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सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता: राखी की चुनौती Hindi Poem : Subhadra Kumari Chauhan Poem Rakhi Ki Chunauti
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सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता: राखी की चुनौती

बहिन आज फूली समाती न मन में । तड़ित आज फूली समाती न घन में ।। घटा है न झूली समाती गगन में । लता आज फूली समाती न बन में ।। कही राखियाँ है, चमक है कहीं पर, कही बूँद है, पुष्प प्यारे खिले हैं । ये आयी है राखी, सुहाई है पूनो, बधाई […]
सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता : जलियाँवाला बाग में बसंत Hindi Poem : Subhadra Kumari Chauhan Poem Jallianwala Bagh Mai Basant
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सुभद्रा कुमारी चौहान की कविता : जलियाँवाला बाग में बसंत

यहाँ कोकिला नहीं, काग हैं, शोर मचाते, काले काले कीट, भ्रमर का भ्रम उपजाते। कलियाँ भी अधखिली, मिली हैं कंटक-कुल से, वे पौधे, व पुष्प शुष्क हैं अथवा झुलसे। परिमल-हीन पराग दाग़ सा बना पड़ा है, हा! यह प्यारा बाग़ खून से सना पड़ा है। ओ, प्रिय ऋतुराज! किन्तु धीरे से आना, यह है शोक-स्थान […]
अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की कविता : कर्मवीर Hindi Poem: Ayodhya Singh Upadhyay Ki Kavita Karmveer
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अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध' की कविता : कर्मवीर

देख कर बाधा विविध, बहु विघ्न घबराते नहीं। रह भरोसे भाग के दुख भोग पछताते नहीं। काम कितना ही कठिन हो किन्तु उकताते नहीं। भीड़ में चंचल बने जो वीर दिखलाते नहीं। हो गये एक आन में उनके बुरे दिन भी भले। सब जगह सब काल में वे ही मिले फूले फले।1।   आज करना […]
फणीश्वरनाथ रेणु की कविता : साजन होली आई है Hindi Kavita: Phanishwar Nath 'Renu ki Kavita Sajan Hoi Aayi Hai
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फणीश्वरनाथ रेणु की कविता : साजन होली आई है

साजन! होली आई है! सुख से हँसना जी भर गाना मस्ती से मन को बहलाना पर्व हो गया आज- साजन ! होली आई है! हँसाने हमको आई है! साजन! होली आई है! इसी बहाने क्षण भर गा लें दुखमय जीवन को बहला लें ले मस्ती की आग- साजन! होली आई है! जलाने जग को आई […]
क्या कहने इस ठाठ के : कैलाश गौतम Kailash Gautam ki kavita kya kahane ish thaath ke
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क्या कहने इस ठाठ के : कैलाश गौतम

सिर पर आग, पीठ पर पर्वत, पांव में जूते काठ के क्या कहने इस ठाठ के यह तस्वीर नई है भाई, आज़ादी के बाद की जितनी कीमत खेत की कल थी, उतनी कीमत खाद की सब धोबी के कुत्ते निकले, घर के हुए न घाट के क्या कहने इस ठाठ के बिना रीढ़ के लोग […]
कचहरी न जाना : कैलाश गौतम Kailash Gautam ki kavita kachahari n jaana
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कचहरी न जाना : कैलाश गौतम

भले डांट घर में तू बीबी की खाना भले जैसे -तैसे गिरस्ती चलाना भले जा के जंगल में धूनी रमाना मगर मेरे बेटे कचहरी न जाना   कचहरी न जाना कचहरी न जाना   कचहरी हमारी तुम्हारी नहीं है कहीं से कोई रिश्तेदारी नहीं है अहलमद से भी कोरी यारी नहीं है तिवारी था पहले […]
पप्पू की दुल्हन : कैलाश गौतम Kailash Gautam ki kavita Pappu ki dulhan
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पप्पू की दुल्हन : कैलाश गौतम

हमारे पड़ोस में एक नयी नयी बहू आई. गर्मी के दिन थे, एक दिन छत पर से उसकी आवाज़ आई – अम्मा जी ! बाबू जी की खटिया मैंने खड़ी कर दी, आपकी भी कर दूँ ?. दरअसल उसका आशय था, छत पर बिछी चारपाइयों के खड़ा करने से, लेकिन उसमें से जो ध्वन्यार्थ निकलता […]
बड़की भौजी : कैलाश गौतम Kailash Gautam ki kavita badki bauji
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बड़की भौजी : कैलाश गौतम

जब देखो तब बड़की भौजी हँसती रहती है हँसती रहती है कामों में फँसती रहती है । झरझर झरझर हँसी होंठ पर झरती रहती है घर का खाली कोना भौजी भरती रहती है ।।   डोरा देह कटोरा आँखें जिधर निकलती है बड़की भौजी की ही घंटों चर्चा चलती है । ख़ुद से बड़ी उमर […]
अब मांग रहा हिन्द से तलवार हिमालय: गोपाल सिंह नेपाली Hindi Poem on Himalaya by Gopal singh nepali ab maang raha hind se talwaar himalaya
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अब मांग रहा हिन्द से तलवार हिमालय: गोपाल सिंह नेपाली

शंकर की पुरी, चीन ने सेना को उतारा चालीस करोड़ों को हिमालय ने पुकारा हो जाय पराधीन नहीं गंग की धारा गंगा के किनारों ने शिवालय को पुकारा। चालीस करोड़ों को हिमालय ने पुकारा।   अम्बर के तले हिन्द की दीवार हिमालय सदियों से रहा शांति की मीनार हिमालय अब मांग रहा हिन्द से तलवार […]
गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है: गोपाल सिंह नेपाली Hindi Poem on Himalaya by Gopal singh nepali Giriraj himalaya se bharat ka kuchh esa hi naata hai
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गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है 

इतनी ऊँची इसकी चोटी कि सकल धरती का ताज यही । पर्वत-पहाड़ से भरी धरा पर केवल पर्वतराज यही ।। अंबर में सिर, पाताल चरण मन इसका गंगा का बचपन तन वरण-वरण मुख निरावरण इसकी छाया में जो भी है, वह मस्‍तक नहीं झुकाता है । ग‍िरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता […]