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क्या कहने इस ठाठ के : कैलाश गौतम Kailash Gautam ki kavita kya kahane ish thaath ke
कविता

क्या कहने इस ठाठ के : कैलाश गौतम

सिर पर आग, पीठ पर पर्वत, पांव में जूते काठ के क्या कहने इस ठाठ के यह तस्वीर नई है भाई, आज़ादी के बाद की जितनी कीमत खेत की कल थी, उतनी कीमत खाद की सब धोबी के कुत्ते निकले, घर के हुए न घाट के क्या कहने इस ठाठ के बिना रीढ़ के लोग […]