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ध्यान है एक अनुभव जहां स्मृति और कल्पना दोनों हो जाएं शून्य

ओशो का एक प्रसिद्ध वचन है-‘क्या तुम ध्यान करना चाहते हो ? तो ध्यान रखना कि ध्यान में न तो तुम्हारे सामने कुछ हो और न तुम्हारे पीछे ही कुछ हो। अतीत को मिट जाने दो और भविष्य को भी। स्मृति और कल्पना दोनों को शून्य हो जाने दो। फिर न तो समय होगा और […]