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वोदका डायरीज : बेहतरीन कलाकारों की कमजोर प्रस्तुति

जब फिल्म में के.के. मेनन, मंदिरा बेदी और रायमा सेन जैसे बेहतरीन कलाकार हो तो फिल्म से उम्मीद बढ़ जाती है, ऐसे में वोदका डायरीज आपकी उम्मीद को चकनाचूर करती है | हालाँकि कमी कलाकारों के अभिनय में नहीं है, बल्कि कहानी कहने के अंदाज़ में है | आपने ऐसी बहुत सारी फिल्मे देखी होंगी, जिसमे प्रेजेंट और पास्ट यानी कि वर्तमान और भूतकाल की कहानी एक साथ चलती है और फिल्म बार बार फ़्लैशबैक में चली जाती है | इस फिल्म में भी वही फार्मूला अपनाया गया है |

एक ही रात में मनाली के वोदका डायरीज क्लब में एक के बाद एक कई कत्ल हो जाते हैं | एसीपी अश्विनी दीक्षित (के.के. मेनन) को इस केस की जिम्मेदारी सौपी जाती हैं । केस की वजह से अश्विनी की पत्नी शिखा ( मंदिरा बेदी) भी गायब हो जाती हैं। इसी दौरान अश्विनी रोशनी बनर्जी ( राइमा सेन) से मिलता हैं और उस पर शक करने लगता है | मगर वो गुत्थी को सुलझाने के बजाय खुद उस में उलझ जाता है | हालाँकि फिल्म का अंत बेहतरीन और ऐसा है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

के.के. मेनन ने हमेशा की तरह लाजवाब काम किया है और एसीपी के रोल में फबते हैं। मंदिरा बेदी फिल्म में जगह जगह पर ओवर ऐक्टिंग का शिकार होती हुयी नजर आती हैं। राइमा सेन ने बेहतरीन ऐक्टिंग की है। फिल्म की कहानी में इतना दम जरुर है कि ये आपको शुरू से आखिर तक बांधे रखती है। ऐड फिल्म मेकिंग से फिल्म निर्देशन में आए इस फिल्म के निर्देशक कुशल श्रीवास्तव ने अच्छी कोशिश की है। थ्रिलर फिल्में पसंद करने वालो के लिए यह एक अच्छी फिल्म हैं | फिल्म में मनाली की खूबसूरत लोकेशन्स को बेहतर तरीके से फिल्माया गया है |

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Title: film review vodka diaries weak presentation of best performers | In Category: फिल्म समीक्षा  ( movie_review )

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