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Sanjay Dutt: 'नायक से खलनायक' या 'खलनायक से नायक बनने' की दास्तान

बॉलीवुड का एक नायक जिसके जीवन में कभी चढ़ाव तो कभी उतार, कभी महंगे होटलों में ठहरा तो कभी जेल की काल कोठरी में, कभी महंगी घड़ियों और ड्रग्स का शौक तो कभी हथकड़ियों और एके 47 का। जी हां! आपने सही पहचाना। खुलासा डॉट इन में आज हम संजय दत्त के जीवन से जुड़े अनछुए पहलुओं से अपने पाठकों को अवगत कराएंगे।

बॉलीवुड की मशहूर अदाकार नरगिस, जिन्हें हम मदर इंडिया के नाम से भी जानते हैं, जी हां वही नरगिस जिन्होंने मदर इंडिया फिल्म में अपने बेटे बिरजू को गलत काम करने की एवज में गोली मार दी थी, लेकिन ये फिल्म की बात है असल जिंदगी फिल्मों से काफी जुदा होती है। नरगिस और सुनीलदत्त के घर 29 जुलाई 1959 को संजय दत्त ने जन्म लिया। नरगिस को कहां पता था कि बचपन में मासूम और शर्मीला सा दिखने वाले संजय दत्त का जीवन वक्त के साथ साथ कैसे कैसे उतार चढ़ावों से गुजरेगा और उसे नायक से खलनायक और खलनायक से नायक बना देगा।

संजय दत्त की वजह से नरगिस ने छोड़ा फिल्मी करियर

Sanjay Dutt: 'नायक से खलनायक' या 'खलनायक से नायक बनने' की दास्तान

संजय दत्त की मां नरगिस दत्त

बताया जाता है कि संजयदत्त् बचपन में बहुत शर्मीले थे, फ़िल्म्स डिवीजन की डॉक्युमेंट्री के एक दृश्य में संजू की माँ नरगिस को इन्हें तैयार कर रही होती है, कैमरा देख वो खुद को माँ के दामन में छुपा लेते हैं। मगर बाद में इसी शर्मीले संजू ने कैमरों की दुनिया को चुना। एक रेडियो में दिए इंटरव्यू में नरगिस ने इस बात का ज़िक्र भी किया था कि जब मैं शूटिंग के लिए कहीं जाती थी तो संजय रोने लगता था और वो संजय के बारे में भी स्टूडियो में सोचती रहती थी अत: उन्होंने फ़िल्म इंडस्ट्री को हमेशा के लिए छोड़ दिया।

कैसे बिगड़ने लगा संजु

अचानक ऐसा क्या हुआ कि मासूम और शर्मीला सा संजयदत्त वक्त के साथ इतना बदल गया। सुनील दत्त ने अपने एक इंटरव्यू में बताया कि एक बार वे और संजयदत्त किसी काम से कश्मीर गए हुए थे। वहां उन्होंने मजाक मजाक में संजु के हाथ में जलती सिगरेट पकड़ा दी और दस वर्ष के संजु वो पूरी सिगरेट पी गए। सुनीत दत्त् को यह देखकर बहुत हैरानी हुई।

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संजय दत्त मां नरगिस और पिता सुनील दत्त के साथ

सुनील दत्त से मिलने उनके घर पर आए दिन प्रोड्यूसर्स या दोस्तों आना-जाना लगा रहता था, ऐसे में आये हुए मेहमानों के फेके हुए सिगरेट के टुकड़ों को उठाकर संजू सब की नज़र से बचकर पीता था | संजू के बिगड़ने की शूरुआत उनके माता-पिता को भी दिखने लगी थी इसीलिए संजू को मुंबई के कैथेड्रल स्कूल से निकाल कर हिमाचल प्रदेश के मशहूर बोर्डिंग स्कूल 'सेंट लॉरेंस' में दाखिला दिलवा दिया गया।

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संजय दत्त् अपनी मां नरगिस दत्त के साथ

ऐसा ही एक वाकया और बताया जाता है । दरअसल 1971 के युद्ध के बाद भारतीय कलाकारों को बांग्लादेश में परफॉर्म करने जाना था, ऐसे में संजू ने जिद्द पकड ली कि वो भी जायेंगे । जब सुनील ने पूछा तुम वहां क्या करोगे तो संजू का जवाब था वो बोंगो बजायेंगे । संजू को बोंगों बजाना बेहद पसंद है, हालाँकि उनकी बहन के अनुसार संजू को बस एक ही धुन में बोंगों बजाना आता था। खैर संजू को साथ ले जाया गया । लता मंगेशकर स्टेज पर गाना गा रही थीं, तभी अचानक उन्हें रुकना पड़ा क्योंकि कोई बोंगो ग़लत बज रहा था। लता ने पलटकर देखा और फिर नज़रअंदाज़ करते हुए उन्होंने एक बार फिर गाना शुरू कर दिया ।

