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जां निसार अख्तर की गजल: हर लफ़्ज़ तिरे जिस्म की खुशबू में ढला है Hindi Gazal: Jaan Nisar Akhtar, Har Lafz Tere Jism Ki Khushboo Mai Dhala Hai
Hindi Gazal Jaan Nisar Akhtar, Har Lafz Tere Jism Ki Khushboo Mai Dhala Hai
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जां निसार अख्तर की गजल:  हर लफ़्ज़ तिरे जिस्म की खुशबू में ढला है

हर लफ़्ज़ तिरे जिस्म की खुशबू में ढला है ये तर्ज़, ये अन्दाज-ए-सुख़न हमसे चला है अरमान हमें एक रहा हो तो कहें भी क्या जाने, ये दिल कितनी चिताओं में जला है अब जैसा भी चाहें जिसे हालात बना दें है यूँ कि कोई शख़्स बुरा है, न भला है
जां निसार अख्तर की गजल: इसी सबब से हैं शायद, अज़ाब जितने हैं Hindi Gazal: Jaan Nisar Akhtar, Ishi Sabab Se Hai Shyad Ajaab Jitne Hai
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जां निसार अख्तर की गजल: इसी सबब से हैं शायद, अज़ाब जितने हैं

इसी सबब से हैं शायद, अज़ाब जितने हैं झटक के फेंक दो पलकों पे ख़्वाब जितने हैं वतन से इश्क़, ग़रीबी से बैर, अम्न से प्यार सभी ने ओढ़ रखे हैं नक़ाब जितने हैं समझ सके तो समझ ज़िन्दगी की उलझन को सवाल उतने नहीं है, जवाब जितने हैं
जां निसार अख्तर की गजल: ज़रा-सी बात पे हर रस्म तोड़ आया था Hindi Gazal: Jaan Nisar Akhtar, Jara Si Baat Pe Har Rashm Tod Aaya Tha
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जां निसार अख्तर की गजल:  ज़रा-सी बात पे हर रस्म तोड़ आया था

ज़रा-सी बात पे हर रस्म तोड़ आया था दिल-ए-तबाह ने भी क्या मिज़ाज पाया था गुज़र गया है कोई लम्हा-ए-शरर की तरह अभी तो मैं उसे पहचान भी न पाया था मुआफ़ कर न सकी मेरी ज़िन्दगी मुझको वो एक लम्हा कि मैं तुझसे तंग आया था शिगुफ़्ता फूल सिमट कर कली बने जैसे कुछ […]
जां निसार अख्तर की गजल: ऐ दर्द-ए-इश्क़ तुझसे मुकरने लगा हूँ मैं Hindi Gazal: Jaan Nisar Akhtar, Ee Dard-E-Ishq Tujhse Mukarne Laga Hanu mai
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जां निसार अख्तर की गजल: ऐ दर्द-ए-इश्क़ तुझसे मुकरने लगा हूँ मैं

ऐ दर्द-ए-इश्क़ तुझसे मुकरने लगा हूँ मैं मुझको सँभाल हद से गुज़रने लगा हूँ मैं पहले हक़ीक़तों ही से मतलब था, और अब एक-आध बात फ़र्ज़ भी करने लगा हूँ मैं हर आन टूटते ये अक़ीदों के सिलसिले लगता है जैसे आज बिखरने लगा हूँ मैं ऐ चश्म-ए-यार ! मेरा सुधरना मुहाल था तेरा कमाल […]
जां निसार अख्तर की गजल: लम्हा-लम्हा तिरी यादें जो चमक उठती हैं Hindi Gazal: Jaan Nisar Akhtar, Lamha Lamha Tiri Yande Jo Chamak Uthati Hain
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जां निसार अख्तर की गजल: लम्हा-लम्हा तिरी यादें जो चमक उठती हैं

