नौवा खून माफ़ : जब हैरी मेट सेजल


जब वी मेट, लव आजकल और आहिस्ता आहिस्ता जैसी बेहतरीन फिल्मो के निर्देशक इम्तियाज़ अली एक बार फिर एक रोमांटिक मूवी लेकर आये हैं जिसका नाम है जब हैरी मेट सेजल | इम्तियाज़ अली की बतौर निर्देशक रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण स्टारर पिछली फिल्म तमाशा बॉक्स ऑफिस पर ओंधे मुहं गिर गयी थी, ऐसे में जब हैरी मेट सेजल क्या चमत्कार कर पाती है ये भी देखने लायक बात है | दूसरी तरफ शाहरुख खान की भी पिछली कुछ फिल्मो ने बॉलीवुड में कुछ खास कारोबार नही किया है और अनुष्का शर्मा फिल्मो से ज्यादा अपनी पर्सनल लव लाइफ के लिए ज्यादा फेमस है, तो ऐसे में जब हैरी मेट सेजल तीनो के कैरियर के लिए महतवपूर्ण है |

फिल्म की कहानी दो अजनबी हैरी और सेजल की है, सिंगर बनने का सपना लेकर पंजाब से कनाडा भागा हुआ हैरी यूरोप का टूरिस्ट गाइड कैसे बना, ये समझ से परे है या हो सकता है कि फिल्म देखते हुए मैंने 5 मिनट की झपकी ली हो | खैर सेजल की सगाई की अंगूठी खो गयी है जिसे ढूंढने में हैरी जो उसका टूरिस्ट गाइड है, मदद करता है | पहले झगडे और फिर प्यार की कहानी के साथ शुद्ध देशी एन्डिंग और दोनों शादी कर लेते है | फिल्म ज्यादा लम्बी नही है फिर भी शुरुवाती 10 मिनट के बाद ही आपको फिल्म बोझल लगने लगती है |

इम्तियाज़ अली ने अब तक नौ फिल्मे डायरेक्ट की है, जिनमे जब हैरी मेट सेजल नौवी फिल्म है | आहिस्ता आहिस्ता, जब वी मेट और लव आज कल को छोड़ दिया जाए तो इम्तियाज़ अपनी हर फिल्म को फालतू में खीचते हुए नज़र आते है, हालाकि इस बात की झलक इन तीन फिल्मो में भी साफ़ नज़र आती है, मगर डायरेक्टर यहाँ बच जाता है | इसी आदत के चलते रॉकस्टार इम्तियाज़ के कैरियर की मास्टरपीस बनते बनते रह गयी थी | उनकी फिल्मो की एक विशेषता यह भी है कि हर फिल्म में गिनती के 3-4 किरदार होते है और वो पूरी कहानी को इन्ही किरदार के इर्द-गिर्द घुमाते रहते है |

शाह रुख खान अब उम्रदराज़ हो चुके है उन्हें ये बात समझनी चाहिए | कुछ सीन में उनके चेहरे पर उनकी उम्र की झलक साफ़ नज़र आ जाती है | एक्टिंग की बात करे तो कुछ दृश्यों में तो मानो शाह रुख ने जान फूक दी हो, मगर कमजोर निर्देशन के चलते शाह रुख भी ज्यादा देर तक फिल्म को अपने कंधो पर ढो नही पाते | बात अनुष्का शर्मा की करे तो जब से उन्होंने अपने होंठो की सर्जरी करायी है, उनका चेहरा भद्दा हो गया है | गुजराती बोलते हुए अच्छी लगती है, मगर डायरेक्टर क्या सोच रहा है और क्या दिखाना चाहता है, इसका शिकार शाहरुख के साथ साथ अनुष्का भी हुई हैं |

फिल्म के 12 गीतों में से सफ़र, घर, जी वे सोनियां और हवायें के अलावा ऐसा कोई गीत नहीं है. जिसे हम ज्यादा दिन तक याद रख सके | प्रीतम का संगीत और इरशाद कामिल के गीत बेअसर से लगते है |

फिल्म में जो देखने लायक है वो है, यूरोप की खुबसूरत लोकेशन, प्राग, बुडापेस्ट और आखिर में पंजाब के खेत | मगर जितना खुबसूरत प्राग रॉकस्टार में नज़र आता है उतना यहाँ नही | कारण ये भी हो सकता है कि फिल्म की लोकेशन का फटाफट बदलते रहना |

महंगे टिकेट लेने के बाद निराश कर देने वाली फिल्म का खामियाजा इम्तियाज़ अली को भुगतना पड़ेगा | साथ ही साथ इम्तियाज़ को किसी अच्छे डायरेक्टर के असिस्टेंट के तौर पर अभी कुछ और साल काम करना चाहिए |

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सुमित नैथानी

सुमित नैथानी

सुमित नैथानी पेशे से ब्लॉगर व लेखक हैं। कई क्षेत्रीय पत्र पत्रिकाओं के लिए लेखन के साथ जागरण जंक्शन (दैनिक जागरण का ब्लॉग ) पर भी लगातार लिखते रहे हैं।

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