सिमरन : कॉमेडी या क्राइम ड्रामा


शाहिद, दस कहानियां और सिटीलाइट्स जैसी बेहतरीन फिल्म के निर्देशक हंसल मेहता इस बार जो फिल्म लेकर दर्शको के सामने आये है, वो बेहद ही कमजोर और थकी हुयी है, फिल्म का नाम है सिमरन | फिल्म में बस एक ही खासियत है कि फिल्म का निर्देशक और फिल्म की नायिका सिमरन (कंगना रनौत) दोनों ही नेशनल अवार्ड विनर है, इसके अलावा फिल्म में ऐसा कुछ नही है जो दर्शको को आकर्षित कर सके | फिल्म को प्रमोट करने के लिए कंगना ने कई पब्लिक स्टंट भी किये जैसे आपकी अदालत में आकर हृतिक रोशन पर इल्ज़ाम लगाये | मगर इस बार कंगना फ़ैल हो गयी |

जब मैंने इस फिल्म का ट्रेलर देखा था, तभी मेरे दिमाग में फिल्म की असफलता साफ़ झलकने लगी थी, जिसका प्रमुख कारण बार बार कंगना का एक जैसी भूमिका करना है | कंगना अच्छी कलाकार है इसमें कोई शक नही है, मगर जो वो एक बार दर्शको के सामने पेश कर चुकी है कंगना को उससे हटकर कुछ करने की कोशिश करनी चाहिए | हंसल मेहता ने अभी तक कम ही फिल्मो का निर्देशन किया है मगर सभी अच्छी फिल्मे कही जा सकती है, परन्तु सिमरन को देख उनके निर्देशन पर शक करने का मन होता है | क्या ये वही हंसल है जिन्होंने शाहिद जैसी ऑफबीट फिल्म बनायीं है ? साथ में हंसल मेहता फिल्म को कॉमेडी बनाना चाहते थे या क्राइम ड्रामा, यही दुविधा फिल्म को ले डूबती है |

फिल्म की कहानी मुख्यता एक पटेल परिवार जो कि अमेरिका में रहता है, की तलाकशुदा लड़की प्रफुल्ल पटेल (कंगना रनौत) की है, जो अपनी फैमिली के साथ रहती है। अपने परिवार के साथ तालमेल न बैठाने वाली प्रफुल्ल एक होटल में हाउस कीपिंग का काम करती है। परिवार वाले उसकी दोबारा शादी के लिए रिश्ते ढूंढते हैं, लेकिन बात नहीं बन पाती । इसी दौरान प्रफुल्ल अपनी फ्रेंड की शादी को अटेंड करने के लिए लॉस वेगास जाती है और वहां एक होटल में जुआ खेलते हुए अपना सारा पैसा हार जाती है। होटल वालों से उधार में पैसे लेकर प्रफुल्ल फिर से जुआ खेलती है और इन्हें भी हार में गवा देती है । कमाई सीमित होने के कारण कर्जा चुकाने के लिए प्रफुल्ल चोरी-चकारी, बैंक लूटने जैसे काम करने लगती है। इसी बीच प्रफुल्ल के नायक की एंट्री होती है । क्या प्रफुल्ल को सच्चा प्यार मिलता है? क्या वो अपनी उधारी चुका पाती? यही फिल्म का क्लाइमेक्स है |

कंगना की अदाकारी को छोड़कर फिल्म में कुछ भी ऐसा नही है जो तारीफ-ए-काबिल हो | फिल्म का गीत-संगीत भी बस काम चलाऊ है | 2 घंटे 5 मिनट की इस फिल्म के लिए पैसे बर्बाद करने से बेहतर है इसका टीवी पर आने का इंतजार करे |


सुमित नैथानी

सुमित नैथानी

सुमित नैथानी पेशे से ब्लॉगर व लेखक हैं। कई क्षेत्रीय पत्र पत्रिकाओं के लिए लेखन के साथ जागरण जंक्शन (दैनिक जागरण का ब्लॉग ) पर भी लगातार लिखते रहे हैं।

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