बेहतरीन गायिका भी थी माला सिन्हा


माला सिन्हा गोल्डन एरा की सफल अभिनेत्री कही गईं। इन्होंने 100 से अधिक हिंदी फिल्मों में काम किया। साथ ही बांग्ला व नेपाली फिल्मों में भी अपनी अदाकारी का जादू बिखेरा। मेला-ड्रामा, डांस व रोमांस इनकी एक्टिंग के खासियत रहे। नेपाल के क्रिश्चियन परिवार में जन्मी माला का असली नाम एल्दा रखा गया था। स्कूल में साथी इन्हें ‘डालडा’ यानी नकली घी कहकर चिढ़ाते थे।
तंग आकर इन्होंने एल्दा से नाम बदलकर माला रख लिया।

बहुत कम लोगों को यह पता है कि माला सिन्हा एक बेहतरीन गायिका भी रही, लेकिन फिल्मों में कभी पाश्र्व गायन का मौका नहीं मिला। दरअसल माला ने बचपन में नृत्य व गायन की विशेष शिक्षा ली थी और ‘आॅल इंडिया रेडिया’ पर गाती थीं। 1947 से 1975 के बीच कई स्टेज शो में इनकी सुरली आवाज सुनाई दी।

बाल-कलाकार के रूप में माला ने फिल्मी शुरुआत बंगला फिल्म ‘जय वैष्णो देवी’ से की थी। मात्र 16 बरस की बाली उम्र में यह हिंदी फिल्मों की मुख्य अभिनेत्री बनीं। पहली फिल्म ‘रोशनआरा’ 1952 थी, लेकिन शुरुआती फिल्मों को खास सफलता नहीं मिली। रंगीन रातें, एकादशी, लालबत्ती व नौशेखाना दिल ऐसी ही फिल्में रहीं। बाद में मुख्य भूमिकाओं में जमने के एिल वह जल्द ही बाॅम्बे चली आईं (1952-53)। यहां आने पर चर्चित गायिका गीता दत्त ने माला को फिल्मी गुर सिखाए व बड़े बैनर में जाने में मदद भी की।
सन् 1957 में गुरुदत्त ने फिल्म ‘प्यासा’ में माला को सहायक भूमिका दी। दरअसल यह भूमिका मधुबाला को दी जानी थी, मगर बीमारी और व्यस्तता के कारण मधुबाला ने फिल्म करने से मना कर दिया। ऐसे में यह शानदार मौका माला सिन्हा ने भुनाया। फिल्म में इनकी भूमिका एक दगाबाज प्रेमिका की थी। पैसों की खातिर हीरो (गुरुदत्त) को छोड़कर वह अमीर आदमी (रहमान) से शादी कर लेती है। फिल्म में गुरुदत्त माला पर फिल्माया एक युगल गीत ‘हम आपकी आंखों में इस दिल को बसा…’ काफी लोकप्रिय हुआ था।

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