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कचहरी न जाना : कैलाश गौतम Kailash Gautam ki kavita kachahari n jaana
कविता

कचहरी न जाना : कैलाश गौतम

भले डांट घर में तू बीबी की खाना भले जैसे -तैसे गिरस्ती चलाना भले जा के जंगल में धूनी रमाना मगर मेरे बेटे कचहरी न जाना   कचहरी न जाना कचहरी न जाना   कचहरी हमारी तुम्हारी नहीं है कहीं से कोई रिश्तेदारी नहीं है अहलमद से भी कोरी यारी नहीं है तिवारी था पहले […]