यदि आपको भी बार बार कमजोरी महसूस होती है तो ये खतरनाक बीमारियों के लक्षण भी हो सकते है


अक्सर देखा गया है कि कुछ लोग खुद को अंदर से बेहद कमजोर महसूस करते हैं, तो क्या सच में वो कमजोर हो गये हैं ? सबसे पहले ‘कमजोरी’ शब्द के बारे में जान लें। सांस फूलना, भूख न लगना, वजन गिरना, मन न लगना, बुखार-सा लगना आदि को हम कमजोरी के लक्षण मान लेते हैं और डॉक्टर के पास इस कमजोरी  के इलाज़ की गुहार लगते हैं तो कुछ ताकत बढ़ाने वाले टॉनिक का प्रयोग कर कुछ चमत्कारिक होने की संभावनाओ को पाल लेते हैं। मगर आपको बता दें कि इस तरह की लापरवाही आपके लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है। खुलासा डॉट इन में डा नरेश आपको बता रहे हैं कि कैसे कभी कभी सामान्य सी लगने वाली कमजोरी किसी बड़ी बीमारी की शुरुआत भी हो सकती है।

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आज के समय में ऐसे कई उदाहरण आपको मिल जायेंगे जो सिर्फ जरा सी लापरवाही के कारण डॉक्टर से दूरी रखते हैं, परन्तु जब तक उन्हें होश आता है तब तक उन्हें कोई खतरनाक रोग जकड़ चूका होता है ऐसा कई बार पाया गया है कि जिसे आप कमजोरी के लक्षण समझ रहे होते है, डॉक्टरी जांच के बाद वो डायबिटीज की बीमारी निकलती है। अत: यदि आपके परिवार में किसी को भी कमजोरी की शिकायत हो उसके ब्लड शुगर की जांच अवश्य करायें। डायबिटीज की बीमारी में कमजोरी महसूस होने के साथ साथ वजन का गिरना, बार बार  पेशाब आना, भूख न लगना और बार-बार प्यास का लगना है।

वैसे ऐसा जरूरी नहीं है कि हर बार वजन गिरने का कारण सिर्फ डायबिटीज ही हो एनीमिया यानि कि खून की कमी के कारण भी आपको कमजोरी महसूस हो सकती है, अधिकांश महिलाओं में कमजोरी का यही कारण पाया जाता है। एनीमिया को हीमोग्लोबिन की एक साधारण-सी जांच द्वारा ही मालूम किया जा सकता है | खून की कमी और कमजोरी को दूर करने के लिए आप प्रतिदिन आयरन की गोलियां ले सकते हैं।

अत: आप समझ ही गए होंगे कि जिसे आप मात्र कमजोरी समझ कर लापरवाह हो जाते है हकीकत में वो कोई जानलेवा बीमारी भी हो सकती है, जैसे कि ‘क्रोनिक किडनी फेल्योर’ जैसे जानलेवा बीमारी के शुरुआती लक्षण थकान, कमजोरी और भूख न लगना ही है, यदि आप लापरवाही बरतते हैं तो हो सकता है ये रोग आपको अपनी पकड़ में जकड़ ले।

थायरॉयड भी इसी प्रकार की एक बीमारी है, जिसके शुरुआती लक्षणों में कमजोरी आना आम बात है। कैंसर भी इसी प्रकार से घात लगाकर हमला करता है, जिसके चलते बड़ी आंत के कैंसर, लिवर कैंसर, हड्डियों या रक्त कैंसर इसी श्रेणी में आते हैं ।

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कभी भी कमजोरी और हल्के बुखार को हल्के में न ले, बल्कि पूर्ण डॉक्टरी जांच करायें। आप एक बात का और ध्यान रखे कि आप जिसे कमजोरी समझ रहे है उसके लक्षण क्या क्या है ?  याद रहे कि थकान महसूस होना, सांस फूलना, चक्कर आना या  अंधेरा-सा छा जाना, कभी कमजोरी नहीं हो सकते। ऐसे लक्षण दिल की बीमारी, अनियंत्रित बीपी या फिर किसी न्यूरोलॉजिकल बीमारी के शुरुआती संकेत भी हो सकते हैं ।  बिना डॉक्टर से परामर्श के कोई दवा न लें, क्योंकि गलत दवा का चयन आपकी बीमारी को कम करने के बजाय और बढ़ा सकती है।

यदि डॉक्टरी जांच के बावजूद भी कमजोरी का कोई स्पष्ट कारण पता न चल पा रहा हो तो फिर इस कमजोरी का कारण अपने अंदर तलाशे, कही यह आपके अवचेतन मन की उपज तो नहीं है। हालाँकि आपको किसी मनोचिकित्सक के चक्कर लगाने की जरुरत नहीं है। ज़िन्दगी की उलझन ही इतनी है कि इंडोजीनस डिप्रेशन भी आपको कुछ थका हुआ और अलग व अजीब फील करवाएगी।

इस पूरे आलेख का उद्देश्य मात्र आपको ये समझाना है कि कमजोरी महसूस होने पर टॉनिक लेने के लिए उतारू न रहे, बल्कि सही कारण की तलाश कर उसका इलाज़ करे।

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