फिल्म समीक्षा

लखनऊ सेंट्रल : ख्वाबों का जैसे टूट जाना

बॉलीवुड के ऐसे कलाकारों में से एक फरहान अख्तर है जो हमेशा कुछ अलग करने में विश्वास रखते है और इस बार वो अकेले नही आये है अपने साथ वो इनामुल हक, डायना पेंटी, दीपक डोबरियाल, गिप्पी ग्रेवाल, राजेश शर्मा, रॉनित रॉय, मनोज तिवारी और रवि किशन जैसे बड़े स्टारों के साथ आये है | फिल्म एक सत्य घटना से प्रेरित है | फिल्म आपका पूरा मनोरंजन कर रही होती है कि अचानक से फिल्म डगमगा सी जाती है और ऐसा प्रतीत होता है कि फिल्म नये अंदाज़ दिखाने के बाद पुराने बॉलीवुड तरीको में ढलने लगी हो |

कहानी है किशन मोहन गिरहोत्रा (फरहान अख्तर) की जो मुरादाबाद (यूपी) का रहना वाला है और मनोज तिवारी का बहुत बड़ा फैन है | वो भी गाने गाता है और अपना एक बैंड बनाना चाहता है |

समय करवट बदलता है और इसी के साथ किशन एक मर्डर के केस में फँस जाता है | सलाखों के पीछे रहते हुए भी वो अपने सपनो को टूटने नही देता बल्कि जैसे ही उसे मौका मिलता है वो अपने ख्वाबों को उडान देने लगता है | जेल में उसकी मुलाकात परमिंदर सिंह त्रेहान (गिप्पी ग्रेवाल), विक्टर चटोपाध्याय (दीपक डोबरियाल), पुरूषोत्तम मदन पंडिय (राजेश शर्मा) और दिक्कत अंसारी (इनामुल्ला हक) से होती है, जिनके मिलकर किशन 15 अगस्त को परफॉर्मेंस देने के लिए एक बैंड तैयार करता है | मगर इस बैंड के पीछे किशन का प्लान कुछ और होता है | मगर किशन के हर प्लान के आगे जेलर (रोनित रॉय) अपनी टांग अड़ा देता है | ऐसे में क्या किशन अपने प्लान में कामयाब हो पता है, आखिर प्लान क्या है? यही फिल्म का क्लाइमैक्स है |

फरहान अख्तर ने एक बार फिर अपनी अदाकारी से प्रभावित किया है और इसमें कोई संदेह नही है | दिल को छू लेने वाले संवाद फरहान की आवाज़ में प्रभावित करते है | फरहान के बाद रोनित रॉय अपने किरदार से प्रभावित करते है | अन्य कलाकारों में डायना पेंटी, गिप्पी ग्रेवाल, दीपक डोबरियाल, राजेश शर्मा, इनामुल्हक और  उदय टिकेकर भी अपने किरदार के साथ पूरा इन्साफ करते है | रवि किशन फिल्म में हास्य करते हुए अच्छे लगते है |

इंटरवल तक तो फिल्म बेहतरीन है, मगर सेकेंड हाफ में फिल्म ड्रैग करती है और क्लाइमेक्स तक सब कुछ खत्म सा लगने लगता है | सेकंड हाफ फिल्म के कलाकारों से नही बल्कि निर्देशक से थोड़ी सी और मेहनत मांगता है | अभी कुछ दिनों पहले ही यशराज फिल्म्स की कैदी बैंड भी इसी प्लाट से मैच करती हुयी है मगर दोनों फिल्मो की कहानी में ज़मीन आसमान का अंतर है |

 

 

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Title: lucknow central breakdown like scandals in Hindi  | In Category: फिल्म समीक्षा movie_review
सुमित नैथानी

सुमित नैथानी

सुमित नैथानी पेशे से ब्लॉगर व लेखक हैं। कई क्षेत्रीय पत्र पत्रिकाओं के लिए लेखन के साथ जागरण जंक्शन (दैनिक जागरण का ब्लॉग ) पर भी लगातार लिखते रहे हैं।

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