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नज़र-नवाज़ नज़ारा बदल न जाए कहीं : दुष्यंत कुमार Nazar nawaaj nazara badal n jaaye kahi dushyant kumar ki gazal
गजल

नज़र-नवाज़ नज़ारा बदल न जाए कहीं :  दुष्यंत कुमार

नज़र-नवाज़ नज़ारा बदल न जाए कहीं जरा-सी बात है मुँह से निकल न जाए कहीं   वो देखते है तो लगता है नींव हिलती है मेरे बयान को बंदिश निगल न जाए कहीं   यों मुझको ख़ुद पे बहुत ऐतबार है लेकिन ये बर्फ आंच के आगे पिघल न जाए कहीं   चले हवा तो […]