समुद्र में बिखरा सौन्‍दर्य अंडमान-निकोबार


हवा में झूमते सैंकड़ों नारियल के पेड़ और पांव तले मुलायम रेत का अहसास। कोलकाता से 1255 किमी दूर बंगाल की खाड़ी में स्थित अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, प्राकृतिक सौन्‍दर्य से लबरेज किसी सपनीले संसार जैसा है। बात चाहे नीले गगन में पक्षियों के झुंड उड़ते देखने की हो या गहरे समुद्र में गोता लगाने के रोमांच की, मिनी इंडिया में सब कुछ है। यहां समुद्र तट पर नारियल पेड़ों की सघन स्निग्‍ध छाया बरबस ही सैलानियों का मन मोह लेती है। एडवेंचर खेल जैसे स्‍कूबा डाइविंग और ट्रेकिंग के भी यहां पर्याप्‍त अवसर उपलब्‍ध हैं। मूंगा व प्रवाल से गढ़ा भारत का यह पर्यटन स्‍थल लगभग 572 द्वीपों का समूह है।
ऐतिहासिक काल से ही इस द्वीप समूह में आदिवासी रह रहे हैं। अंडमान में निगरीटो तो निकोबार में मंगोल जाति के लोगों की बहुलता है। अंग्रेजों का आगमन यहां करीब 1789 में हुआ। 1858 के पश्‍चात उन्‍होंने इस जगह को विद्रोही भारतीयों को दंड देने के लिए सबसे उपयुक्‍त पाया। चारों तरफ समुद्र से घिरा सेल्‍यूलर जेल और वाइपर द्वीप इसी की बानगी है। आज यहां सभी धर्मों के लोग हिंदू, मुस्लिम, ईसाई सिक्‍ख और आदिवासी मिलजुल कर रह रहे हैं।
इस द्वीप समूह तक पहुंचने के लिए हवाई जहाज या शिप किसी का भी चुनाव किया जा सकता है। शिप के तीन दिन के मुकाबले हवाई जहा में सफर सिर्फ चंद घंटों में सिमट जाता है। जहाज से उतरकर ही सबसे पहले यहां परमिट लेना पड़ता है। जो कि यहां आने वाले सभी पर्यटकों के लिए अनिवार्य है। विदेशी पर्यटकों को यहां घूमने आने से पहले 15 दिन का वैलिंड रेस्‍ट्रीक्‍टेड एरिया परमिट लेना पड़ता है। इसे बड़ी ही आसानी से किसी भी देश में स्थित भारतीय दूतावास या भारत में कोलकाता चेन्‍नई और पोर्ट ब्‍लेयर से हासिल किया जा सकता है। कुछ देर होटल में आराम फरमाने के बाद निकलते हैं इस द्वीप समूह को एक्‍सप्‍लोर करने।

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