शेफ : वेलकम बेक सैफ


जिस तरफ से एक के बाद एक कॉपीएड फिल्मे आ रही है, उससे तो ऐसा प्रतीत होता है कि बॉलीवुड में कहानियों का आकाल पड़ता जा रहा है | जहाँ पिछले हफ्ते जुड़वाँ 2 पुरानी जुड़वाँ की नक़ल थी तो इस हफ्ते हॉलीवुड फिल्म शेफ का हिंदी रुपान्तरण लेकर दर्शको के बीच राजा कृष्णा मेनन आ रहे है | फिल्म कॉपी में करने के कोई बुराई नही यदि उसे अच्छे तरीके से पेश किया जाये और इस बार राजा कृष्णा मेनन बाज़ी मार ले जाते है | फिल्म मूल कहानी से बेहतर तो है ही, साथ में सैफ अली खान ने अपनी बेहतरीन अदाकारी से फिल्म में मानो जान फूक दी हो | 2 घंटा 13 मिनट का बेहतरीन सफ़र, यक़ीनन सैफ की कमबैक मूवी है |

हॉलिवुड निर्देशक जॉन फैवरो की फिल्म शेफ से प्रेरणा लेते हुए राजा कृष्णा मेनन ने भारतीय सिनेमा को एक ऐसी बेहतरीन फिल्म दी है जो इमोशन से भरी हुयी है और हर वर्ग के दर्शक के दिल को छूती है | फिल्म की कहानी रोशन की है जो एक थ्री-स्टार मिशलिन शेफ होता है, मगर किसी विवाद के चलते उसे नौकरी से निकाल दिया जाता है | रोशन अपने बेटे अरमान और पत्नी राधा मेनन (पद्म प्रिया) के साथ कोच्चि आ जाते हैं और यही अपने परिवार के साथ कुछ वक़्त बिताना चाहता है |रोशन का अपनी पत्नी से भी विवाद है जिस कारण वो रोशन से अलग रहती है | मगर कोच्ची से शुरुवात होती है एक ऐसे सफ़र की जिसमे रोशन अपनी बिखरी हुई फैमिली को समेटने के साथ साथ अपने करियर पर भी ध्यान देता है और आख़िरकार वो अपनी मंजिल पा ही लेता है |

फिल्म की खासियत है इसमें दिखाये गए पिता-पुत्र के सम्बन्ध, राजा कृष्णा मेनन ने एक एक दृश्य को बड़ी बारिकी से निर्देशित किया है और पूरी ईमानदारी के साथ सैफ अली खान, पद्मप्रिया जानकिरमन, स्वर कांबले, चंदन रॉय सान्याल और शोभिता धुलिपाला ने उनका साथ दिया है | कही कही पर फिल्म अपनी रफ़्तार खो देती है मगर निर्देशक फिल्म को बोझल होने से पहले सम्भाल लेते है | फिल्म का गीत संगीत कुछ खास नही है मगर फिल्म के डायलॉग और पंच आपको एक लम्बे समय तक याद रहने वाले है |


सुमित नैथानी

सुमित नैथानी

सुमित नैथानी पेशे से ब्लॉगर व लेखक हैं। कई क्षेत्रीय पत्र पत्रिकाओं के लिए लेखन के साथ जागरण जंक्शन (दैनिक जागरण का ब्लॉग ) पर भी लगातार लिखते रहे हैं।

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