प्रकृति की गोद में केरल


मनोरम समुद्री दृश्‍य, 900 किमी लंबा समुद्र तट, 44 नदियां, गरम मसालों और चाय रबर के हरे-भरे बागान और हवा की तान पर झूमते नारियल पेड़ों की विस्‍तृत पंक्तियां दक्षिण भारत के इस राज्‍य को एक अद्भुत आभा प्रदान करते हैं। केरल अपने आयुर्वेदिक उपचारों व बहुरंगी संस्‍कृति के लिए भी देश ही  नहीं बल्कि विदेशों से भी सैलानियों को बरबस ही अपनी ओर आकर्षित करता है।
कोवलम- यहां अर्द्धचंद्राकार के तीन समुद्र तट हैं। केरल की राजधानी तिरूवंनतपुरम से मात्र 16 किमी दूर यह स्‍थल 1930 से विदेशी सैलानियों को लुभाता रहा है।
वारकाला- शांत समुद्री तट, खूबसूरत झरने ओर चट्टानी पहाडि़यों के कारण वारकाला जाना जाना है। 2000 वर्ष पुराना श्री जनार्दन स्‍वामी का मंदिर यहां का एक प्रमुख आकर्षण केंद्र है। वारकाला तिरूवनंतपुरम से मात्र 40 किमी दूरी पर स्थित है।
मुन्‍नार – यह पर्वतीय क्षेत्र समुद्रतल से लग्‍ाभग 1600 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। विस्‍तृत चाय बागान, घुमावदार रास्‍ते और कुहासे में ढंका यह शहर केरल के प्रमुख पर्वतीय स्‍थलों में से एक है।
विथीरी- अगर आप गरम मसालों के शौकीन हैं तो आपके लिए विथीरी एक अहम पड़ाव है। केरल के उत्‍तरपूर्वी भाग में समुद्र तल से 1300 मीटर की ऊंचाई पर स्थित विथीरी काफी, चाय, इलायची व काली मिर्च के लिए मशहूर है।
पेरियार- अगर शांत समुद्र तट और ऊंची हरी-भरी पहाडि़यों को देखकर भी आपका मन नहीं भरा तो इस वन्‍य प्राणी उद्यान में आपका स्‍वागत है। 777 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले इस अभयारण्‍य में आप घने जंगलों में विचरते बाघ, सांभर, हिरन, चीता व मालाबार गिलहरियों को देखने का भरपूर आनंद उठा सकते हैं। यहां एक सुंदर झील भी है जिसमें बोटिंग का लुत्‍फ उठाना न भूलें।
कैसे जाएं- केरल तिरूवनंतपुरम, कोची व कोइपीकोड अंतरर्राष्‍ट्रीय हवाई अड्डों द्वारा यूरोप, अमेरिका समेत दुनिया के अन्‍य प्रमुख देशों से जुड़ा हुआ है। आप चाहें तो भारत के किसी भी कोने से सड़क या रेल मार्ग द्वारा सुगमता से यहां पहुंच सकते हैं।
कब जाएं- यहां घूमने का सर्वोत्‍तम समय है अक्‍टूबर से फरवरी के बीच का। इस दौरान वर्ष के अन्‍य महीनों की तुलना में मौसम अपेक्षाकृत सुहावना रहता है।
कहां ठहरे- केरल में ठहरने के लिए आप अपनी सुविधानुसार, होटल, ट्री हाउस या हाउस बोट में से किसी भी एक को चुन सकते हैं। अगर आप प्रकृति की गोद में रहकर यहां की प्राकृतिक छटा और विविध रंगों को और भी करीब से देखना चाहते हैं तो यहां बड़ी संख्‍या में होमस्‍टेस भी उलब्‍ध हैं।

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