टाइगर जिन्दा है : एक बार फिर सिर्फ और सिर्फ सलमान


साल के अंत में सल्लू भाई की एक और फिल्म रिलीज हुई है, जिसका नाम टाइगर जिन्दा है | यश राज बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन अली अब्बास जफर ने किया है, जिन्होंने इससे पहले सलमान के साथ सुल्तान बनायीं थी | फिल्म में कहानी से ज्यादा सलमान पर ध्यान दिया गया है और दिया भी क्यों न जाये आखिर आज के समय में सल्लू भाई सफलता की गारंटी जो बने हुए है | अगर उनकी पिछली फिल्म ट्यूबलाइट को नज़रंदाज़ कर दिया जाए तो 2009 में आयी वांटेड के बाद उनकी सभी फिल्मो ने सफलता के झंडे गाड़े है | चाहे फिल्म में कहानी हो या न हो, दर्शको ने सलमान को देखने के लिए जेब ढीलीं की है | अत: यहाँ ये कहना गलत नहीं होगा किये फिल्म सिर्फ और सिर्फ सलमान उर्फ़ सल्लू भाई की है |

फिल्म की कहानी वही से शुरू होती है जहाँ कबीर खान निर्देशित एक था टाइगर खत्म होती है | इराक में 40 नर्से अर्थात 25 भारतीय और 15 पाकिस्तानी नर्स फंस गयी है, जिसके लिए RAW वालो को एक बार फिर अपने हीरो टाइगर की तलाश है, क्योंकि टाइगर ही वो इंसान है जो किसी भी मिशन को बेख़ौफ़ और अकेले ही अंजाम दे सकता है | टाइगर इराक जाता है और सभी लोगो को बचा कर ले आता | 2 लाइन की कहानी में कुछ भी ऐसा नहीं है, जिसे नया कहा जा सके | दूसरी तरफ अपनी आदत से मजबूर KRK उर्फ़ कमाल राशिद खान इस फिल्म का उट-पटांग रिव्यु डाल के जाने क्यों सलमान भाई से पंगे ले रहे है, जबकि फिल्म की पूरी कहानी एक ट्रेलर में ज़ाहिर हो जाती है |

बहुत दिनों बाद किसी फिल्म का फर्स्ट डे फर्स्ट शो पूरे देश में हाउसफुल हुआ है, तो इसे सलमान खान का दर्शको में क्रेज ही कहेंगे | इसमें कोई शक नहीं है कि फिल्म इस साल की ब्लॉकबस्टर साबित होगी | फिल्म का निर्देशन अच्छा है, जो और बेहतर हो सकता था | सिनेमेटोग्राफी और एक्शन  सीन्स बहुत अच्छे है | सलमान खान, कैटरीना कैफ, परेश रावल, गिरीश कर्नाड, अंगद बेदी और कुमुद मिश्रा ने अपनी अपनी भूमिका को सहजता के साथ किया है, जो लुभावना तो मगर फिल्म का सारा फोकस सल्लू भाई पर होने के कारण दर्शक भी किसी और के बारे में नहीं सोच पाते |

साल 2017 में यदि आप फालतू फिल्मे देखने में पैसे खर्च कर चुके है तो एक बार इस मसालेदार फिल्म को देखने में हर्ज नहीं है |


सुमित नैथानी

सुमित नैथानी

सुमित नैथानी पेशे से ब्लॉगर व लेखक हैं। कई क्षेत्रीय पत्र पत्रिकाओं के लिए लेखन के साथ जागरण जंक्शन (दैनिक जागरण का ब्लॉग ) पर भी लगातार लिखते रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *