोच की अहमियत को समझना जरूरी हो जाता है। ऐसा करने पर ही संबंध सुखद रह सकते हैं। सीधे व आसान शब्दों में कहें तो यह मसला आपकी सोच से जुडा होता है। किसी भी चीज के प्रति जब आप सकारात्मक सोच रखते हैं तो आपको वो चीज वैसी ही दिखती है और नकारात्मक दृष्टिकोण रखने से उसमें बुराइयां ही बुराइयां ही नजर आने लगती हैं।

सर्वगुणसंपन्न कोई नहीं

यह याद रखें कि दोषरहित कोई नहीं होता, न ही सर्वगुणसंपन्न कोई होता है। कोई ऐसा पति नहीं होगा जिसे सर्वगुणसंपन्न पत्नी मिली हो, न ही कोई ऐसी पत्नी होगी जिसे सर्वगुणसंपन्न पति मिला हो। ऐसे में खुश रहना बहुत कुछ आप पर ही निर्भर करता है। सीधे शब्दों में कहें तो दूसरे को स्वीकार करने के लिए उसे पूरे तौर पर स्वीकार करना पडता है। उसकी अच्छाइयों के साथ-साथ उसकी कमियों के साथ भी एडजस्ट कीजिए, तभी आप उसके साथ सुखी रह सकते/सकती हैं। यह भी एक तरह से अच्छा है कि ईश्वर ने हमारे दिमाग को ऐसा बनाया है कि हम अपनी मानसिक फ्लॉपीज की फालतू फाइलों को अपनी इच्छानुसार डिलीट कर सकते हैं। उसमें उतना भर ही रहने देना चाहिए, जितने की जरूरत हो। यदि आप अपने वैवाहिक जीवन को खुशियों से भरना चाहते हैं तो आप ऐसा ही कीजिए फिर देखिए उनका परिणाम। न यकीन हो तो करके देखिए।

साथी पर विश्वास कीजिए

रिश्तों का आधार होता है एक-दूसरे पर भरोसा करना। यदि आप दोनों ही एक-दूसरे पर विश्वास नहीं करेंगे तो कोई और भी यकीन नहीं रखेगा। विश्वास वह मजबूत दीवार है जिसे भेद कर कोई बाहरी व्यक्ति आपके रिश्तों में सेंध नहीं लगा सकता। जहां अविश्वास है वहीं रिश्ते बिखरते भी हैं। इतना ही नहीं, यह विश्वास ही वह आधार है जो आपको हर स्थिति से लडने में मदद करता है। आपसी रिश्तों की बेहतरी के लिए यह विश्वास बनाए रहिए। मार्टिन लूथर किंग का यह कथन याद रखिए कि आपको जीवन में कुछ तो भरोसा रखना ही होगा, कम से कम उस पर, जो आपके आिखरी दिनों तक आपके साथ रहने वाला है।

नजरिया बदलिए

आप अपने जीवनसाथी को यदि अच्छा मानते/मानती हैं तो इससे न केवल आपको, बल्कि उन्हें भी अच्छा महसूस होगा व उनमें आत्मविश्वास भी बढेगा। हर समय एक-दूसरे की कमियों को गिनाने से कुछ नहीं होगा। जो अच्छा है उसे याद रखिए। अपने दिमागी धार से खराब हिस्से को खुरच कर अलग कर दीजिए, अब आपको जो मिलेगा वह निश्चित रूप से उपयोगी होगा। आपके एक प्रेम भरे वाक्य में वह करने की ताकत रहती है जो हजारों रुपयों के तोहफेमें भी नहीं होती। इसके लिए हीरे की अंगूठी या महंगी घडी देना जरूरी नहीं, यह काम आपकी मंद मुसकान या एक पॉजिटिव कमेंट से भी हो सकता है। यह भी सच है कि हर कोई हर समय खुश रहे यह जरूरी नहीं, लेकिन वह दुखी ही बना रहे यह भी जरूरी नहीं। अंतर केवल नजरिए का है, आपकी सोच का है। आपका दिमाग जैसे सोचता है, सच भी उसी के अनुसार लगने लगता है। यदि आप अपने साथी में सिर्फ कमियां देखते/देखती हैं तो एक दिन वह सच में वैसा नजर आने लगेगा। इसका असर आपके व्यवहार पर भी होने लगेगा। तभी कहते हैं कि अच्छा सोचोगे तो अच्छा ही नजर आएगा। खराब सोच सामने दिखने वाली चीजों का खराब रूप ही उजागर करेगा।

एकदूसरे का सम्मान करें

सबसे पहली व जरूरी चीज है कि आप अपने साथी को बेहतरीन मानें। यह सकारात्मक सोच आपको बहुत अच्छा महसूस करने में मददगार होगी। इसके साथ ही यह भी याद रखिए कि उम्र कुछ भी हो, हर व्यक्ति के भीतर उसका बचपन कहीं न कहीं जिंदा रहता ही है जिसके लिए वह जीवन साथी से सपोर्ट चाहता ही है। आप किसी वयस्क को पूरा बदल नहीं सकते, उसे उसी तरह स्वीकार करिए। फिर भी कोई आदत यदि आपको बहुत बुरी लग रही है तो प्यार से धीरे-धीरे बदलने की कोशिश कीजिए। कुछ न कुछ ऐसा करते/करती रहिए, जो वह चाहे। याद रखिए कि आपके साथी के बराबर अन्य कोई नहीं हो सकता। उसे एहसास कराइए कि आप उसकी कितनी परवाह करते हैं। यह न भूलें कि प्यार का फूल तभी खिलता है जब पुरुष और स्त्री एक-दूसरे के मतभेदों को स्वीकार करना और एक-दूसरे का सम्मान करना जानते हैं। विवाह संस्था की अपनी खूबी यह है कि वह आपको निष्ठा, साहस, धैर्य, आत्म नियंत्रण तथा ऐसी और भी कई महत्वपूर्ण विशेषताओं के बारे में सिखाता है।

 

 


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *