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चेतन आनंद : आख़िर में बैठ ही गया तन्हाइयों के साथ

चेतन आनंद : आख़िर में बैठ ही गया तन्हाइयों के साथ Chetan anand Hindi Gazal: Aakhir mai baith hi gaya tanhaiyo ke saath
चेतन आनंद : आख़िर में बैठ ही गया तन्हाइयों के साथ

आख़िर में बैठ ही गया तन्हाइयों के साथ

चलता भी कैसे वो भला परछांइयों के साथ।

 

मायूसियां मिलेंगीं तुझे] चाह छोड़ दे]

सपना कभी रहा भी है सच्चाइयों के साथ।

 

मैने सुना था मंज़िलें मिलती ज़रूर हैं

मैं चल रहा हूं इसलिये कठिनाइयों के साथ।

 

मैं चलते-चलते धूप के साये में रुक गया

वो रुकते-रुकते चल दिया परछांइयों के साथ।

 

पछवा हवा चली तो बहुत हो गये जुदा

कम लोग रह गये हैं अब पुरवाइयों के साथ।

 

 

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चेतन आनंद

चेतन आनंद

लगभग 24 साल तक हिन्दुस्तान, नईदुनिया, आज समाज, दैनिक हिन्ट, दैनिक युग करवट, हमारा ग़ाज़ियाबाद पत्रिका में सलाहकार सम्पादक, समाचार सम्पादक, ब्यूरो चीफ, मुख्य संवाददाता, संवाददाता आदि सक्रिय पदों पर ज़िम्मेदारी निभाई। अपनी अभूतपूर्व कविताओं के लिए चेतन आनन्द जी को काव्य कुमार सम्मान ग़ाज़ियाबाद, काव्य-गौरव सम्मान ग़ाज़ियाबाद, प्रतिष्ठा पुरस्कार हैदराबाद, साहित्यश्री पुरस्कार बँगलुरु, हिन्दी साहित्य साधना सम्मान ग़ाज़ियाबाद, ओएनजीसी ग्रुप द्वारा हिन्दी साहित्य सेवा पुरस्कार लखनऊ, आगमन संस्था द्वारा दुष्यंत कुमार सम्मान 2017 सम्मान फरीदाबाद समेत दर्जनों पुरस्कार व सम्मान से नवाजा गया। वर्तमान में ‘काव्य-गंगा’ नाम से यूट्यूब चैनल का संचालन करते हैं। जिसके तहत वे नवोदित कवियों व शायरों को एक सार्थक मंच दिया जाता है।

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