कैसे हुई ड्रग्स लेने की शुरुआत

1977 में संजय स्कूली शिक्षा पूर्ण कर वापस लौटे और उन्होंने मुंबई के एल्फिंस्टन कॉलेज में दाखिला लिया। यहीं से ड्रग्स और संजू की दोस्ती की दास्तान शुरू होती है । संजू खुद को कमरों में कैद रखने लगा। उसके ऐसे बर्ताव ने नरगिस के मन में संदेह का बीज बो दिया था कि कही संजू ड्रग्स तो नहीं लेने लगा, परन्तु उन्होंने कभी भी अपने संदेह को सुनील के साथ नहीं बांटा ।

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संजय दत्त फिल्म रॉकी के पोस्टर में

1971 में आई 'रेशमा और शेरा' से संजय दत्त ने बतौर बाल कलाकार बॉलीवुड में एंट्री की। सुनील दत्त ने उनकी ट्रेनिंग तक करवाई और जब वो निखर गए तो वो हम सबके सामने 'रॉकी' बन नज़र आये। 'रॉकी' की शूटिंग के दौरान ही इसी बात का भी पता चला कि नरगिस को कैंसर है। सुनील उन्हें इलाज के लिए अमरीका तक ले गए थे। दो महीने कोमा की गिरफ्त में रहने के बाद जब उन्होंने आँखें खोली तो उनका पहला सवाल अपने बेटे से जुड़ा हुआ था, उन्होंने पूछा था कि संजय कहाँ है? कुछ दिनों में उनकी तबियत में सुधार दिखने लगा तो वो वापस भारत आ गये। संजय की पहली फिल्म के प्रीमियर की तैयारी चल रही थी कि अचानक नरगिस की तबीयत फिर बिगड़ने लगी थी। जहाँ संजू की पहली फिल्म 7 मई 1981 को रिलीज होनी थी, वहीँ मात्र 4 दिन पहले यानी कि 3 मई 1981 को नरगिस ने दुनिया को अलविदा कह दिया। हालाँकि संजय दत्त ने एक इंटरव्यू में बताया था कि माँ की मौत के बाद वे बिल्कुल नहीं रोए थे।

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संजय दत्त का फैमिली फोटो

मां के बाद ड्रग्स का लिया सहारा

माँ की मौत के बाद संजू ड्रग्स और टीना मुनीम के बेहद नजदीक आ गये थे। उन्होंने कई जगह पर इस बात को स्वीकारा है कि वो ड्रग्स एडिक्ट थे और उन्होंने लगभग हर तरह के ड्रग्स को चखा था। संजय ने एक टीवी में बताया कि एक बार की वो सुबह उठे और उन्होंने नौकर से खाना लाने के लिए कहा। यह बात सुन नौकर रोने लगा, जब कारण पूछा तो पता चला कि मैं दो दिन बाद उठा हूँ। इस बात ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया अत; मैंने पिता से मदद मांगी और उन्होंने मुझे मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती करवा दिया |

संजु ने की ऋचा शर्मा से शादी

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संजय दत्त और उनकी पहली पत्नी रिचा शर्मा

एक वक़्त ऐसा भी आया जब संजू ने इंडस्ट्री छोड़ अमरीका जा बिजनेस करने का मन बना लिया था,परन्तु होनी को कुछ और ही मंजूर था। इसी दौरान पप्पू वर्मा ने 'जान की बाज़ी' के लिए संजय दत्त को साइन कर लिया, जिसके चलते उनका अमरीका जाना टल गया। जाने कितनी लड़कियों को अपने जीवन से रफा दफा करने के बाद उन्होंने ऋचा शर्मा से शादी कर ली। शादी के एक साल बाद इनके जीवन में पुत्री त्रिशला का आगमन हुआ। मगर इसी दौरान एक बात और पता चली कि ऋचा को ब्रेन ट्यूमर है | अत: ऋचा और त्रिशला इलाज के लिए अमरीका शिफ्ट हो गईं।

