अक्सर 2 : कुछ तो अधूरा है


अनंत नारायण महादेवन अपनी ही फिल्म अक्सर का सिक्वल लाये है, जिसका नाम है अक्सर 2, हालाँकि अक्सर 2 का अक्सर से कोई लेना देना नहीं है | फिल्म की कहानी अच्छी है, एक्टिंग भी ठीक है, फिल्म का ट्रीटमेंट भी अच्छा है फिर भी फिल्म में कम अधूरा सा रह जाता है | शायद इसलिए क्योंकि निर्देशक ने जब थ्रिलर की तरफ बढती है, तो हीरोइन के कपडे कम होने लगे है, जो थ्रिलर को कमजोर बनाते है | फिल्म को आप क्रिकेटर से एक्टर बने श्रीसंत के लिए भी देख सकते है |

कहानी एक वृद्ध महिला की एक जो अपने फाइनेंसियल मेनेजर को खुद के लिए गर्वनेस हायर करने के लिए कहती है और इनकी तलाश फिल्म की नायिका पर आकर खत्म होती है | और घर में गर्वनेस के आते ही एक शतरंज की बाज़ी बिछ जाती है, जिसमे कोई वजीर है और कौन प्यादा, ये आपको समझने में देर नही लगेगी |

ज़रीन खान पहले की ही तरह बोर लगती है | इस बार उन्होंने अपनी पिछली फिल्म हेट स्टोरी 3 से ज्यादा अंग प्रदर्शन जरुर किया है | गौतम रोड़े और अभिनव शुक्ला भी कुछ खास कमाल नही कर पाते, हालाँकि गौतम जैसे कलाकार का इस तरह की फिल्म करना समझ से परे है | बुढियां का मेक-अप करने के बावजूद लिलेट दुबे की आवाज़ किसी वृद्ध की कम और 40-45 साल की महिला की आवाज़ लगती है | श्रीसंत लुक में तो ठीक लगते है मगर फिल्म में पूरे के पूरे वेस्ट |

फिल्म में गीत-संगीत प्रभावित नहीं करता | फिल्म में इस्तमाल की गयी लोकेशन जरुर आपका मन मोह सकती है | एडिटिंग पर थोडा और ध्यान दिया जाना चाहिए था | यदि फॅमिली के साथ ऐसी फिल्म देखने में संकोच करते है तो सिनेमा हाल के दरवाज़े आपकी बाट देख रहे है |

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सुमित नैथानी

सुमित नैथानी

सुमित नैथानी पेशे से ब्लॉगर व लेखक हैं। कई क्षेत्रीय पत्र पत्रिकाओं के लिए लेखन के साथ जागरण जंक्शन (दैनिक जागरण का ब्लॉग ) पर भी लगातार लिखते रहे हैं।

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