लम्हा-लम्हा तिरी यादें जो चमक उठती हैं ऐसा लगता है कि उड़ते हुए पल जलते हैं मेरे ख़्वाबों में कोई लाश उभर आती है बन्द आँखों में कई ताजमहल जलते हैं
जां निसार अख्तर की गजल: ज़िन्दगी ये तो नहीं, तुझको सँवारा ही न हो Hindi Gazal: Jaan Nisar Akhtar-Jindgai Ye To Nahi Tujhko Sanwara Hi N Ho
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जां निसार अख्तर की गजल: ज़िन्दगी ये तो नहीं, तुझको सँवारा ही न हो

ज़िन्दगी ये तो नहीं, तुझको सँवारा ही न हो कुछ न कुछ हमने तिरा क़र्ज़ उतारा ही न हो कू-ए-क़ातिल की बड़ी धूम है चलकर देखें क्या ख़बर, कूचा-ए-दिलदार से प्यारा ही न हो दिल को छू जाती है यूँ रात की आवाज़ कभी चौंक उठता हूँ कहीं तूने पुकारा ही न हो कभी पलकों […]
जां निसार अख्तर की गजल: वो आँख अभी दिल की कहाँ बात करे है Hindi Gazal: Jaan Nisar Akhtar-Wo Aaankh Abhi Dil Ki Kaha Baat Kare Hai
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जां निसार अख्तर की गजल: वो आँख अभी दिल की कहाँ बात करे है

वो आँख अभी दिल की कहाँ बात करे है कमबख़्त मिले है तो सवालात करे है वो लोग जो दीवाना-ए-आदाब-ए-वफ़ा थे इस दौर में तू उनकी कहाँ बात करे है क्या सोच है, मैं रात में क्यों जाग रहा हूँ ये कौन है जो मुझसे सवालात करे है कुछ जिसकी शिकायत है न कुछ जिसकी […]
जां निसार अख्तर की गजल: फुर्सत-ए-कार फ़क़त चार घड़ी है यारो Hindi Gazal: Jaan Nishar Akhtar Fursat-E-Kaar Faqat Chaar Ghadi Hai Yaaro
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जां निसार अख्तर की गजल: फुर्सत-ए-कार फ़क़त चार घड़ी है यारो

फुर्सत-ए-कार फ़क़त चार घड़ी है यारो ये न सोचो कि अभी उम्र पड़ी है यारो अपने तारीक मकानों से तो बाहर झाँको ज़िन्दगी शम्अ लिए दर पे खड़ी है यारो हमने सदियों इन्हीं ज़र्रो से मोहब्बत की है चाँद-तारों से तो कल आँख लड़ी है यारो फ़ासला चन्द क़दम का है, मना लें चलकर सुबह […]
जां निसार अख्तर की गजल उजड़ी-उजड़ी हुई हर आस लगे Hindi Gazal : Jaan Nisar Akhtar Uzadi Uzadi Hui Har Aash Lage Hai
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जां निसार अख्तर की गजल: उजड़ी-उजड़ी हुई हर आस लगे

उजड़ी-उजड़ी हुई हर आस लगे ज़िन्दगी राम का बनबास लगे तू कि बहती हुई नदिया के समान तुझको देखूँ तो मुझे प्यास लगे फिर भी छूना उसे आसान नहीं इतनी दूरी पे भी, जो पास लगे वक़्त साया-सा कोई छोड़ गया ये जो इक दर्द का एहसास लगे एक इक लहर किसी युग की कथा […]
ज़िन्दगी तनहा सफ़र की रात है: जां निसार अख्तर Jaan Nishar Akhatr ki gajal Zindgi tanha safar ki raat hai
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 ज़िन्दगी तनहा सफ़र की रात है: जां निसार अख्तर

ज़िन्दगी तनहा सफ़र की रात है अपने-अपने हौसले की बात है   किस अक़ीदे की दुहाई दीजिए हर अक़ीदा  आज बेऔक़ात है   क्या पता पहुँचेंगे कब मंज़िल तलक घटते-बढ़ते फ़ासले का साथ है