शादीशुदा जिंदगी के स्याह पहलुओं से लेकर बाल शोषण तक का सफ़र : चुम्बक


पिछले कुछ समय में Short फिल्मो का चलन शुरू हुआ है, जिनमे ‘चटनी’, ‘टैंपो’ और ‘जय माता दी’ आदि फिल्मो ने दर्शको को प्रभावित किया है | इस तरह की short filme अचानक से दिल-ओ-दिमाग पर वार करने लगती है और हमारी तार्किक बुद्धि का इम्तिहान लेती है | ऐसी ही एक Short film जो दर्शक को प्रभावित करती है वो है चुम्बक (Chumbak)

अधिकांश फिल्मो में twist aur turn की भरमार तो होती है मगर ये फिल्मे दर्शको को हैरान नहीं करतीं | मगर 10-15 मिनट की short filmo से युवा निर्देशकों ने बेहतरीन प्रस्तुती दी है | पटकथा की संपूर्णता आपको इस फिल्म का दीवाना बना देगी, नये मिजाज की लघु फिल्म ‘चुंबक’ आपको यही एहसास कराती है |

यह लघु फिल्म हिंदी सिनेमा की घिसीपिटे तरीको को अपनाने के बजाय शादीशुदा जिंदगी के अंधेरो से होते हुए बाल शोषण तक का सफ़र तय करती है | कलाकारों का अभिनय साधारण मगर परिस्थिति पर सटीक होने के कारण  ‘चुम्बक’ को  दर्शनीय बनाती है | इस Short film की एक खासियत यह भी है कि झकझोर देने वाले बैकग्राउंड स्कोर और एक्स्ट्रीम क्लोज-अप वाले कैमरा शॉट्स के बिना भी कहानी का सबसे जोरदार ट्विस्ट प्रभावी है और दर्शको को चकित करता है | इस फिल्म ने सिमी बिष्ट ने खूबसूरत गजल गाई है जो फिल्म को गति देते है, जिन्हें संगीतबद्ध सुमंतो रे ने किया है | ये गजल बारिश के मौसम को और सुहाना बनाती है |


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *