पटेल की पंजाबी शादी : फीकी फीकी सी जलेबी


जिस फिल्म में ऋषि कपूर, परेश रावल और प्रेम चोपड़ा जैसे बेहतरीन कलाकार हो और संजय छैल का निर्देशन हो तो फिल्म से उम्मीदें अधिक होने लगती है, मगर पटेल की पंजाबी शादी आपकी उम्मीदों पर पानी फेरने में कोई कसर नही छोडती | फिल्म का पूरा नाम है ‘पटेल की पंजाबी शादी:लड़ो मगर प्यार से’, जिसे पढ़कर लगता है इस फिल्म में हास्य के साथ हल्की फुल्की नोकझोक होगी, मगर फिल्म में एक आध दृश्य को छोड़कर कुछ भी प्रभावित नही करता |

मुंबई की एक गुजराती सोसायटी में हंसमुख पटेल (परेश रावल) अपने परिवार के साथ रहता है | उसके परिवार में मां, बड़ी बेटी और छोटी बेटी पूजा पटेल (पायल घोष) है | बिन माँ की बच्चियों की परवरिश   हंसमुख कई नियमों और कानूनों में बांधकर करता है | हद्द तो तब हो जाती है जब हसमुख सोसायटी के लोगो को भी गुजराती संस्कृति की रक्षा के लिए उकसाने लगता है | कहानी में सब तब बदल जाता है जब सेकंड हैंड कारों का डीलर गुग्गी टंडन (ऋषि कपूर) हंसमुख का पडोसी बन जाता है | गुग्गी का भी एक परिवार है जिसमे पत्नी, पिता प्रेम टंडन (प्रेम चोपड़ा) और बेटा मोंटी (वीर दास) शामिल है | हंसमुख अपने बेटी को नये पड़ोसियों से दूर रहने की सलाह देता है | मगर वही पुराणी बॉलीवुड कहानी मोंटी और पूजा को पहली नजर में एक दूसरे से प्यार हो जाता है | फिर वही ट्विस्ट और टर्न, क्या पूजा और मोंटी की शादी हो पायेगी ऐसा पूछना भी बेकार है क्योंकि इस कहानी का अंत हम सब जानते है |

फिल्म की कास्टिंग बहुत बढ़िया होने के बावजूद कमजोर स्क्रिप्ट फिल्म को ले डूबती है | गुजराती और पंजाबी परिवारों के बीच का हल्का फुल्का झगडा बेहतर हो सकता था  मगर कमजोर स्क्रीनप्ले सब बर्बाद कर देता है | फिल्म का संगीत भी कुछ खास नही है |

पूरी फिल्म में अगर किसी की अदायगी छायी रहती है तो वो ऋषि कपूर है | चूँकि ऋषि कपूर खुद भी पंजाबी हैं तो ऐसे में वो गुग्गी के किरदार को चमका देते है | परेश रावल भी अपने गुजराती किरदार के साथ इन्साफ करते है | कई जगह पर फिल्म में ऋषि और परेश रावल के डायलॉग्स मजेदार है | बहुत दिनों प्रेम चोपड़ा बड़े परदे पर अच्छे लगते है और उनका अभिनय अभी भी प्रभावित करता है | शादी के कांसेप्ट पर भी ये फिल्म इतनी खूबियाँ होने के बाद उस जलेबी की तरह है जो फीकी सी लगे |


सुमित नैथानी

सुमित नैथानी

सुमित नैथानी पेशे से ब्लॉगर व लेखक हैं। कई क्षेत्रीय पत्र पत्रिकाओं के लिए लेखन के साथ जागरण जंक्शन (दैनिक जागरण का ब्लॉग ) पर भी लगातार लिखते रहे हैं।

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