साजन ने मचाई धूम

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संजय दत्त साजन फिल्म में

महेश भट्ट की फिल्म 'नाम' की कामयाबी के बाद संजू के जीवन में फ्लॉप फिल्मों की कतार लग गयी। इसके बाद 1991 में आई फ़िल्म 'साजन' ने ऐसे धूम मचाई की आज तक संजू को इस फिल्म के लिए जाना जाता है। मगर धीरे धीरे संजू ऋचा से दूर और माधुरी के करीब होने लगे।

नायक कैसे बन गया खलनायक

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जेल से जमानत पर बाहर आते संजय दत्त्

1993 में संजय 'आतिश' की शूटिंग के लिए मॉरीशस गए हुए थे और इसी दौरान भारत में 1993 में हुए बम धमाकों की जांच चल रही थी। समीर हिंगोरा और हनीफ कड़ावाला ने पुलिस को बताया कि संजय के पास एके-56 राइफल थी। संजय जब मुंबई लौटे तो उन्हें आतंकवाद निरोधक क़ानून 'टाडा' के तहत गिरफ्तार कर लिया गया। फिरोज ख़ान की फ़िल्म यलगार की शूटिंग के दौरान दुबई में उनकी मुलाकात दाऊद और अनीस से हुई थी और अबु सलेम, हनीफ और समीर से तीन एके-56 उन्हें दी थी, हालाँकि दो एके-56 बाद में उन्होंने लौटा दी थी।

संजू ने की रिया पिल्लई से शादी

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संजय दत्त और रिया पिल्लई

एक साल तक ज़मानत पर रहने के बाद जुलाई 1994 में संजय को 'अंडा सेल' भेजा गया, जहाँ   सबसे खूंखार अपराधियों को रखा जाता है। जेल जाने के 15 महीने बाद संजय को राहत मिली और अक्टूबर 1995 वो जेल से बाहर आ गए। परन्तु जेल से बाहर आने के दो महीने बाद ही ऋचा शर्मा ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। अब संजू की नजदीकियां रिया पिल्लई से बढ़ने लगीं और दोनों ने शादी कर ली। वर्ष 1999 में आई उनकी फ़िल्म 'वास्तव' हिट रही और उन्हें बेस्ट एक्टर का फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड भी मिला, मगर साल 2000 में उनकी और छोटा शकील की बातचीत का एक वीडियो सामने आया।

रिया पिल्लई को छोड़ की मान्यता से शादी

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संजय दत्त और मान्यता

साल 2003 में संजय दत्त को एक ऐसी फ़िल्म मिली, जिसने उनकी छवि पर शानदार रोगन का काम किया। फिल्म का नाम था 'मुन्नाभाई एबीबीएस'। इस फिल्म में पिता-पुत्र की जोड़ी साथ नज़र आई। फ़िल्म सुपरहिट साबित हुई। परन्तु इस फिल्म की रिलीज के दो साल बाद सुनील दत्त ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। तो दूसरी तरफ संजय ने रिया को छोड़ 2008 में  मान्यता यानी कि दिलनवाज़ शेख से शादी कर ली। जी हां, वही दिलनवाज़ शेख जिन्होंने प्रकाश झा की फ़िल्म गंगाजल में 'अल्हड़ मस्त जवानी' आइटम सॉन्ग में डांस कर खूब चर्चा बटोरी थी। पर इस शादी से बहनें प्रिया व नम्रता और जीजा कुमार गौरव बिलकुल खुश नहीं थे। वर्ष 2010 में मान्यता के घर में जुड़वाँ ख़ुशी आई, उन्होंने जुड़वा बच्चों इकरा और शाहरान को जन्म दिया।

2007 में टाडा कोर्ट का फैसला आया कि संजय आतंकवादी नहीं हैं लेकिन उन्हें छह साल की सज़ा सुनाई गई, परन्तु संजय जेल से जल्द ही ज़मानत पर बाहर आ गये।

संजय ने अब तक लगभग 130 से ज़्यादा फ़िल्मों में काम करते हुए समाजवादी पार्टी के हो राजनीति में भी उतरे। एक विशेष बात और कि संजय दत्त की कारों का नंबर हमेशा 4545 होता है ।

 

 

 

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सुमित नैथानी

सुमित नैथानी

सुमित नैथानी पेशे से ब्लॉगर व लेखक हैं। कई क्षेत्रीय पत्र पत्रिकाओं के लिए लेखन के साथ जागरण जंक्शन (दैनिक जागरण का ब्लॉग ) पर भी लगातार लिखते रहे हैं।

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