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Mercury film review : अनोखा अंदाज़, मगर कमजोर कहानी 

आज से कई वर्षों पहले कमल हासन अभिनीत पुष्पक आई है, जिसने न सिर्फ बहुत अच्छी कमाई की थी बल्कि समीक्षकों द्वारा भी सराही गयी थी। इस फिल्म की खासियत यह थी कि इस फिल्म में न कोई संवाद था और न ही कोई गीत अर्थात यह फिल्म एक साइलेंट मूवी थी। ऐसा ही कमाल करने इस बार प्रभु देवा आये हैं फिल्म मरक्यूरी लेकर, जो कि एक साइलेंट थ्रिलर फिल्म है। जहाँ पुष्पक आज भी लोगों का मनोरंजन करती है, वहीँ मरक्यूरी कमजोर प्लाट और बेतुके क्लाइमेक्स के कारण यह फिल्म कमजोर पड़ जाती है।

फिल्म की कहानी मरक्यूरी पीड़ित क्षेत्र से शुरू होती है, जहाँ मरक्यूरी के कारण कई मौत हुयी है, तो दूसरी तरफ इसी इलाके में 5 गूंगे दोस्त अपने साथी का जन्मदिन मनाने के इरादा से एक एक बंगले में प्रवेश करते है। सब कुछ सही चल रहा होता है कि तभी इन दोस्तों की मुलाकात प्रभुदेवा की लाश से होती है, इसके बाद जो होता है वो कहीं कही पर तो आपको डर महसूस कराता है। फिल्म का फर्स्ट हाफ आपको डराने और रोमांच पैदा करने में सफल हो जाता है, परन्तु सेकंड हाफ अंत तक पहुंचते पहुँचते डराने के बजाये आपको बाल नोचने पर मजबूर कर देगा।

फिल्म में सबसे कमजोर प्रभु देवा का ही किरदार है, जो न तो डराने में सफल हो पाता है और न ही तार्किक लगता है। हालाँकि फिल्म में सनथ रेड्डी और इंदुजा का किरदार काबिलेतारीफ है, जिसे निभाने में वो पूरी तरह से सफल हुए है। बहराल फिल्म में कुछ ऐसा नहीं है जिसके बारे में बात की जाए।

वीडियो में देखें फिल्म का रिव्यू

 

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Title: mercury film review in hindi anokha anandas but the doodle story

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