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चेतन आनंद : मेरी परवाज़ जब-जब भी कभी अम्बर में होती है

चेतन आनंद : मेरी परवाज़ जब-जब भी कभी अम्बर में होती है Chetan anand Hindi Gazal: Meri parwaaj jab jab bhi kabhi ambar mai hoti hai
चेतन आनंद : मेरी परवाज़ जब-जब भी कभी अम्बर में होती है

मेरी परवाज़ जब-जब भी कभी अम्बर में होती है

कोई उलझी हुई क़ैंची भी मेरे पर में होती है।

 

भले कुछ भी करो लेकिन हमेशा याद ये रखना

पड़ोसी भांप लेते हैं जो अनबन घर में होती है।

 

तू इक छोटी-सी मछली है, तू बचना ऐसे बगुलों से

जो उड़ते हैं फ़लक में और नज़र सागर में होती है।

 

ग़लत हैं वो] जो कहते हैं नसीहत है क़िताबों में

मैं कहता हूं] नसीहत तो सदा ठोकर में होती है।

 

उसे भाता नहीं है चांदनी का क़ीमती बिस्तर

गुज़र जिसकी हमेशा धूप की चादर में होती है।

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Title: chetan anand hindi gazal meri parwaaj jab jab bhi kabhi ambar mai hoti hai in Hindi  | In Category: गजल ghazal
चेतन आनंद

चेतन आनंद

लगभग 24 साल तक हिन्दुस्तान, नईदुनिया, आज समाज, दैनिक हिन्ट, दैनिक युग करवट, हमारा ग़ाज़ियाबाद पत्रिका में सलाहकार सम्पादक, समाचार सम्पादक, ब्यूरो चीफ, मुख्य संवाददाता, संवाददाता आदि सक्रिय पदों पर ज़िम्मेदारी निभाई। अपनी अभूतपूर्व कविताओं के लिए चेतन आनन्द जी को काव्य कुमार सम्मान ग़ाज़ियाबाद, काव्य-गौरव सम्मान ग़ाज़ियाबाद, प्रतिष्ठा पुरस्कार हैदराबाद, साहित्यश्री पुरस्कार बँगलुरु, हिन्दी साहित्य साधना सम्मान ग़ाज़ियाबाद, ओएनजीसी ग्रुप द्वारा हिन्दी साहित्य सेवा पुरस्कार लखनऊ, आगमन संस्था द्वारा दुष्यंत कुमार सम्मान 2017 सम्मान फरीदाबाद समेत दर्जनों पुरस्कार व सम्मान से नवाजा गया। वर्तमान में ‘काव्य-गंगा’ नाम से यूट्यूब चैनल का संचालन करते हैं। जिसके तहत वे नवोदित कवियों व शायरों को एक सार्थक मंच दिया जाता है।

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