स्थापत्य कला और भक्ति की नगरी : भोजपुर


भोपाल, मध्य प्रदेश से लगभग 30 किमी की दूरी पर रायसेन जिले में वेत्रवती नदी के किनारे बसा है तथा इसे “उत्तर भारत का सोमनाथ’ कहा जाता है। भोजपुर विशेषरूप से प्रकृति की गोद में स्थित भव्य शिव मंदिर की भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर के आसपास का नजारा बहुत ही आकर्षक व मन को लुभाने वाली है।

इस नगर की स्थापना तथा शिव मंदिर का निर्माण परमार वंश के परम प्रतापी राजा भोज ने 11वी शताब्दी में करवाई थी इसलिए इसे “भोजपुर मंदिर” या “भोजेश्वर मंदिर” भी कहा जाता है। इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग है, जिसकी ऊंचाई लगभग 21.5 फीट है । इस मंदिर की ऊंचाई लगभग 115 फीट है | मंदिर पूर्ण रूप से तैयार नही हो पाया, फिर भी जितना भी मंदिर का निर्माण हो पाया वो बहुत ही कलात्मक ढंग से तैयार किया है जो भारतीय इंजीनिरिंग और स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना है |

इस मंदिर के निर्माण पूरा न होने के बारे में अनेक कहानियां है, परन्तु जो सर्वमान्य तथ्य है वो ये है कि इसकी छत का पूरा ना होना, यदि मंदिर की छत पूरी तरह निर्मित होती तो यह भाग मुख्य मंदिर से भी भारी होता और मंदिर इस भार को सहन नहीं कर पाता, परिणामस्वरूप मन्दिर ढह जाता। आज भी अधूरी छत की जगह पर प्लास्टिक के द्वारा इसे कवर किया गया है। मंदिर के गर्भगृह के ऊपर बनी अधूरी गुम्बदाकार छत भारत में ही गुम्बद निर्माण के प्रचलन को भी प्रमाणित करती है, क्योंकि इस मंदिर का निर्माण भारत में इस्लाम के आगमन से भी पहले शुरू हो चूका था | कुछ विद्धानों का मत है कि इसे भारत का सबसे पहला गुम्बदीय छत वाली इमारत माना जा सकता है | इस मंदिर में सती, सावित्री, नारद, विष्णु, सरस्वती, अप्सराओं की मूर्तियां भी दर्शनीय है। मंदिर इतना दर्शनीय व मनलुभावन है कि घंटो तक इसे देखा जा सकता है |

विश्व प्रसिद्ध शिवलिंग की ऊंचाई 21.5 फिट, पिंडी का व्यास 18 फिट आठ इंच व जलहरी का निर्माण बीस बाई बीस है। साल में दो बार मंकर संक्रांति व महाशिवरात्रि पर्व पर, इस प्रसिद्ध स्थल पर वार्षिक मेले का आयोजन किया जाता है । एक ही पत्थर से निर्मित इतनी बड़़ी शिवलिंग अन्य कहीं नहीं है।

इस मंदिर में कई हैरान करने वाले तथ्य मौजूद है, जिनमें रॉक ड्रॉइंग सबसे प्रमुख है | पत्थरों पर बने मंदिर- योजना से संबद्ध नक्शों से मंदिर की वास्तुकला के बारे में बहुत- सी बातों की जानकारी मिलती है | यहां मंदिर की छत, मुख्य द्वार, खंभों आदि पर विलक्षण चित्रकारी देखने के लिए मिलती हैं। यहाँ एक संग्रहालय भी है जिसे भोजपुर संग्रहालय कहा जाता है, इस संग्रहालय में चित्रों के माध्यम से परमार वंश की वंशावली, मंदिर का निर्माण कैसे हुआ आदि की जानकारी मिलती है |

भोजपुर धार्मिकता, ऐतिहासिकता और स्थापत्य कला का अद्भुत मिश्रण है।


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