फिल्म समीक्षा मनोरंजन

फुकरे रिटर्न्स : पहले के मुकाबले में कुछ कम

2017 में एक के बाद एक मल्टीस्टारर या बड़े स्टार वाली फिल्मे फ्लॉप साबित हुयी है तो दूसरी तरफ गोलमाल अगेन जैसी नॉन-सेन्स मूवी ने सफलता के झंडे गाड़े है और अब कॉमेडी का फ्लेवर लिए ‘फुकरे रिटर्न्स' ने भी पहले दिन ही 8.10 करोड़ रुपए कमा कर धमाकेदार शुरुआत की है, मगर फुकरे के मुकाबले फुकरे रिटर्न्स एक कमजोर फिल्म है |

फिल्म की शुरुवात वही से होती है जहाँ पहले पार्ट का अंत होता है | कहानी पहले पार्ट से एक साल आगे की कहानी है | हनी, चूचा, लाली और जफ़र की दोस्ती आज भी बरकरार है | भोली पंजाबन जेल से बाहर आ चुकी है और उसे तलाश है इन चार फुकरो की | भोली इन चारो को तलाश लेती है और अपने नुकसान की भरपाई करने की बात कहते है | इस बार चूचा ने दिल्ली के दिल में गढ़े खजाने को देखा है, जिसके बाद भोली पंजाबन का पैसा चुकाने के लिए इसकी तलाश शुरू होती है | फिल्म कई जगह पर पहले पार्ट जैसी ही परिस्थितियां आपके सामने लाती है, मगर पहले पार्ट के मुकाबले लुभा नही होती है जिसके चलते 2 घंटे 15 मिनट की यह फिल्म सेकंड हाफ में बोर करती है |

मृगदीप सिंह लाम्बा का निर्देशन अच्छा है, मगर यह और अच्छा हो सकता था | एक्टिंग के मामले में अली फज़ल, रिचा चड्डा, पुलकित सम्राट, मनजोत सिंह और पंकज त्रिपाठी का काम अच्छा है | फिल्म का संगीत कुछ खास नहीं है | फिल्म अगर कुछ याद रखने वाली चीज़ है तो वो है फिल्म के वन लाइनर पंच, जो हँसाते है |

एक तरफ क्रिटिक्स ने इस फिल्म को नकारते हुए कम रेटिंग दी है तो दूसरी तरफ दर्शको ने मात्र मनोरंजन के नाम पर इस फिल्म को गले लगाते हुए एक अच्छी ओपनिंग दी है |

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Title: fukre returns less than before
सुमित नैथानी

सुमित नैथानी

सुमित नैथानी पेशे से ब्लॉगर व लेखक हैं। कई क्षेत्रीय पत्र पत्रिकाओं के लिए लेखन के साथ जागरण जंक्शन (दैनिक जागरण का ब्लॉग ) पर भी लगातार लिखते रहे हैं।

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