एक्टर इन लॉ : सिर्फ और सिर्फ सिनेमा प्रेमियों के लिए


2016-17 में बॉलीवुड की एक आध फिल्म को छोड़ दिया जाए तो कोई ऐसी फिल्म दर्शको के बीच नही आई है, जिसे एक बेहतरीन फिल्म कहा जा सके | बॉलीवुड में बड़े सितारो को लेकर तमाशा, ए दिल है मुश्किल, बेफिकरे, हाउस फुल 3 जैसी बचकानी फिल्मे दर्शको के आगे परोसी जाती हैं | अक्सर बड़े स्टार या मल्टी स्टारर फिल्में, कलाकारों के नाम से ही अपना बजट पूरा कर लेती हैं, मगर न तो इन फिल्मों में अच्छी अदाकारी होती है और न ही यादगार स्क्रीन प्ले | ऐसे में हर सिनेमा प्रेमी को पाकिस्तानी फिल्म “एक्टर इन लॉ” जरुर देखनी चाहिए तथा  बॉलीवुड के निर्देशकों को इससे प्रेरणा भी लेनी चाहिए |

फिल्म की कहानी रफ़ाक़त मिर्ज़ा (ओम पुरी) की है, जो कोर्ट के एक नाकारा वकील है मगर वो चाहते है उनका बेटा वकालत कर उनका नाम रौशन करे | जबकि मिर्ज़ा के होनहार बेटे शान मिर्ज़ा (फहाद मुस्तफ़ा) की दिलचस्पी फिल्मो के सुपर स्टार बनने में है | इसलिए वो लॉ कॉलेज में एडमिशन लेने के बावजूद पढाई को बीच में छोड़ कर फ़िल्मी दुनिया में स्ट्रगल करता है, लेकिन वहां भी नाकामी शान का पीछा नही छोडती | कहानी की एक छोटी सी घटना शान को स्टेज के तौर पर कोर्ट रूम देती है और यही से शान पूरी पाकिस्तान आवाम का हीरो बन जाता है |

फिल्म में मुख्य भूमिका ओम पुरी, फहाद मुस्तफ़ा, महविश हयात, अल्य्य खान और सलीम मेराज ने निभायी है | हर किरदार अपनी जगह पर बिल्कुल सटीक है तथा इनमे कही से भी कोई बनावटीपन नज़र नही आता | नबील कुरैशी ने इस फिल्म का निर्देशन किया है और इस फिल्म को देख कर ऐसा लगता है कि इन्हें बॉलीवुड की फिल्मो में भी निर्देशक के तौर पर हाथ आजमाना चाहिए |

फिल्म की सबसे बड़ी खासियत है इस फिल्म की कहानी | कहानी में कही कोई झोल नही, फालतू ड्रामा नहीं | प्योर कोर्ट ड्रामा होने के बावजूद फिल्म किसी रेपिस्ट, मर्डरर, करप्ट मंत्री या भष्ट पुलिस ऑफिसर की कहानी नहीं कहती बल्कि पैरवी करती है आम आदमी के हक़ के लिए और यही बात फिल्म को मस्ट वाच बनाती है |

1 घंटा 55 मिनट 12 सेकण्ड की ये फिल्म आपको पलक झपकने तक का मौका नही देती | फिल्म देखने पर आपकी अंतरात्मा भी महसूस करेगी कि यह समस्या तो आपके अपने देश की है या यू कहो दुनिया के हर देश की है और इस समस्या से निपटने के लिए एक शान की सबको जरूरत है |

फिल्म में 4 गीत हैं, जिनमे से आतिफ असलम का तेरी यादें और राहत फ़तेह अली खान का गाया गीत खुदाया कर्णप्रिय है | फिल्म में संगीत शानी अरशद ने दिया है |

अफ़सोस बस इस बात का है कि भारत में इस तरह की बेहतरीन फिल्मो को एंट्री नही मिल पाती जबकि यहाँ की फिल्मे पाकिस्तान में खूब पैसा कमाती है |

 

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सुमित नैथानी

सुमित नैथानी

सुमित नैथानी पेशे से ब्लॉगर व लेखक हैं। कई क्षेत्रीय पत्र पत्रिकाओं के लिए लेखन के साथ जागरण जंक्शन (दैनिक जागरण का ब्लॉग ) पर भी लगातार लिखते रहे हैं।

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