मैं अपने इख़्तियार में हूँ भी नहीं भी हूँ-निदा फ़ाज़ली

मैं अपने इख़्तियार में हूँ भी नहीं भी हूँ दुनिया के कारोबार में हूँ भी नहीं भी हूँ. तेरी ही

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बात कम कीजे ज़ेहानत को छुपाए रहिए – निदा फ़ाज़ली

  बात कम कीजे ज़ेहानत को छुपाए रहिए अजनबी शहर है ये, दोस्त बनाए रहिए दुश्मनी लाख सही, ख़त्म न

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तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते- वसीम बरेलवी

  तुम्हारी राह में मिट्टी के घर नहीं आते इसीलिए तो तुम्हें हम नज़र नहीं आते मुहब्बतों के दिनों की

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कैफी आज़मी की नज़्म “मकान”

  आज की रात बहुत गर्म हवा चलती है आज की रात न फुटपाथ पे नींद आयेगी । सब उठो,

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वो कमरा बात करता था जावेद अख्तर की नज्म

मैं जब भी ज़िंदगी की चिलचिलाती धूप में तप कर मैं जब भी दूसरों के और अपने झूट से थक

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कैफ़ी आज़मी की गजल :  शोर परिंदों ने यु ही न मचाया होगा

शोर परिंदों ने यु ही न मचाया होगा कोई जंगल की तरफ़ शहर से आया होगा पेड़ के कांटने वालो

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कछुआ और केकड़ा की मित्रता (लघुकथा)

बहुत पुरानी बात है । एक नदी के किनारे रहने वाले  कछुए और केकड़े की दोस्ती हो गयी। दोनों घंटो-घंटो

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अब अपनी रूह के छालों का कुछ हिसाब करूँ –राहत इंदौरी

अब अपनी रूह के छालों का कुछ हिसाब करूँ मैं चाहता था चराग़ों को आफ़्ताब करूँ मुझे बुतों से इजाज़त

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सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद है-अदम गोंडवी

सौ में सत्तर आदमी फ़िलहाल जब नाशाद* है दिल पे रख के हाथ कहिए देश क्या आज़ाद है कोठियों से

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लोग हर मोड़ पर रुक – रुक के संभलते क्यों हैं: राहत इन्दौरी

लोग हर मोड़ पर रुक – रुक के संभलते क्यों है इतना डरते है तो फिर घर से निकलते क्यों

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कैफी आज़मी की प्रसिद्ध नज़्म: दूसरा वनवास

राम बन-बास से जब लौट के घर में आए याद जंगल बहुत आया जो नगर में आए रक़्स-ए-दीवानगी आँगन में

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रामधारी सिंह दिनकर की कविता: कृष्ण की चेतावनी

वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप-घाम, पानी-पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर। सौभाग्य न सब दिन

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इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है: दुष्यंत कुमार की गजल

इस नदी की धार में ठंडी हवा आती तो है नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है एक

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आँख की ये एक हसरत थी कि बस पूरी हुई- शहरयार

आँख की ये एक हसरत थी कि बस पूरी हुई आँसुओं में भीग जाने की हवस पूरी हुई आ रही

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मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको-अदम गोंडवी

आइए महसूस करिए ज़िन्दगी के ताप को मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको जिस गली में भुखमरी की

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अदभुत व्यंग्य कृति ‘रागदरबारी’ और उसके लेखक श्रीलाल शुक्ल की कहानी

समकालीन कथा-साहित्य में उद्देश्यपूर्ण व्यंग्य रचनाओ के लिये विख्यात एवं उपन्यासकार के रूप में प्रतिष्ठित लेखक श्रीलाल शुक्ल ने  130

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बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे भीष्म साहनी   

हिंदी भाषी लेखक, नाटककार व कलाकार भीष्म साहनी को भारत विभाजन पर आधारित उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘तमस’ के चलते विश्वभर

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सआदत हसन मंटों की एक मार्मिक कहानी खोल दो

सआदत हसन मंटो जिन्होंने अपनी कहानियों से समाज के सामने नंगा सच प्रस्तुत किया। उनकी कहानियों तात्कालिक समाज से आगे

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