जलन से न जलाएं जिया, आपका ही होगा नुकसान


पार्टी में हर किसी की नजर उसी की तरफ है। पुरुष अपनी पत्नियों से निगाह बचाकर उसे ही बार-बार देखे जा रहे हैं। स्त्रियां उस पर बहुत ज्यादा ध्यान न देने का दिखावा करने की कोशिश करते हुए भी उसे घूरे जा रही हैं। सबकी नजरें उसकी तरफ हैं, लेकिन किसी का ध्यान रूपल के ही साथ आई उसकी सहेली प्रियंका की तरफ नहीं है। कोई भी उस पर ध्यान देता तो एक नजर में जान जाता कि वह अपनी सहेली के सबकी नजरों का केंद्र बने होने पर जलन के मारे कोयला हुई जा रही है।

व्यक्तित्व विकास में सहायक

हर कोई रूपल बनना चाहता है, कोई प्रियंका नहीं बनना चाहता, जबकि सच्चाई यह है कि हर एक में थोडी रूपल भी है और थोडी प्रियंका भी। लेकिन खुद के प्रियंका होने पर शर्मिदा होने की जरूरत नहीं है। ईर्ष्या या डाह कोई बहुत खराब चीज नहीं है, बल्कि नियंत्रित मात्रा में ईर्ष्या व्यक्तित्व के विकास के लिए सहायक साबित हो सकती है। यह एक नेगेटिव एनर्जी है, लेकिन इसका इस्तेमाल पॉजिटिव एनर्जी के तौर पर करें तो ये कमाल के नतीजे दे सकती है। यह कोई मुश्किल काम नहीं है, बस जरा सा अपनी सोच को बदलने की जरूरत है। इसकी शुरुआत यूं हो सकती है कि आप खुद को प्रियंका की जगह रखें और खुद से सवाल करें, आपको रूपल से जलन क्यों है? क्या उसकी खूबसूरती से? क्या लोग उसकी खूबसूरती के दीवाने हैं? शायद सिर्फ यही बात नहीं है।

तारीफ सिर्फ बाहरी नहीं होती

अगर उसमें सिर्फ बाहरी खूबसूरती होती और आंतरिक सौंदर्य न होता तो उसे कोई इतना पसंद न करता। सिर्फ बाहरी सौंदर्य के आधार पर आपको थोडी देर के लिए किसी नई जगह पर खास तवज्जो तो मिल सकती है, लेकिन अपने लोगों की नजर में हमेशा प्रिय बने रहने के लिए कुछ और भी चाहिए। तो फिर रूपल सबकी प्रिय क्यों है? वह सबकी प्रिय इसलिए है, क्योंकि उसमें दूसरी सकारात्मक खूबियां भी हैं। इतना ही नहीं, वह किसी का दिल नहीं दुखाती, जरूरत पर सबके काम आती है।

अपनी अच्छाइयों को पहचानिए

हो सकता है आप भी ऐसी हों पर ईर्ष्या के कारण हमेशा दूसरों पर अपना ध्यान रखने और अपनी उलझनों में खोई रहने की वजह से खुद पर ध्यान नहीं दे पा रही हों। आपने दूसरे की सिर्फ एक चमकदार विशेषता को देखा और अपने पास उसे न पाकर अफसोस किया। आइए अब जानें आप कैसे अपने मन से इस विष बेल को उखाड कर फेंक सकती हैं, ताकि खुशबूदार बेलों को पनपने का मौका मिल सके।

तनमन को रखें स्वस्थ

अपनी सोच को सकारात्मक बनाएं। इसके लिए योग सबसे कारगर उपाय हो सकता है। योग न सिर्फ शरीर के विकारों को दूर करता है बल्कि मन को साफ कर देता है।

मन को शांत रखने के लिए खानपान पर खास ध्यान दें। ठंडी तासीर की चीजें ज्यादा लें और जहां तक हो सके मांसाहारी भोजन, धूम्रपान, मद्यपान और फैट से दूर रहें।

जिन्हें आप अपने से श्रेष्ठ समझती हैं, उन्हें देखें, उनके बारे में सोचें और उनसे प्रेरणा जरूर लें, लेकिन जलन न रखें। इसके लिए जो आप से कमतर हैं, उन्हें भी देखें। इससे आप अपने व्यक्तित्व में बैलेंस रख सकेंगी।

जिससे हो ईर्ष्या उसके पास जाएं

अगर आपके मन में किसी के लिए ईर्ष्या की भावना पैदा होती है तो उससे दूर न भागें। उसके और नजदीक जाएं। कुछ ही दिनों में आप जान जाएंगी कि उसमें पसंद करने के लिए बहुत कुछ है। दरअसल हम पहले ही किसी के प्रति इतने पूर्वाग्रही हो जाते हैं कि सकारात्मक सोच नहीं रख पाते। कई बार सिर्फ अहं के कारण फासले बढते जाते हैं। एक बार दूसरे के पास जाने के लिए एक बडी रेखा खींचें, पहले ही बनी रेखाएं अपने आप छोटी हो जाएंगी। एक बार ऐसा करके तो देखें। अगर आप देखने में बेहद मामूली लगने वाली लेकिन महत्वपूर्ण इन बातों पर अमल कर पाती हैं तो पाएंगी कि आप अपनी िजंदगी में एक अच्छी चीज को यूं ही बर्बाद कर रही थीं।


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