कलियुग में होने वाला है विष्णु का कल्कि अवतार


जब जब धर्म की हानि होती है तब तब भगवान खुद अवतार लेकर इस धरा को पापियों से मुक्त् करते हैं, समय समय पर विष्णु भगवान ने अवतार लेकर इस धरती को पापियों से मुकत् किया है। त्रेता में जहां राम के रूप में वही द्वापर में कृष्ण के रूप उन्होंने अवतार लिया है। पुराणों में माना गया है कि इसी श्रृंखला में कलियुग में विष्णु भगवान कल्कि का अवतार लेंगे। कल्कि अवतार (Kalki bhagwan vishnu incarnation  Kaliyuga) भविष्य में होगा या नहीं यह अभी अनिश्चित है मगर उनकी पूजा करीब पौने तीन सौ साल से की जा रही है। पुराणों के अनुसार श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को यह अवतार होगा अत: इसी दिन कल्कि जयंती का पर्व मनाया जाता है। राजस्थान के वांगड़ अंचल के डूंगरपुर जिले के साबला गांव में हरि मंदिर है जहां कल्कि अवतार की पूजा हो रही है।

इस मंदिर के गर्भगृह में लाखों भक्तों की श्रद्धा और विश्वास का केंद्र एक श्याम रंग की अश्वारूढ़ निष्कलंक भगवान की चतुर्भुज मूर्ति है जो घोड़े पर सवार है, जिसमें घोड़े के तीन पैर भूमि पर तथा एक पैर सतह से थोड़ा ऊंचा है। संत मावजी रचित ग्रंथों के अनुसार, जो पैर सतह से उठा हुआ है धीरे-धीरे भूमि की तरफ झुकने  लगेगा और जमीन पर टिक जाएगा, उस दिन से संसार का का उद्धार होना शुरू हो जायेगा ।

कल्कि पुराण के अनुसार अश्वारूढ़ निष्कलंक मूर्ति रूपी जिस देवता की पूजा की जा रही है कलयुग में यही  कल्कि अवतार के रूप में अवतरित होंगे |

ऐसी ही एक और मान्यता के अनुसार मुरादाबाद के संभल जिले में भी कल्कि विष्णु मंदिर है। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण अहिल्या बाई होल्कर ने करवाया था। स्थानीय लोगों की इस मंदिर में बहुत आस्था है। लोगों का मानना है कि कलियुग में होने वाले विष्णु का अवतार इसी इलाके में जन्म लेगा। सैंकड़ों वर्षों से कल्कि विष्णु मंदिर में भगवान कल्कि की पूजा अर्चना जारी है।


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