रामधारी सिंह दिनकर की कविता: कृष्ण की चेतावनी

वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम, सह धूप-घाम, पानी-पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर। सौभाग्य न सब दिन

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मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको-अदम गोंडवी

आइए महसूस करिए ज़िन्दगी के ताप को मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको जिस गली में भुखमरी की

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गाँव गया था, गाँव से भागा : कैलाश गौतम

गाँव गया था गाँव से भागा रामराज का हाल देखकर पंचायत की चाल देखकर आँगन में दीवाल देखकर सिर पर

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अमौसा के मेला : कैलाश गौतम

भक्ति के रंग में रंगल गाँव देखा, धरम में, करम में, सनल गाँव देखा. अगल में, बगल में सगल गाँव

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बड़की भौजी : कैलाश गौतम

जब देखो तब बड़की भौजी हँसती रहती है हँसती रहती है कामों में फँसती रहती है । झरझर झरझर हँसी

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कचहरी न जाना : कैलाश गौतम

भले डांट घर में तू बीबी की खाना भले जैसे -तैसे गिरस्ती चलाना भले जा के जंगल में धूनी रमाना

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पप्पू की दुल्हन : कैलाश गौतम

हमारे पड़ोस में एक नयी नयी बहू आई. गर्मी के दिन थे, एक दिन छत पर से उसकी आवाज़ आई

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क्या कहने इस ठाठ के : कैलाश गौतम

सिर पर आग, पीठ पर पर्वत, पांव में जूते काठ के क्या कहने इस ठाठ के यह तस्वीर नई है

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देखो कैसे खड़ा हिमालय : सोहन लाल द्विवेदी

युग युग से है अपने पथ पर देखो कैसा खड़ा हिमालय! डिगता कभी न अपने प्रण से रहता प्रण पर

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अब मांग रहा हिन्द से तलवार हिमालय: गोपाल सिंह नेपाली

शंकर की पुरी, चीन ने सेना को उतारा चालीस करोड़ों को हिमालय ने पुकारा हो जाय पराधीन नहीं गंग की

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गिरिराज हिमालय से भारत का कुछ ऐसा ही नाता है 

इतनी ऊँची इसकी चोटी कि सकल धरती का ताज यही । पर्वत-पहाड़ से भरी धरा पर केवल पर्वतराज यही ।।

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