सत्य घटना पर आधारित है टॉयलेट एक प्रेम कथा


बद्रीनाथ की दुलानियाँ, हाफ गर्लफ्रेंड आदि कुछ ऐसे प्रेम कहानियाँ है, जो प्रेम के साथ साथ सामाजिक समस्याओ की बात भी करती है | मुझे याद है जब मैं हाफ गर्लफ्रेंड देखने गया था और लगभग 20 मिनट बाद ही मुझे नींद आने लगी थी, फिल्म कभी अमीर मगर अकेली लड़की की कहानी दिखाती है तो कभी चोट खाये आशिक की कहानी जो अपने गावं के स्कूल में लड़कियों के लिए टॉयलेट बनवाना चाहता है ताकि लड़कियां स्कूल में पढने के लिए आ सके और उन्हें भी साक्षरता का अधिकार मिले | मगर फिल्म इतनी बोझल थी कि न तो खुद बॉक्स ऑफिस पर टिक पायी और न ही अपने सन्देश को लोगो के बीच तक पंहुचा पायी | ऐसे में श्री नारायण सिंह लेकर आये है एक अनोखी लव स्टोरी, जिसका नाम है टॉयलेट एक प्रेम कथा | फिल्म के प्रीमियर के बाद से अक्षय कुमार को लगातार बधाई सन्देश आने शुरू हो गए है |

फिल्म की कहानी एक गावं में रहने वाले केशव की है जो पड़ोस के गाव की लड़की जया को पसंद करता है, दोनों प्रेम विवाह भी कर लेते है और असली कहानी शुरू होती है इस विवाह के बाद जब जया को पता चलता है कि केशव के घर पे संडाश यानि कि टॉयलेट नही है | फिल्म की कहानी 2012 में घटित सत्य घटना से प्रेरित है, जब घर में टॉयलेट न होने पर प्रियंका भारती नाम की महिला ने अपने पति के साथ जंग छेड़ दी थी | इस फिल्म को लिखा है गरिमा वहल और सिद्धार्थ सिंह ने |

मुख्य भूमिका में अक्षय कुमार, भूमि पेडनेकर, सना खान, अनुपम खेर, दिव्येंदु और सुधीर पाण्डेय है | चुकीं फिल्म एक satire मूवी है तो बात बात पर पंच लाइनों का होना भी लाज़मी है | एक्टिंग के मामले में सब अपनी अपनी जगह पर ठीक है और स्टोरी के साथ बैलेंस बनाकर चलते है | अक्षय कुमार की कॉमेडी टाइमिंग से हम सभी वाकिफ है, यहाँ भी वो मनोरंजन के साथ साथ हँसाने का काम बखूबी करते है, हालाकि कही कही पर वो लाउड हो जाते है, जो चलता है |

नए निर्देशक श्री नारायण सिंह ने अच्छा काम किया है मगर उन्हें फिल्म पर थोडा और काम करना चाहिए था | फिल्म का पहला हाफ बहुत ज़बरदस्त बन पड़ा है मगर सेकंड हाफ में कमियां नज़र आने लगती है | फिल्म सेकंड हाफ में पूरी तरह से मुद्दे से भटक जाती है | 2012 में घटित सत्य घटना निर्देशक की मेहरबानी से नरेंद्र मोदी जी के स्वच्छ भारत अभियान से तथा केंद्र सरकार की अन्य योजनाओ के गुणगान करने में व्यस्त हो जाती है, जैसा कि पिछली कई फिल्मो में देखने को मिला है | फिल्म में दृश्य जगह जगह पर खुद को दोहराते है |

फिल्म को सिर्फ और सिर्फ अक्षय कुमार की कॉमेडी के लिए देखा जा सकता है | फिल्म का सारा भार अक्षय कुमार, अनुपम खेर जैसे दिग्गजो के कंधो पर रखा है |


सुमित नैथानी

सुमित नैथानी

सुमित नैथानी पेशे से ब्लॉगर व लेखक हैं। कई क्षेत्रीय पत्र पत्रिकाओं के लिए लेखन के साथ जागरण जंक्शन (दैनिक जागरण का ब्लॉग ) पर भी लगातार लिखते रहे हैं।

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